फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान बयान पर भाजपा का प्रहार, तुहिन सिन्हा ने उमर और कांग्रेस से माँगा स्पष्टीकरण
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने 25 अक्टूबर 2026 को नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान-समर्थक कथित बयानों पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) दोनों से इस मामले में अपना पक्ष सार्वजनिक करने की माँग की। साथ ही, उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 1 नवंबर को दिल्ली में रैली आयोजित करने के निर्णय पर भी सवाल उठाए, यह कहते हुए कि यह तारीख 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी से जुड़ी है।
फारूक अब्दुल्ला पर तुहिन सिन्हा के आरोप
सिन्हा ने कहा, 'पाकिस्तान का समर्थन करने वाले फारूक अब्दुल्ला के अजीबोगरीब बयान एक बार फिर उन्हें देशद्रोही साबित करते हैं। पिछले कई दशकों से, वे कभी खुलकर पाकिस्तान के पक्ष में बयान देते रहे हैं, तो कभी सत्ता में बने रहने के लिए धोखे का सहारा लेते रहे हैं।' उन्होंने आगे कहा कि उनके 'कल दिए गए बयान' इस बात की पुष्टि करते हैं।
उमर अब्दुल्ला को इस्तीफे की चुनौती
सिन्हा ने उमर अब्दुल्ला को सीधी चुनौती दी — या तो वे अपने पिता के बयानों की निंदा करें, या फिर स्वीकार करें कि वे उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा, 'अगर वे अपने पिता के साथ खड़े हैं, तो मुख्यमंत्री के रूप में काम करने का उनका नैतिक अधिकार खत्म हो जाता है और उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर विपक्षी एकता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
कांग्रेस से सफाई की माँग
सिन्हा ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के बीच गठबंधन का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस को फारूक अब्दुल्ला के कथित पाकिस्तान-समर्थक रुख पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया, 'क्या फारूक अब्दुल्ला राहुल गांधी के इशारे पर काम कर रहे हैं? राहुल गांधी अभी किसी अज्ञात जगह पर छुट्टियाँ मना रहे हैं, तो हो सकता है कि वे फारूक अब्दुल्ला को भारत-विरोधी बयानबाज़ी करने के निर्देश दे रहे हों।' यह आरोप BJP की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह INDIA गठबंधन के घटकों को एक-दूसरे के बयानों पर जवाबदेह ठहराने की कोशिश करती है।
1 नवंबर रैली और 1984 की बरसी पर विवाद
सिन्हा ने कहा कि 1 नवंबर को दिल्ली में INDIA गठबंधन की प्रस्तावित रैली — जिसे 'वोट चोरी' रैली कहा जा रहा है — 'लाखों सिख परिवारों की भावनाओं का अपमान' है। उन्होंने याद दिलाया कि 1 नवंबर 1984 को कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर सिख-विरोधी दंगों में शामिल होने के आरोप लगे थे, और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उस हिंसा पर कथित तौर पर 'जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती हिलती है' जैसी विवादित टिप्पणी की थी। गौरतलब है कि 1984 के दंगे भारत के सबसे दर्दनाक अध्यायों में से एक हैं और चुनावी राजनीति में इनका संदर्भ हमेशा संवेदनशील रहा है।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य
फारूक अब्दुल्ला अपने बयानों के कारण पहले भी विवाद में रहे हैं और BJP उनके पाकिस्तान-संबंधी वक्तव्यों को बार-बार निशाना बनाती आई है। इस बार BJP ने न केवल फारूक बल्कि उमर अब्दुल्ला और कांग्रेस को भी कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की है — यह दर्शाता है कि पार्टी INDIA गठबंधन की आंतरिक जवाबदेही को चुनावी मुद्दा बनाने की दिशा में काम कर रही है। कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।