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चटगांव बंदरगाह: मार्स्क ग्रुप को 30 साल का ठेका, बांग्लादेश ने चीन को दी रणनीतिक मात

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चटगांव बंदरगाह: मार्स्क ग्रुप को 30 साल का ठेका, बांग्लादेश ने चीन को दी रणनीतिक मात

सारांश

बांग्लादेश ने चटगांव बंदरगाह का 30 साल का ठेका डेनमार्क के मार्स्क ग्रुप को देकर चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति को सीधी चुनौती दी है। ढाका की नीति साफ है — चीनी निवेश हाँ, लेकिन बंदरगाहों पर चीनी नियंत्रण नहीं।

मुख्य बातें

चटगांव पोर्ट अथॉरिटी ने मार्स्क ग्रुप (डेनमार्क) के साथ लाडिया कंटेनर टर्मिनल के लिए 30 साल का PPP समझौता किया।
जून 2026 में PM तारिक रहमान की बीजिंग यात्रा में मोंगला बंदरगाह पर चीनी परियोजना का निर्णय हुआ था, पर चटगांव से चीन को बाहर रखा गया।
मातारबाड़ी बंदरगाह का विकास JICA के रियायती ऋण से, और पतेंगा टर्मिनल का संचालन रेड सी गेटवे टर्मिनल (सऊदी अरब) कर रही है।
कॉक्स बाज़ार सुविधा का 5 साल का ठेका इंडोनेशिया की कंपनी पीटी पर्टामिना ट्रांस कॉन्टिनेंटल को मिला।
मोंगला समुद्र से 100 किमी दूर नदी बंदरगाह है — नौसैनिक अड्डे के लिए अनुपयुक्त; चटगांव पर पश्चिमी कंपनियों की मौजूदगी चीनी नौसेना की संभावनाएँ सीमित करती है।
चीन अनवारा (चटगांव) में 800 एकड़ का आर्थिक-औद्योगिक क्षेत्र बना रहा है — व्यावसायिक उपस्थिति जारी।

बांग्लादेश की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार ने चटगांव बंदरगाह पर लाडिया कंटेनर टर्मिनल के विकास और संचालन का 30 वर्षीय ठेका डेनमार्क की दिग्गज शिपिंग कंपनी मार्स्क ग्रुप को सौंपकर बंगाल की खाड़ी में चीन की रणनीतिक पकड़ मज़बूत करने की योजना को बड़ा झटका दिया है। यह समझौता सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) ढाँचे के तहत किया गया है, जिसमें मार्स्क ग्रुप टर्मिनल की डिज़ाइनिंग, वित्तपोषण, निर्माण और परिचालन का पूरा दायित्व संभालेगा। रिपोर्टों के अनुसार, यह निर्णय उस समय आया है जब बीजिंग बांग्लादेश के बंदरगाहों में अपनी उपस्थिति गहरी करने के लिए लगातार प्रयासरत है।

मुख्य घटनाक्रम

चटगांव पोर्ट अथॉरिटी ने मार्स्क ग्रुप के साथ जो करार किया है, वह बांग्लादेश के बंदरगाह विकास के इतिहास में एक उल्लेखनीय मोड़ है। उल्लेखनीय है कि यह समझौता 2025 में अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान हस्ताक्षरित हुआ था। इसी दौर में जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के रियायती ऋण से मातारबाड़ी बंदरगाह के विकास का समझौता भी पूरा किया गया।

इसके साथ ही, सऊदी अरब की कंपनी रेड सी गेटवे टर्मिनल जून 2025 से पतेंगा कंटेनर टर्मिनल का संचालन कर रही है — जो चटगांव बंदरगाह का पहला ऐसा टर्मिनल है जिसकी बागडोर किसी विदेशी कंपनी के हाथ में है। इसके अतिरिक्त, इंडोनेशिया की सरकारी कंपनी पीटी पर्टामिना ट्रांस कॉन्टिनेंटल को कॉक्स बाज़ार स्थित सुविधा के संचालन और रखरखाव का पाँच साल का ठेका दिया गया है।

चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति को झटका

रिपोर्टों के अनुसार, जून 2026 में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की बीजिंग यात्रा के दौरान यह तय हुआ था कि चीन मोंगला बंदरगाह का विकास करेगा और चीनी वित्तीय सहायता से दो अत्याधुनिक कंटेनर जेटी का निर्माण किया जाएगा। परंतु चटगांव में पश्चिमी समर्थन वाली वैश्विक कंपनियों की बढ़ती उपस्थिति ने चीन की व्यापक रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर अंकुश लगा दिया है।

विश्लेषकों के अनुसार, मोंगला बंदरगाह समुद्र से लगभग 100 किलोमीटर दूर एक नदी बंदरगाह है, इसलिए यह नौसैनिक अड्डे के रूप में रणनीतिक दृष्टि से उपयुक्त नहीं है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब चीन हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति — यानी भारत को चारों ओर से घेरने वाले बंदरगाहों के नेटवर्क — को मज़बूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

बांग्लादेश की संतुलन नीति

गौरतलब है कि ढाका की लगातार सरकारें बंदरगाह विकास में चीन पर एकतरफा निर्भरता से बचती रही हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भी भारत की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए चीनी सहायता से सोनादिया में गहरे समुद्र के बंदरगाह के निर्माण की अनुमति देने से इनकार किया था।

वर्तमान BNP सरकार का दृष्टिकोण भी इसी नीति की निरंतरता दर्शाता है — चीनी निवेश से आर्थिक लाभ उठाना, लेकिन बंदरगाहों का परिचालन नियंत्रण अन्य अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को देकर रणनीतिक संतुलन बनाए रखना।

चीन की मौजूदगी और व्यावसायिक हित

चीनी कंपनियाँ फिलहाल चटगांव बंदरगाह पर बंदरगाह संबंधी मशीनें आपूर्ति करने और आसपास औद्योगिक पार्क बनाने में सक्रिय हैं। चटगांव के अनवारा में 800 एकड़ भूमि पर चीन आर्थिक एवं औद्योगिक क्षेत्र का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, जिसका उद्देश्य निर्यातोन्मुखी उद्योगों में निवेश आकर्षित करना है।

रिपोर्टों के अनुसार, मोंगला बंदरगाह के विकास में चीन की भागीदारी से बीजिंग को बांग्लादेश के कपड़ा व्यापार में लाभ मिलेगा, क्योंकि मोंगला, चटगांव की तुलना में परिधान उद्योग के केंद्र ढाका के अधिक निकट है।

क्या होगा आगे

चटगांव बंदरगाह — जो बांग्लादेश के निर्यात-आयात व्यापार का मुख्य केंद्र है — पर पश्चिमी और एशियाई देशों की कंपनियों की बढ़ती उपस्थिति यह संकेत देती है कि बांग्लादेश अपनी समुद्री संपत्तियों को किसी एक शक्ति के प्रभुत्व से बचाने के लिए सचेत रणनीति अपना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में बंगाल की खाड़ी में भू-रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज़ होगी, और बांग्लादेश की बंदरगाह नीति इस समीकरण में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुचिंतित भू-रणनीतिक संदेश है — चीनी पैसा लो, लेकिन चीनी नियंत्रण मत दो। दिलचस्प यह है कि यह नीति शेख हसीना से BNP तक, सरकारें बदलने के बावजूद निरंतर बनी हुई है, जो दर्शाता है कि ढाका में बंदरगाह संप्रभुता को लेकर एक गहरी राष्ट्रीय सहमति है। भारत के लिए यह राहत की बात है, लेकिन सतर्कता ज़रूरी है — अनवारा का 800 एकड़ का चीनी औद्योगिक क्षेत्र और मोंगला पर चीन की बढ़ती पकड़ यह साबित करती है कि बीजिंग एक द्वार बंद होने पर दूसरे से प्रवेश की रणनीति बना चुका है।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश ने चटगांव बंदरगाह का ठेका किसे और किस शर्त पर दिया है?
बांग्लादेश की चटगांव पोर्ट अथॉरिटी ने डेनमार्क के मार्स्क ग्रुप के साथ 30 साल का समझौता किया है। इस PPP ढाँचे के तहत मार्स्क लाडिया कंटेनर टर्मिनल की डिज़ाइनिंग, वित्तपोषण, निर्माण और संचालन करेगा।
इस फ़ैसले से चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति को कैसे झटका लगा?
चीन बंगाल की खाड़ी में अपने रणनीतिक हित साधने के लिए बांग्लादेश के प्रमुख बंदरगाहों पर नियंत्रण चाहता था। चटगांव — जो बांग्लादेश का सबसे बड़ा व्यापारिक बंदरगाह है — पर पश्चिमी कंपनियों की मौजूदगी से चीन की नौसैनिक या रणनीतिक उपस्थिति की संभावना सीमित हो गई है।
मोंगला बंदरगाह में चीन की क्या भूमिका है?
जून 2026 में PM तारिक रहमान की बीजिंग यात्रा के दौरान तय हुआ था कि चीन मोंगला बंदरगाह पर दो अत्याधुनिक कंटेनर जेटी बनाएगा। हालाँकि, मोंगला समुद्र से करीब 100 किलोमीटर दूर एक नदी बंदरगाह है, इसलिए यह नौसैनिक अड्डे के रूप में उपयुक्त नहीं माना जाता।
बांग्लादेश के अन्य बंदरगाहों पर कौन-सी विदेशी कंपनियाँ काम कर रही हैं?
सऊदी अरब की रेड सी गेटवे टर्मिनल जून 2025 से पतेंगा कंटेनर टर्मिनल का संचालन कर रही है। इंडोनेशिया की पीटी पर्टामिना ट्रांस कॉन्टिनेंटल को कॉक्स बाज़ार सुविधा के लिए 5 साल का ठेका मिला है, और JICA के ऋण से मातारबाड़ी बंदरगाह विकसित हो रहा है।
क्या चीन बांग्लादेश के बंदरगाहों से पूरी तरह बाहर हो गया है?
नहीं। चीन चटगांव के अनवारा में 800 एकड़ का आर्थिक-औद्योगिक क्षेत्र बना रहा है और बंदरगाह की मशीनें आपूर्ति कर रहा है। बांग्लादेश की नीति चीनी आर्थिक निवेश को प्रोत्साहित करने और साथ ही बंदरगाहों के परिचालन नियंत्रण से उसे दूर रखने की है।
राष्ट्र प्रेस
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