मणिपुर CM खेमचंद सिंह का बड़ा बयान: बंदूक संस्कृति खत्म हो तभी आएगी स्थायी शांति
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक राज्य में 'बंदूक संस्कृति' (गन कल्चर) का अंत नहीं होता, तब तक न तो मणिपुर में तरक्की संभव है और न ही स्थायी शांति। यह बयान उन्होंने कांगपोकपी जिले स्थित 'सिनाई कैंप' के ऐतिहासिक दौरे के अवसर पर दिया — यह पहला मौका है जब किसी मौजूदा मुख्यमंत्री ने 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस' (एसओओ) समझौते के तहत निर्धारित किसी कैंप का सीधे जाकर निरीक्षण किया।
सिनाई कैंप दौरे की पृष्ठभूमि
गत सप्ताह केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) की कोबरा (कमांडो बटालियन फॉर रिजोल्यूट एक्शन) यूनिट, मणिपुर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने एक संयुक्त अभियान चलाया, जिसके बाद सिनाई कैंप से हथियार हटाकर उसे CRPF के नियंत्रण में ले लिया गया। यह अभियान कांगपोकपी और इंफाल ईस्ट जिलों की सीमा पर स्थित 'नोंगशुम' में जलाऊ लकड़ी इकट्ठा कर रहे तीन निर्दोष लोगों की हत्या के बाद शुरू किया गया था।
सिनाई कैंप, कुकी नेशनल आर्मी (KNA) और कुकी लिबरेशन आर्मी (KLA) के लिए निर्धारित था — दोनों संगठन अगस्त 2008 में केंद्र सरकार के साथ हुए 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस' समझौते का हिस्सा हैं। इस कैंप में लगभग 150 सदस्यों के रहने की व्यवस्था थी।
अभियान में चौंकाने वाले खुलासे
सुरक्षा बलों के अभियान के दौरान कैंप में 17 ऐसे लोग पाए गए जो फ़र्जी पहचान का उपयोग कर खुद को एसओओ के पंजीकृत सदस्य बता रहे थे। इसके अतिरिक्त, 24 से अधिक हथियार, 38 मैगजीन, भारी मात्रा में गोला-बारूद, विस्फोटक, वायरलेस संचार उपकरण और अन्य युद्ध सामग्री भी बरामद की गई। यह बरामदगी इस बात की पुष्टि करती है कि एसओओ समझौते का खुलेआम उल्लंघन हो रहा था।
मुख्यमंत्री का संदेश और निरीक्षण
सिनाई कैंप पहुँचने पर मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने पूरे परिसर का निरीक्षण किया। CRPF और असम राइफल्स के अधिकारियों ने उन्हें अभियान की विस्तृत जानकारी और क्षेत्र की कानून-व्यवस्था की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने CRPF की कोबरा बटालियन के साहस की सराहना की और इस बात पर विशेष जोर दिया कि तलाशी अभियानों के दौरान आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से हिंसा का रास्ता छोड़ने, अवैध हथियार सुरक्षा बलों को सौंपने और शांति व सद्भाव बहाल करने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने नागरिक समाज संगठनों (CSO) और स्थानीय ग्रामीणों से भी सीधी बातचीत की।
इस दौरे में सरकारी प्रवक्ता एवं हेइरोक विधानसभा क्षेत्र के विधायक थोकचोम राधेश्याम सिंह, CRPF (मणिपुर और नागालैंड सेक्टर) के महानिरीक्षक होमकर अमोल विनुकंत, मणिपुर पुलिस के आईजी कामेई अंगम रोमनस, डीआईजी एन. हेरोजीत मीतेई, CRPF के डीआईजी राजेश कुमार, असम राइफल्स के कर्नल राधा कृष्णन, कांगपोकपी जिले के उपायुक्त तथा दोनों जिलों के पुलिस अधीक्षक भी उपस्थित थे।
एसओओ समझौते की व्यापक तस्वीर
गौरतलब है कि अगस्त 2008 से केंद्र सरकार के साथ 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस' समझौते के तहत कुल 23 भूमिगत संगठन दो समूहों में काम कर रहे हैं — यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (UPF) के तहत 8 संगठन और कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (KNO) के तहत 15 संगठन। सिनाई कैंप की घटना ने इस समझौते की निगरानी-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
आगे की राह
मुख्यमंत्री का यह दौरा मणिपुर में जारी जातीय संघर्ष के बीच एक संकेतात्मक कदम माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य लंबे समय से हिंसा और अस्थिरता से जूझ रहा है। अब सबकी नज़रें इस बात पर होंगी कि एसओओ समझौते की समीक्षा और अवैध हथियारों की बरामदगी के बाद राज्य सरकार आगे क्या ठोस कदम उठाती है।