मणिपुर CM खेमचंद का कांगपोकपी दौरा: 'हिंसा छोड़ें, युवाओं के लिए शांति बनाएं'
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने शुक्रवार, 4 सितंबर को कांगपोकपी जिले का दौरा कर समाज के सभी वर्गों से एकजुट होकर हिंसा त्यागने और आने वाली पीढ़ियों के लिए शांतिपूर्ण माहौल तैयार करने की अपील की। लेइमाखोंग के क्रिश्चियन सेंटर चर्च में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में उन्होंने मई 2023 से जारी जातीय संकट से प्रभावित मैतेई और कुकी दोनों समुदायों के विस्थापित लोगों से सीधी बातचीत की।
मुख्यमंत्री का संदेश: एकता और भरोसे की पुनर्स्थापना
मुख्यमंत्री सिंह ने जनसंवाद में कहा, 'आइए हम सब मिलकर हिंसा को छोड़ें और अपने युवाओं के लिए शांतिपूर्ण माहौल बनाने की दिशा में काम करें। हम सभी ईश्वर की देखरेख में हैं, इसलिए हमें मिल-जुलकर रहने की कोशिश करनी चाहिए और एक-दूसरे को परेशानी या दुख पहुंचाने से बचना चाहिए।' उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि संकट के कारण हज़ारों लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हुए और अभी तक वापस नहीं लौट पाए हैं।
उन्होंने कहा कि मई 2023 से अब तक जो कुछ भी हुआ है, उसे सभी समुदायों को भुलाकर आगे बढ़ना होगा और आपसी भरोसे की कमी को दूर करने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में जातीय हिंसा के कारण विस्थापित लोगों की संख्या हज़ारों में बनी हुई है और पुनर्वास की प्रक्रिया अभी भी अधूरी है।
पानी आपूर्ति परियोजना का निरीक्षण
मुख्यमंत्री ने एल. चम्फाई गांव का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने पेयजल आपूर्ति परियोजना का निरीक्षण किया। मई 2023 की जातीय हिंसा के दौरान क्षतिग्रस्त हुई यह मुख्य पाइपलाइन इंफाल के थांगमीबंद क्षेत्र में पीने का पानी पहुँचाती है।
पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (PHED) के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि मरम्मत का काम एक महीने के भीतर पूरा हो जाएगा, जिसके बाद ग्रामीणों को नियमित पेयजल आपूर्ति फिर से शुरू हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने तीन विधायकों — हाओखोलेट किपजेन, हेइखाम डिंगो सिंह और ख. जॉयकिशन सिंह — के साथ मिलकर काम को समय पर पूरा करने के लिए आवश्यक सहायता और सुरक्षा बल उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
स्वास्थ्य सुविधाओं के उन्नयन का आश्वासन
मुख्यमंत्री सिंह ने लेइमाखोंग में मौजूद प्राइमरी हेल्थ सेंटर को कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में अपग्रेड करने पर विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि अपग्रेडेशन की प्रक्रिया में समय लग सकता है, इसलिए इस बीच रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) से विशेषज्ञ और सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को लेइमाखोंग भेजने की व्यवस्था की जाएगी।
उन्होंने एल. चम्फाई गांव के चेयरमैन थांगखोमांग से अपील की कि वे PHED अधिकारियों को काम में पूरा सहयोग दें ताकि पेयजल आपूर्ति जल्द बहाल हो सके।
विधायकों की प्रतिक्रिया
स्थानीय विधायक हाओखोलेट किपजेन ने लेइमाखोंग को 'मिनी मणिपुर' बताया और उम्मीद जताई कि यह क्षेत्र जल्द ही संकट-पूर्व स्थिति में लौट आएगा। उन्होंने बताया कि लेइमाखोंग में मैतेई, कुकी, नागा, नेपाली और बिहारी — सभी समुदायों के लोग एक साथ रहते हैं।
विधायक हेइखाम डिंगो सिंह ने दूरियां पाटने की मुख्यमंत्री की पहल की सराहना करते हुए राज्य में शांति और विकास के लिए सामूहिक प्रयास की अपील की। गौरतलब है कि यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब मणिपुर में जातीय संकट को दो वर्ष से अधिक समय बीत चुका है और स्थायी शांति की दिशा में प्रयास अभी भी जारी हैं।
आगे की राह
मुख्यमंत्री के इस दौरे को राज्य सरकार की पुनर्निर्माण और विश्वास-बहाली की कोशिशों के रूप में देखा जा रहा है। पेयजल परियोजना की बहाली और स्वास्थ्य सुविधाओं के उन्नयन के वादे ज़मीनी स्तर पर कितने साकार होते हैं, यह आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगा।