9 अगस्त 2026
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मणिपुर की एकता के लिए मैतेई, नागा, कुकी सभी मिलकर काम करें: सीएम युमनाम खेमचंद सिंह

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मणिपुर की एकता के लिए मैतेई, नागा, कुकी सभी मिलकर काम करें: सीएम युमनाम खेमचंद सिंह

सारांश

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 'हर घर तिरंगा 2026' के मंच से मैतेई, नागा और कुकी समुदायों को एकजुट होने का संदेश दिया। बिष्णुपुर विस्फोट में दो बच्चों की मौत का हवाला देते हुए उन्होंने शांति-विरोधी तत्वों के प्रति आगाह किया और 'बड़े भाई' की भूमिका की बात कही।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 9 अगस्त 2026 को इंफाल में 'हर घर तिरंगा 2026' कार्यक्रम में मैतेई, नागा और कुकी समुदायों से एकजुट होने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि बहुमत वाले मैतेई समुदाय को 'बड़े भाई' की भूमिका निभाते हुए राज्य को एकजुट रखना चाहिए।
मणिपुर 1947-48 में अपने संविधान के तहत विधानसभा चुनाव कराने वाला दक्षिण-पूर्व एशिया का पहला राज्य था; पहले स्पीकर चुराचांदपुर के पाइते आदिवासी नेता थे।
बिष्णुपुर जिले के ट्रोंगलाओबी गाँव में इस साल हुए विस्फोट में दो बच्चों की मौत हुई; सीएम ने इसे शांति-विरोधी तत्वों की करतूत बताया।
कांगपोकपी और जिरीबाम जिलों के दौरे सफल रहे; पहाड़ी इलाकों में गर्मजोशी से स्वागत हुआ।
BJP राज्यसभा सदस्य शारदा देवी और अजीत गोपाचाडे ने सरकार के शांति प्रयासों का समर्थन किया।

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 9 अगस्त 2026 को इंफाल में 'हर घर तिरंगा 2026' अभियान के दौरान राज्य के सभी समुदायों से एकजुट होकर मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मैतेई, नागा और कुकी — किसी भी समुदाय को केवल अपने हितों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सभी को मिलकर राज्य के व्यापक हित को प्राथमिकता देनी होगी।

मुख्यमंत्री का एकता संदेश

मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने कहा कि मैतेई लोगों को सिर्फ मैतेई हितों के बारे में, नागाओं को सिर्फ नागा हितों के बारे में और कुकी लोगों को सिर्फ कुकी हितों के बारे में नहीं सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि बहुमत में रहने वाले मैतेई समुदाय को 'बड़े भाई' की भूमिका निभानी चाहिए और राज्य को एकजुट रखने की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब मणिपुर में जातीय तनाव की पृष्ठभूमि में अंतर-समुदाय संवाद की माँग लगातार बढ़ रही है।

मणिपुर का ऐतिहासिक संदर्भ

मुख्यमंत्री ने मणिपुर की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए बताया कि यह राज्य दक्षिण-पूर्व एशिया का पहला राज्य था जिसने 1947-48 में अपने संविधान के तहत विधानसभा चुनाव कराए थे। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि उस विधानसभा के पहले अध्यक्ष चुराचांदपुर जिले के पाइते आदिवासी नेता थे — वही जिला जो आज कुकी आदिवासियों का गढ़ माना जाता है। गौरतलब है कि यह ऐतिहासिक तथ्य विभिन्न समुदायों की साझी विरासत को रेखांकित करता है।

जिला दौरों से मिले संकेत

खेमचंद सिंह ने बताया कि उन्होंने शनिवार को कांगपोकपी जिले का दौरा किया, जहाँ पहाड़ी इलाकों के लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वहाँ किसी का भी हाईवे जाम करने का इरादा नहीं दिखा। इसी तरह जिरीबाम जिले का दौरा भी सफल रहा, जहाँ अलग-अलग समुदाय शांति के लिए एक मंच पर आए।

विस्फोट की घटना और शांति-विरोधी तत्व

मुख्यमंत्री ने इस साल की शुरुआत में बिष्णुपुर जिले के ट्रोंगलाओबी गाँव में हुए विस्फोट का जिक्र किया, जिसमें दो मासूम बच्चों की मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएँ यह साबित करती हैं कि कुछ तत्व मणिपुर में शांति की वापसी नहीं चाहते और समुदायों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया

कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मणिपुर सेंट्रल ऑब्जर्वर और राज्यसभा सदस्य अजीत गोपाचाडे ने कहा कि मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में राज्य शांति और विकास की ओर आगे बढ़ रहा है। राज्य भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य शारदा देवी ने कहा कि राज्य सरकार शांति लाने की पूरी कोशिश कर रही है और मुख्यमंत्री लगातार पहाड़ी जिलों का दौरा कर रहे हैं। उन्होंने विपक्षी आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि BJP राज्य को शांति और समृद्धि के रास्ते पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने अंत में नागरिकों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' और 'विकसित मणिपुर' के विजन को साकार करने के लिए एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उसी संरचनात्मक असमानता को रेखांकित करता है जो मणिपुर के जातीय संघर्ष की जड़ में रही है — बहुमत समुदाय से संरक्षण की अपेक्षा, अधिकारों की बराबरी की गारंटी नहीं। कांगपोकपी और जिरीबाम दौरों की सकारात्मक रिपोर्टिंग के बावजूद, बिष्णुपुर विस्फोट जैसी घटनाएँ बताती हैं कि ज़मीनी स्थिति अभी भी नाज़ुक है। 'हर घर तिरंगा' जैसे प्रतीकात्मक आयोजन एकता का संदेश देते हैं, पर असली परीक्षा यह है कि पहाड़ी और घाटी जिलों के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संसाधन वितरण की खाई कब और कैसे पाटी जाएगी।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर के सीएम युमनाम खेमचंद सिंह ने 9 अगस्त को क्या कहा?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इंफाल में 'हर घर तिरंगा 2026' कार्यक्रम में मैतेई, नागा और कुकी समुदायों से एकजुट होकर मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय को केवल अपने हितों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
मणिपुर में 'बड़े भाई' की भूमिका से सीएम का क्या आशय था?
सीएम खेमचंद सिंह ने कहा कि राज्य में बहुमत में रहने वाले मैतेई समुदाय को 'बड़े भाई' की तरह व्यवहार करना चाहिए और राज्य को एकजुट रखने की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। यह बयान अंतर-समुदाय सौहार्द की अपेक्षा के संदर्भ में दिया गया।
बिष्णुपुर जिले के ट्रोंगलाओबी विस्फोट में क्या हुआ था?
इस साल की शुरुआत में बिष्णुपुर जिले के ट्रोंगलाओबी गाँव में एक विस्फोट हुआ था जिसमें दो मासूम बच्चों की मौत हो गई थी। मुख्यमंत्री ने इस घटना का हवाला देते हुए कहा कि कुछ तत्व मणिपुर में शांति नहीं चाहते।
मणिपुर का 1947-48 का ऐतिहासिक महत्व क्या है जो सीएम ने बताया?
मुख्यमंत्री ने बताया कि मणिपुर दक्षिण-पूर्व एशिया का पहला राज्य था जिसने 1947-48 में अपने संविधान के तहत विधानसभा चुनाव कराए थे। उस विधानसभा के पहले अध्यक्ष चुराचांदपुर जिले के पाइते आदिवासी नेता थे, जो आज कुकी आदिवासियों का गढ़ है।
मणिपुर में शांति बहाली के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह लगातार पहाड़ी जिलों का दौरा कर रहे हैं — कांगपोकपी और जिरीबाम में उनके दौरे सफल रहे। BJP राज्यसभा सदस्य शारदा देवी ने कहा कि राज्य सरकार हालात जल्द सामान्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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