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वॉकी-टॉकी भ्रामक विज्ञापन: सीसीपीए ने होगर टेक्नोलॉजीज पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया

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वॉकी-टॉकी भ्रामक विज्ञापन: सीसीपीए ने होगर टेक्नोलॉजीज पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया

सारांश

सीसीपीए की वॉकी-टॉकी अभियान में एक और बड़ी कार्रवाई — होगर टेक्नोलॉजीज पर ₹1 लाख का जुर्माना। फ्रीक्वेंसी और लाइसेंस जानकारी छुपाना भ्रामक विज्ञापन माना गया। 12 कंपनियों पर अब तक ₹58 लाख का जुर्माना, अमेज़न-फ्लिपकार्ट ने अदालत में चुनौती दी।

मुख्य बातें

सीसीपीए ने होगर टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशन एलएलपी पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया — वॉकी-टॉकी विज्ञापनों में फ्रीक्वेंसी और लाइसेंस जानकारी न देने पर।
आदेश सीसीपीए की मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता में पारित किया गया।
जांच में विभिन्न ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर 16,970 से अधिक गैर-अनुपालक वॉकी-टॉकी लिस्टिंग पाई गई थीं।
प्राधिकरण अब तक 12 कंपनियों के खिलाफ अंतिम आदेश जारी कर कुल ₹58 लाख का जुर्माना लगा चुका है।
अमेज़न , फ्लिपकार्ट और मेटा प्लेटफॉर्म्स ने सीसीपीए के कुछ आदेशों को न्यायिक मंचों पर चुनौती दी है।
सीसीपीए ने स्पष्ट किया — वेबसाइट पर ऑनलाइन खरीदारी सुविधा न होने पर भी प्रचार दावे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अंतर्गत आते हैं।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने होगर टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशन एलएलपी पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है। कंपनी पर आरोप है कि उसने अपनी वेबसाइट पर वॉकी-टॉकी उपकरणों की लिस्टिंग और विज्ञापन में ऑपरेटिंग फ्रीक्वेंसी तथा अनिवार्य लाइसेंस संबंधी जानकारी को स्पष्ट रूप से नहीं दर्शाया। 25 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह आदेश सीसीपीए की मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता में पारित किया गया।

मुख्य घटनाक्रम

सीसीपीए ने होगर टेक्नोलॉजीज की वेबसाइट पर प्रदर्शित विभिन्न मॉडल के वॉकी-टॉकी उपकरणों की जांच की। प्राधिकरण ने पाया कि उत्पाद लिस्टिंग में ऑपरेटिंग फ्रीक्वेंसी, लागू लाइसेंस शर्तों और नियामकीय मंजूरियों का उल्लेख स्पष्ट रूप से नहीं था। इससे उपभोक्ताओं में यह भ्रांति उत्पन्न हो सकती थी कि बिना किसी नियामकीय अनुमति के भी इन उपकरणों का कानूनी उपयोग संभव है।

नियमों के अनुसार, 446.0 से 446.2 मेगाहर्ट्ज की निर्धारित फ्रीक्वेंसी रेंज में काम करने वाले पर्सनल मोबाइल रेडियो उपकरणों को निश्चित शर्तों के अधीन लाइसेंस से छूट प्राप्त है। किंतु इस छूट वाली रेंज से बाहर संचालित होने वाले वायरलेस रेडियो फ्रीक्वेंसी उपकरणों पर सभी संबंधित नियामकीय आवश्यकताएं पूरी तरह लागू होती हैं।

कंपनी की दलीलें और सीसीपीए का रुख

कार्यवाही के दौरान होगर टेक्नोलॉजीज ने तर्क दिया कि उसके पास वैध डीलर पजेशन लाइसेंस (डीपीएल) है और संबंधित उपकरणों के लिए आवश्यक इक्विपमेंट टाइप अप्रूवल (ईटीए) प्रमाणपत्र भी उपलब्ध हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि उसकी वेबसाइट मुख्यतः जानकारी देने और संभावित ग्राहकों से संपर्क के उद्देश्य से बनाई गई है तथा इस पर प्रत्यक्ष ऑनलाइन खरीदारी की सुविधा नहीं दी जाती।

सीसीपीए ने इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि नियामकीय मंजूरी प्राप्त होने मात्र से कोई विज्ञापनदाता उपभोक्ताओं को खरीदारी पूर्व सटीक, संपूर्ण और महत्वपूर्ण जानकारी देने की ज़िम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाता। प्राधिकरण ने यह भी रेखांकित किया कि किसी वेबसाइट पर ऑनलाइन भुगतान या शॉपिंग कार्ट की अनुपस्थिति का अर्थ यह नहीं कि वहां किए गए प्रचार-संबंधी दावे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापन के दायरे से बाहर हों।

व्यापक अभियान और अब तक की कार्रवाई

गौरतलब है कि यह कार्रवाई एक अलग-थलग घटना नहीं है। सीसीपीए ने इससे पहले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिना अनिवार्य नियामकीय जानकारी के वॉकी-टॉकी की बड़े पैमाने पर लिस्टिंग और बिक्री का स्वतः संज्ञान लिया था। जांच के दौरान विभिन्न प्लेटफॉर्म पर नियमों का पालन न करने वाली 16,970 से अधिक लिस्टिंग की पहचान की गई थी।

इसके बाद अमेज़न, फ्लिपकार्ट, मीशो, मेटा (फेसबुक मार्केटप्लेस), जियोमार्ट, इंडिया मार्ट और ट्रेडइंडिया सहित 13 ई-कॉमर्स कंपनियों को नोटिस जारी किए गए थे। प्राधिकरण अब तक 12 कंपनियों के विरुद्ध अंतिम आदेश पारित कर चुका है और इस अभियान के तहत कुल ₹58 लाख का जुर्माना लगाया जा चुका है।

न्यायिक चुनौतियाँ

सीसीपीए के कुछ आदेशों और शुरू की गई कार्यवाहियों को अमेज़न सेलर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, फ्लिपकार्ट इंटरनेट और मेटा प्लेटफॉर्म्स जैसी कंपनियों ने न्यायिक मंचों पर चुनौती दी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि नियामक और बड़े डिजिटल व्यापारिक प्लेटफॉर्म के बीच विज्ञापन मानकों को लेकर कानूनी संघर्ष अभी जारी है।

आम जनता और उपभोक्ताओं पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब ऑनलाइन बाज़ारों में वायरलेस उपकरणों की बिक्री तेज़ी से बढ़ रही है और आम उपभोक्ता प्रायः लाइसेंस संबंधी जटिल नियमों से अनजान रहते हैं। सीसीपीए की इस कार्रवाई से उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि ऑनलाइन उत्पाद लिस्टिंग में नियामकीय जानकारी अनिवार्य रूप से दर्ज होगी, जिससे अनजाने में कानूनी उल्लंघन से बचा जा सकेगा। प्राधिकरण का यह अभियान आगे भी जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिनका वार्षिक राजस्व अरबों में है। अमेज़न, फ्लिपकार्ट और मेटा का न्यायालय जाना यह दर्शाता है कि ये कंपनियाँ 'मध्यस्थ' और 'विज्ञापनदाता' की परिभाषाओं को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। जब तक यह कानूनी अनिश्चितता बनी रहेगी, उपभोक्ता हितों की वास्तविक सुरक्षा अधूरी रहेगी।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीसीपीए ने होगर टेक्नोलॉजीज पर जुर्माना क्यों लगाया?
सीसीपीए ने होगर टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशन एलएलपी पर ₹1 लाख का जुर्माना इसलिए लगाया क्योंकि कंपनी की वेबसाइट पर वॉकी-टॉकी उपकरणों की लिस्टिंग में ऑपरेटिंग फ्रीक्वेंसी और अनिवार्य लाइसेंस संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं दी गई थी। इससे उपभोक्ताओं में यह भ्रम हो सकता था कि इन उपकरणों को बिना किसी नियामकीय अनुमति के कानूनी रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है।
वॉकी-टॉकी के लिए भारत में लाइसेंस नियम क्या हैं?
भारत में 446.0 से 446.2 मेगाहर्ट्ज की फ्रीक्वेंसी रेंज में संचालित पर्सनल मोबाइल रेडियो उपकरणों को निश्चित शर्तों के अधीन लाइसेंस से छूट प्राप्त है। इस रेंज से बाहर काम करने वाले वायरलेस रेडियो फ्रीक्वेंसी उपकरणों पर सभी संबंधित नियामकीय आवश्यकताएं लागू होती हैं और उनके लिए उचित लाइसेंस आवश्यक है।
सीसीपीए के वॉकी-टॉकी अभियान में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
सीसीपीए ने अपने इस अभियान में विभिन्न ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर 16,970 से अधिक गैर-अनुपालक लिस्टिंग चिह्नित की हैं और 13 कंपनियों को नोटिस जारी किए हैं। अब तक 12 कंपनियों के खिलाफ अंतिम आदेश पारित किए जा चुके हैं और कुल ₹58 लाख का जुर्माना लगाया गया है।
क्या ई-कॉमर्स कंपनियों ने सीसीपीए के आदेशों को चुनौती दी है?
हां, अमेज़न सेलर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, फ्लिपकार्ट इंटरनेट और मेटा प्लेटफॉर्म्स ने सीसीपीए के कुछ आदेशों और कार्यवाहियों को न्यायिक मंचों पर चुनौती दी है। इससे विज्ञापन मानकों और उपभोक्ता संरक्षण को लेकर नियामक और बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच कानूनी विवाद जारी है।
क्या केवल ऑनलाइन बिक्री न करने वाली वेबसाइट भी भ्रामक विज्ञापन के दायरे में आती है?
सीसीपीए ने स्पष्ट किया है कि किसी वेबसाइट पर ऑनलाइन भुगतान या शॉपिंग कार्ट की सुविधा न होने पर भी वहां किए गए प्रचार दावे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापन की श्रेणी में आ सकते हैं। उत्पाद की बिक्री किसी भी माध्यम से हो, विज्ञापनों और लिस्टिंग में नियामकीय जानकारी देना अनिवार्य है।
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