6 अगस्त 2026
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सीसीपीए ने 9 डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डार्क पैटर्न के लिए ₹20 लाख जुर्माना लगाया; इंडिगो, जेप्टो, फिजिक्स वाला शामिल

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सीसीपीए ने 9 डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डार्क पैटर्न के लिए ₹20 लाख जुर्माना लगाया; इंडिगो, जेप्टो, फिजिक्स वाला शामिल

सारांश

सीसीपीए ने इंडिगो, जेप्टो और फिजिक्स वाला समेत 9 डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ₹20 लाख का जुर्माना ठोका — ड्रिप प्राइसिंग से लेकर कन्फर्म शेमिंग तक, भ्रामक ऑनलाइन तरीकों पर भारत की सबसे बड़ी नियामकीय कार्रवाइयों में से एक।

मुख्य बातें

सीसीपीए ने 9 डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 'डार्क पैटर्न' के लिए कुल ₹20 लाख से अधिक जुर्माना लगाया।
जेप्टो पर सर्वाधिक ₹7 लाख , फिजिक्स वाला पर ₹5 लाख , अनुज जिंदल पर ₹3 लाख और फर्स्टक्राई पर ₹2 लाख का जुर्माना।
फार्मइजी , मैकफी और स्पाइसजेट पर प्रत्येक ₹1 लाख जुर्माना।
आरोपित तरीकों में ड्रिप प्राइसिंग , बास्केट स्नीकिंग , कन्फर्म शेमिंग और सब्सक्रिप्शन ट्रैप शामिल।
जून 2025 में सीसीपीए ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को सेल्फ-ऑडिट का निर्देश दिया था; यह जुर्माना उसी की अगली कड़ी है।
जुर्माना भरने के बाद अधिकांश कंपनियों ने संबंधित भ्रामक तरीके हटा दिए।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने 9 प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 'डार्क पैटर्न' अपनाने के आरोप में कुल ₹20 लाख से अधिक का जुर्माना लगाया है। इन प्लेटफॉर्म में इंडिगो, जेप्टो, फिजिक्स वाला, बुकमायशो, फर्स्टक्राई और स्पाइसजेट जैसे बड़े नाम शामिल हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने 6 अगस्त 2026 को राज्यसभा में एक लिखित जवाब के ज़रिए इस कार्रवाई का खुलासा किया।

डार्क पैटर्न क्या हैं और क्या आरोप लगे

सीसीपीए के अनुसार, इन कंपनियों ने अपने डिजिटल इंटरफेस में ऐसे तरीके अपनाए जो उपभोक्ताओं को उनकी इच्छा के विरुद्ध निर्णय लेने के लिए प्रेरित करते हैं। जाँच में पाए गए प्रमुख तरीकों में ड्रिप प्राइसिंग (चेकआउट पर छिपे शुल्क जोड़ना), बास्केट स्नीकिंग (बिना सहमति के कार्ट में अतिरिक्त उत्पाद डालना), कन्फर्म शेमिंग (ऑप्ट-आउट के लिए अपमानजनक भाषा), सब्सक्रिप्शन ट्रैप और भ्रामक प्रॉम्प्ट शामिल हैं। ये सभी उपभोक्ताओं की खरीदारी के फैसलों को प्रभावित करने के लिए जानबूझकर डिज़ाइन किए गए थे।

किस कंपनी पर कितना जुर्माना

जेप्टो मार्केटप्लेस पर सबसे अधिक ₹7 लाख का जुर्माना लगाया गया। सीसीपीए ने पाया कि इस क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर शुरुआती कीमत दिखाने के बाद चेकआउट के दौरान हैंडलिंग चार्ज और मेंबरशिप फीस जोड़ी जाती थी — जिसे रेगुलेटर ने 'ड्रिप प्राइसिंग' और 'बास्केट स्नीकिंग' करार दिया। रेगुलेटर के दखल के बाद जेप्टो ने ये तरीके बंद कर दिए।

एडटेक प्लेटफॉर्म फिजिक्स वाला पर ₹5 लाख का जुर्माना लगा। सीसीपीए ने पाया कि कंपनी यूजर्स को भावनात्मक रूप से प्रभावित करने वाले संदेशों के ज़रिए डोनेशन विकल्प बनाए रखने के लिए बाध्य कर रही थी, और मुफ्त कोर्स के एक्सेस के लिए निजी जानकारी माँगी जा रही थी। जुर्माना भरने के बाद कंपनी ने संबंधित तरीके हटा दिए।

एयरलाइन इंडिगो के मोबाइल ऐप पर 'कन्फर्म शेमिंग' पकड़ी गई — ऑप्ट-आउट बटन पर लिखा था 'नहीं, मैं रिस्क लूंगा'। सीसीपीए की आपत्ति के बाद इसे बदलकर अधिक तटस्थ भाषा 'नहीं, मैं ट्रिप में कुछ नहीं जोड़ूंगा' कर दी गई। बुकमायशो को अपने बुकएस्माइल इनिशिएटिव के तहत पहले से चुने हुए ₹1 के डोनेशन को हटाने का निर्देश दिया गया, जिसे रेगुलेटर ने 'बास्केट स्नीकिंग' माना।

अन्य जुर्माने इस प्रकार रहे: फर्स्टक्राई पर ₹2 लाख, कोचिंग प्लेटफॉर्म अनुज जिंदल पर ₹3 लाख, तथा फार्मइजी, मैकफी और स्पाइसजेट पर प्रत्येक ₹1 लाख

सरकार की रणनीति और पृष्ठभूमि

यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब डिजिटल उपभोक्ता संरक्षण को लेकर वैश्विक स्तर पर नियामकीय दबाव बढ़ रहा है। गौरतलब है कि जून 2025 में सीसीपीए ने सभी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया था कि वे अपनी डिजिटल सेवाओं का सेल्फ-ऑडिट करें और डार्क पैटर्न की पहचान कर उन्हें हटाएं। यह जुर्माना उसी निर्देश का अनुपालन न करने वाली कंपनियों के विरुद्ध अगला कदम है।

आलोचकों का कहना है कि ₹20 लाख की कुल राशि बड़े प्लेटफॉर्म के लिए बेहद मामूली है और यह वास्तविक निवारक के रूप में काम नहीं कर सकती। उनके अनुसार, जब तक जुर्माने की राशि कंपनियों के राजस्व के अनुपात में नहीं होगी, डार्क पैटर्न का चलन बना रहेगा।

आम उपभोक्ता पर असर

डार्क पैटर्न मुख्य रूप से उन उपभोक्ताओं को नुकसान पहुँचाते हैं जो ऑनलाइन शॉपिंग, टिकट बुकिंग या एडटेक सेवाओं का उपयोग करते हैं। छिपे हुए शुल्क, अनचाहे सब्सक्रिप्शन और भावनात्मक दबाव की तकनीकें विशेष रूप से कम डिजिटल साक्षर उपभोक्ताओं को अधिक प्रभावित करती हैं। सीसीपीए की इस कार्रवाई से करोड़ों भारतीय ऑनलाइन उपभोक्ताओं को अधिक पारदर्शी डिजिटल अनुभव मिलने की उम्मीद है।

आगे क्या होगा

सीसीपीए ने संकेत दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की निगरानी जारी रहेगी और भविष्य में और कड़े दिशानिर्देश लाए जा सकते हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की यह पहल भारत में डिजिटल उपभोक्ता अधिकारों को मज़बूत करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ये कार्रवाइयाँ व्यवहार बदलने की बजाय सुर्खियाँ बटोरने तक सीमित रह सकती हैं। सेल्फ-ऑडिट मॉडल की सीमाएँ भी स्पष्ट हैं — जब तक तीसरे पक्ष की स्वतंत्र जाँच अनिवार्य नहीं होगी, डार्क पैटर्न केवल रूप बदलकर जारी रहेंगे।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीसीपीए ने किन 9 प्लेटफॉर्म पर जुर्माना लगाया है?
सीसीपीए ने इंडिगो, जेप्टो, फिजिक्स वाला, बुकमायशो, फर्स्टक्राई, स्पाइसजेट, फार्मइजी, मैकफी और कोचिंग प्लेटफॉर्म अनुज जिंदल पर जुर्माना लगाया है। सभी पर 'डार्क पैटर्न' अपनाकर उपभोक्ताओं को गुमराह करने का आरोप है।
डार्क पैटर्न क्या होते हैं?
डार्क पैटर्न वे भ्रामक डिजिटल डिज़ाइन तकनीकें हैं जो उपभोक्ताओं को उनकी इच्छा के विरुद्ध निर्णय लेने के लिए प्रेरित करती हैं। इनमें ड्रिप प्राइसिंग (छिपे शुल्क), बास्केट स्नीकिंग (बिना सहमति कार्ट में जोड़ना), कन्फर्म शेमिंग (अपमानजनक ऑप्ट-आउट भाषा) और सब्सक्रिप्शन ट्रैप प्रमुख हैं।
जेप्टो पर सबसे ज़्यादा जुर्माना क्यों लगा?
जेप्टो पर ₹7 लाख का सर्वाधिक जुर्माना इसलिए लगा क्योंकि प्लेटफॉर्म पर शुरुआती कीमत दिखाने के बाद चेकआउट के दौरान हैंडलिंग चार्ज और मेंबरशिप फीस छिपाकर जोड़ी जाती थी। सीसीपीए ने इसे 'ड्रिप प्राइसिंग' और 'बास्केट स्नीकिंग' माना।
फिजिक्स वाला पर क्या आरोप था?
फिजिक्स वाला पर ₹5 लाख का जुर्माना लगा। सीसीपीए ने पाया कि यह एडटेक प्लेटफॉर्म यूजर्स को भावनात्मक संदेशों से डोनेशन देने के लिए बाध्य कर रहा था और मुफ्त कोर्स एक्सेस के लिए निजी जानकारी माँग रहा था।
क्या इन कंपनियों ने जुर्माना भरने के बाद बदलाव किए?
हाँ, अधिकांश कंपनियों ने जुर्माना भरने के बाद संबंधित भ्रामक तरीके हटा दिए। जेप्टो ने छिपे शुल्क बंद किए, फिजिक्स वाला ने आपत्तिजनक डोनेशन तरीका हटाया और इंडिगो ने अपना ऑप्ट-आउट संदेश अधिक तटस्थ भाषा में बदला।
राष्ट्र प्रेस
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