सीसीपीए ने स्पाइसजेट पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया, बुकिंग प्लेटफॉर्म पर डार्क पैटर्न का मामला
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने 18 जुलाई 2025 को स्पाइसजेट लिमिटेड पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है। एयरलाइन पर आरोप है कि उसने अपने ऑनलाइन फ्लाइट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर 'डार्क पैटर्न' यानी भ्रामक डिज़ाइन तकनीकों का इस्तेमाल किया, जिससे उपभोक्ताओं की स्वतंत्र निर्णय क्षमता प्रभावित हुई। यह कार्रवाई कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के प्रावधानों के उल्लंघन के आधार पर की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
यह आदेश सीसीपीए की चीफ कमिश्नर निधि खरे और कमिश्नर अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने जारी किया। जाँच में पाया गया कि स्पाइसजेट के बुकिंग इंटरफेस पर पहले से टिक किए गए चेकबॉक्स के माध्यम से ग्राहकों को उनकी जानकारी या स्पष्ट सहमति के बिना स्पाइसक्लब लॉयल्टी प्रोग्राम में स्वतः सदस्य बना दिया जाता था।
इसके अतिरिक्त, SMS, व्हाट्सऐप और ईमेल के ज़रिए प्रमोशनल संदेश भेजने की सहमति भी पहले से चयनित (प्री-सेलेक्टेड) विकल्पों के माध्यम से ली जा रही थी। उपभोक्ता की ओर से कोई अलग कार्रवाई किए बिना ही यह मान लिया जाता था कि उसने विज्ञापन संदेश प्राप्त करने की सहमति दे दी है।
नोटिस के बाद भी जारी रही गड़बड़ी
सीसीपीए के अनुसार, नोटिस जारी किए जाने के बाद भी स्पाइसजेट ने पुरानी व्यवस्था हटाकर एक नया प्री-टिक्ड चेकबॉक्स जोड़ दिया, जिसके ज़रिए भविष्य में संदेश भेजने की सहमति पहले से ही दर्ज रहती थी। प्राधिकरण ने इसे उसी भ्रामक प्रक्रिया को दूसरे तरीके से जारी रखने की कोशिश माना।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी एयरलाइन या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को डार्क पैटर्न के लिए नियामकीय कार्रवाई का सामना करना पड़ा हो। सीसीपीए ने हाल के वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ अपनी सक्रियता बढ़ाई है।
स्पाइसजेट का पक्ष
सुनवाई के दौरान स्पाइसजेट ने इस मामले को तकनीकी त्रुटि बताया। प्राधिकरण ने कंपनी को यह लिखित आश्वासन देने का निर्देश दिया कि आवश्यक सुधारात्मक कदम लागू कर दिए गए हैं और उन्हें भविष्य में स्थायी रूप से बनाए रखा जाएगा।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने इस आदेश की पुष्टि करते हुए कहा कि 'डार्क पैटर्न' जैसी भ्रामक डिज़ाइन तकनीकें उपभोक्ताओं के हितों के विरुद्ध हैं।
कानूनी आधार और उपभोक्ता अधिकार
सीसीपीए ने स्पष्ट किया कि स्पाइसजेट का यह आचरण कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के तहत तीन श्रेणियों — अनुचित व्यापारिक प्रथा (अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस), अनुचित अनुबंध (अनफेयर कॉन्ट्रैक्ट) और भ्रामक प्रस्तुतीकरण (मिसलीडिंग रिप्रेजेंटेशन) — में आता है। प्राधिकरण के अनुसार, ऐसी प्रथाएँ उपभोक्ताओं को पूरी जानकारी के आधार पर स्वतंत्र निर्णय लेने से रोकती हैं और निष्पक्ष व पारदर्शी उपभोक्ता व्यवहार के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।
आगे क्या
स्पाइसजेट को लिखित आश्वासन देने के बाद अपने बुकिंग प्लेटफॉर्म में स्थायी बदलाव करने होंगे। यह मामला डिजिटल उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नज़ीर बन सकता है, खासकर तब जब सीसीपीए अन्य ई-कॉमर्स और यात्रा प्लेटफॉर्म पर भी इसी तरह की जाँच तेज़ कर रही है।