सीसीपीए ने 31 कोचिंग संस्थानों पर ₹1.39 करोड़ का जुर्माना लगाया, भ्रामक विज्ञापनों पर 60+ नोटिस

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सीसीपीए ने 31 कोचिंग संस्थानों पर ₹1.39 करोड़ का जुर्माना लगाया, भ्रामक विज्ञापनों पर 60+ नोटिस

सारांश

सीसीपीए ने कोचिंग क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 31 संस्थानों पर ₹1.39 करोड़ से अधिक का जुर्माना ठोका है। टॉपर्स की छवि के दुरुपयोग और अधूरी जानकारी छिपाने पर यह शिकंजा उन लाखों छात्रों के लिए राहत है जो भ्रामक दावों के आधार पर भारी फीस चुकाते हैं।

मुख्य बातें

सीसीपीए ने 31 कोचिंग संस्थानों पर ₹1.39 करोड़ से अधिक का जुर्माना लगाया; 60 से अधिक नोटिस जारी किए गए।
मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड पर ₹10 लाख और करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी), सीकर पर ₹5 लाख का अंतिम आदेश पारित।
संस्थानों ने आईआईटी-जेईई और नीट टॉपर्स के नाम व फोटो का उपयोग करते हुए पाठ्यक्रम की महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई।
दोनों संस्थानों ने एनसीडीआरसी में अपील दायर कर सीसीपीए के आदेशों को चुनौती दी है।
कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत की गई; मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्र की अध्यक्षता में आदेश पारित।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने कोचिंग क्षेत्र में फैले भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं पर शिकंजा कसते हुए 31 कोचिंग संस्थानों पर ₹1.39 करोड़ से अधिक का जुर्माना लगाया है। उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने शुक्रवार, 15 मई को यह जानकारी देते हुए बताया कि इस कार्रवाई के तहत अब तक 60 से अधिक नोटिस जारी किए जा चुके हैं। यह कदम उन लाखों छात्रों के हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अपना समय, श्रम और धन लगाते हैं।

किन संस्थानों पर हुई कार्रवाई

सीसीपीए ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई), आईआईटी-जेईई, नीट, आरबीआई और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों के खिलाफ विस्तृत जाँच के बाद यह आदेश पारित किए। विशेष रूप से, मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड पर ₹10 लाख और सीकर स्थित करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी) पर ₹5 लाख का अंतिम जुर्माना लगाया गया है।

प्राधिकरण के मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्र की अध्यक्षता में यह आदेश पारित किए गए। जाँच में पाया गया कि इन संस्थानों ने आईआईटी-जेईई और नीट परीक्षाओं में सफल उम्मीदवारों के नाम, फोटो और उपलब्धियों का प्रमुखता से उपयोग करते हुए बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन इन उम्मीदवारों द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रमों की महत्वपूर्ण जानकारी जानबूझकर छिपाई।

सीसीपीए के निर्देश और संस्थानों की प्रतिक्रिया

सीसीपीए ने दोनों संस्थानों को तत्काल प्रभाव से भ्रामक विज्ञापन बंद करने, भविष्य में ऐसे विज्ञापन प्रकाशित न करने और आगामी सभी विज्ञापनों में सत्य एवं पूर्ण जानकारी देने का निर्देश दिया। हालाँकि, दोनों संस्थानों ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के समक्ष अपील दायर करके इन आदेशों को चुनौती दी है।

उपभोक्ता अधिकार और कानूनी ढाँचा

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत प्रत्येक उपभोक्ता को सूचित होने का अधिकार है — अर्थात सत्य और सटीक जानकारी के आधार पर निर्णय लेने का अधिकार। मंत्रालय के अनुसार, भ्रामक विज्ञापन इस मौलिक अधिकार को कमज़ोर करते हैं। शिक्षा क्षेत्र में यह समस्या विशेष रूप से गंभीर है, क्योंकि यहाँ छात्र अपनी बहुमूल्य ऊर्जा, वर्षों का समय और परिवार की कठिन कमाई दाँव पर लगाते हैं।

गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब कोचिंग उद्योग पर सफलता दर के झूठे दावों और टॉपर्स की छवि के दुरुपयोग को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। यह पहली बार नहीं है कि नियामक निकायों ने इस क्षेत्र में हस्तक्षेप किया हो, लेकिन इस बार की कार्रवाई का दायरा — 31 संस्थान, 60+ नोटिस — पहले से कहीं व्यापक है।

आम जनता और छात्रों पर असर

लाखों परिवार हर साल कोचिंग संस्थानों के विज्ञापनों में दिखाए गए 'सफलता के आँकड़ों' के आधार पर भारी फीस चुकाते हैं। सीसीपीए की यह कार्रवाई संस्थानों को अब टॉपर्स की उपलब्धियों का श्रेय लेने से पहले पाठ्यक्रम-संबंधी पूरी जानकारी सार्वजनिक करने के लिए बाध्य करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एनसीडीआरसी में अपीलें खारिज होती हैं, तो यह पूरे उद्योग के लिए एक मिसाल बनेगी।

आगे क्या होगा

दोनों संस्थानों की अपीलें अब एनसीडीआरसी के विचाराधीन हैं। सीसीपीए की शेष जाँच प्रक्रियाएँ जारी हैं और संभावना है कि आने वाले महीनों में और संस्थानों पर भी अंतिम आदेश पारित किए जाएँ। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता हितों की रक्षा के प्रति यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ₹1.39 करोड़ का जुर्माना उस उद्योग को कितना रोकेगा जो सालाना हज़ारों करोड़ रुपये कमाता है। जुर्माने की राशि और उद्योग के मुनाफे के बीच का अनुपात इतना असंतुलित है कि यह दंड प्रतिरोधक कम, प्रतीकात्मक अधिक लगता है। दोनों संस्थानों का एनसीडीआरसी में अपील करना यह भी दर्शाता है कि कानूनी लड़ाई लंबी खिंच सकती है, जिस दौरान भ्रामक प्रथाएँ जारी रह सकती हैं। जब तक जुर्माने की राशि को उद्योग के राजस्व के अनुपात में नहीं बढ़ाया जाता और त्वरित प्रवर्तन तंत्र नहीं बनाया जाता, तब तक यह अभियान संरचनात्मक बदलाव लाने में सीमित रहेगा।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीसीपीए ने कोचिंग संस्थानों पर क्या कार्रवाई की है?
सीसीपीए ने भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए 31 कोचिंग संस्थानों पर ₹1.39 करोड़ से अधिक का जुर्माना लगाया है और 60 से अधिक नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई यूपीएससी, आईआईटी-जेईई, नीट और आरबीआई परीक्षाओं की कोचिंग देने वाले संस्थानों के खिलाफ की गई है।
मोशन एजुकेशन और करियर लाइन कोचिंग पर क्या आरोप हैं?
इन संस्थानों ने आईआईटी-जेईई और नीट में सफल उम्मीदवारों के नाम, फोटो और उपलब्धियों का विज्ञापनों में प्रमुखता से उपयोग किया, लेकिन उन उम्मीदवारों द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रमों की जानकारी जानबूझकर छिपाई। इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 का उल्लंघन माना गया।
क्या इन कोचिंग संस्थानों ने जुर्माने को स्वीकार किया है?
नहीं। मोशन एजुकेशन और करियर लाइन कोचिंग दोनों ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के समक्ष अपील दायर करके सीसीपीए के आदेशों को चुनौती दी है। मामला अभी विचाराधीन है।
यह कार्रवाई छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत हर उपभोक्ता को सत्य और सटीक जानकारी पाने का अधिकार है। कोचिंग क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापन उन छात्रों को नुकसान पहुँचाते हैं जो भारी फीस चुकाते हैं और गलत जानकारी के आधार पर निर्णय लेते हैं।
सीसीपीए ने कोचिंग संस्थानों को क्या निर्देश दिए हैं?
सीसीपीए ने निर्देश दिया है कि संस्थान तत्काल प्रभाव से भ्रामक विज्ञापन बंद करें, भविष्य में ऐसे विज्ञापन प्रकाशित न करें और सभी आगामी विज्ञापनों में पूर्ण एवं सत्य जानकारी दें। इसमें टॉपर्स से जुड़े पाठ्यक्रमों की स्पष्ट जानकारी देना भी शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले