सीसीपीए ने 31 कोचिंग संस्थानों पर ₹1.39 करोड़ का जुर्माना लगाया, भ्रामक विज्ञापनों पर 60+ नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने कोचिंग क्षेत्र में फैले भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं पर शिकंजा कसते हुए 31 कोचिंग संस्थानों पर ₹1.39 करोड़ से अधिक का जुर्माना लगाया है। उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने शुक्रवार, 15 मई को यह जानकारी देते हुए बताया कि इस कार्रवाई के तहत अब तक 60 से अधिक नोटिस जारी किए जा चुके हैं। यह कदम उन लाखों छात्रों के हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अपना समय, श्रम और धन लगाते हैं।
किन संस्थानों पर हुई कार्रवाई
सीसीपीए ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई), आईआईटी-जेईई, नीट, आरबीआई और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों के खिलाफ विस्तृत जाँच के बाद यह आदेश पारित किए। विशेष रूप से, मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड पर ₹10 लाख और सीकर स्थित करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी) पर ₹5 लाख का अंतिम जुर्माना लगाया गया है।
प्राधिकरण के मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्र की अध्यक्षता में यह आदेश पारित किए गए। जाँच में पाया गया कि इन संस्थानों ने आईआईटी-जेईई और नीट परीक्षाओं में सफल उम्मीदवारों के नाम, फोटो और उपलब्धियों का प्रमुखता से उपयोग करते हुए बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन इन उम्मीदवारों द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रमों की महत्वपूर्ण जानकारी जानबूझकर छिपाई।
सीसीपीए के निर्देश और संस्थानों की प्रतिक्रिया
सीसीपीए ने दोनों संस्थानों को तत्काल प्रभाव से भ्रामक विज्ञापन बंद करने, भविष्य में ऐसे विज्ञापन प्रकाशित न करने और आगामी सभी विज्ञापनों में सत्य एवं पूर्ण जानकारी देने का निर्देश दिया। हालाँकि, दोनों संस्थानों ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के समक्ष अपील दायर करके इन आदेशों को चुनौती दी है।
उपभोक्ता अधिकार और कानूनी ढाँचा
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत प्रत्येक उपभोक्ता को सूचित होने का अधिकार है — अर्थात सत्य और सटीक जानकारी के आधार पर निर्णय लेने का अधिकार। मंत्रालय के अनुसार, भ्रामक विज्ञापन इस मौलिक अधिकार को कमज़ोर करते हैं। शिक्षा क्षेत्र में यह समस्या विशेष रूप से गंभीर है, क्योंकि यहाँ छात्र अपनी बहुमूल्य ऊर्जा, वर्षों का समय और परिवार की कठिन कमाई दाँव पर लगाते हैं।
गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब कोचिंग उद्योग पर सफलता दर के झूठे दावों और टॉपर्स की छवि के दुरुपयोग को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। यह पहली बार नहीं है कि नियामक निकायों ने इस क्षेत्र में हस्तक्षेप किया हो, लेकिन इस बार की कार्रवाई का दायरा — 31 संस्थान, 60+ नोटिस — पहले से कहीं व्यापक है।
आम जनता और छात्रों पर असर
लाखों परिवार हर साल कोचिंग संस्थानों के विज्ञापनों में दिखाए गए 'सफलता के आँकड़ों' के आधार पर भारी फीस चुकाते हैं। सीसीपीए की यह कार्रवाई संस्थानों को अब टॉपर्स की उपलब्धियों का श्रेय लेने से पहले पाठ्यक्रम-संबंधी पूरी जानकारी सार्वजनिक करने के लिए बाध्य करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एनसीडीआरसी में अपीलें खारिज होती हैं, तो यह पूरे उद्योग के लिए एक मिसाल बनेगी।
आगे क्या होगा
दोनों संस्थानों की अपीलें अब एनसीडीआरसी के विचाराधीन हैं। सीसीपीए की शेष जाँच प्रक्रियाएँ जारी हैं और संभावना है कि आने वाले महीनों में और संस्थानों पर भी अंतिम आदेश पारित किए जाएँ। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता हितों की रक्षा के प्रति यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।