फारूक अब्दुल्ला का केंद्र से आग्रह: पीओके में हत्याओं पर चुप्पी तोड़े सरकार
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने 29 जुलाई 2026 को श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए केंद्र सरकार से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी कथित हत्याओं और मानवाधिकार उल्लंघनों पर मुखर होने की माँग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पीओके को भारत का अभिन्न अंग मानती है, तो वहाँ की पीड़ा पर चुप्पी साधना स्वीकार्य नहीं है।
पीओके पर केंद्र की चुप्पी पर सवाल
डॉ. अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार अक्सर पीओके को देश का हिस्सा बताती है, लेकिन वहाँ कथित हत्याओं और मुश्किलों की खबरों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आता। उन्होंने सीधे शब्दों में पूछा, "वे कहते रहते हैं कि पीओके हमारा हिस्सा है। अगर यह आपका हिस्सा है तो आप वहाँ हो रही घटनाओं के बारे में बात क्यों नहीं करते? आप यह क्यों नहीं कहते कि हत्याएँ बंद होनी चाहिए? मैंने उनकी तरफ से कोई बयान नहीं सुना है।"
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव का दौर जारी है और पीओके में कथित तौर पर स्थानीय आबादी पर दबाव बढ़ने की खबरें आ रही हैं।
संयुक्त राष्ट्र और प्रधानमंत्री से अपील
डॉ. अब्दुल्ला ने बताया कि वे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग, प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री — तीनों से बार-बार हस्तक्षेप की गुज़ारिश कर चुके हैं। उन्होंने कहा, "मैंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग से अनुरोध किया है कि वे वहाँ जाएँ, हालात का जायज़ा लें और समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करें।" गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी कश्मीरी नेता ने पीओके के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग की हो, लेकिन केंद्र की ओर से इस पर कोई ठोस सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
छात्र आंदोलन और बेरोज़गारी पर चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर में छात्रों के नेतृत्व में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन छात्रों की माँगें पूरी करने के बजाय उन पर एफआईआर दर्ज करता है और उन्हें गिरफ्तार करता है, तो आंदोलन और तेज़ होगा। उनके शब्दों में, "छात्र जाग चुके हैं और, ईश्वर ने चाहा तो, वे इसे आगे बढ़ाएँगे।"
इसके अलावा, डॉ. अब्दुल्ला ने बेरोज़गारी और नशीली दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग को जम्मू-कश्मीर के युवाओं के सामने सबसे गंभीर संकट बताया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस का विरोध-प्रदर्शन
नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के विधायकों ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग को लेकर 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की योजना बनाई थी। हालाँकि, उसी दिन वहाँ अन्य संगठन का कार्यक्रम होने के कारण एनसी को अपना विरोध-स्थल बदलकर पृथ्वीराज रोड करना पड़ा।
आने वाले दिनों में केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और जम्मू-कश्मीर में छात्र आंदोलन की दिशा इस पूरे घटनाक्रम का अगला अध्याय तय करेगी।