फारूक अब्दुल्ला का सवाल: '10 दिनों में दो हमले, तो आतंकवाद खत्म कैसे हुआ?'
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने 2 अगस्त को अनंतनाग में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जम्मू-कश्मीर में हुए ताज़ा आतंकी हमलों पर केंद्र सरकार से कड़े सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि 10 दिनों के भीतर दो हमले — एक अनंतनाग में और एक कुलगाम में — यह साबित करते हैं कि आतंकवाद के खात्मे के सरकारी दावे ज़मीनी हकीकत से मेल नहीं खाते।
फारूक अब्दुल्ला के तीखे सवाल
अब्दुल्ला ने कहा, 'हाल ही में एक पुलिस कांस्टेबल को गोली मारी गई, और दो प्रवासी श्रमिकों को भी गोली मारी गई। मैं पूछना चाहता हूं, इन हत्याओं के लिए कौन जिम्मेदार है? आप कहते हैं कि आतंकवाद खत्म हो गया है, लेकिन अगर यह खत्म हो गया है, तो ये लोग कौन हैं जो ऐसे हमले कर रहे हैं? अगर पूरा बॉर्डर कंट्रोल में है, तो ये हमलावर कहां से आ रहे हैं?'
उन्होंने 2019 के बाद किए गए वादों का हवाला देते हुए कहा, '2019 के बाद हमें बताया गया था कि हालात बदल जाएंगे, लेकिन क्या आतंकवाद सच में खत्म हो गया है? हम सिर्फ अपने हक और इज्जत वापस पाने की मांग कर रहे हैं।'
पीओके पर अंतरराष्ट्रीय चुप्पी पर चिंता
पाक-अधिकृत कश्मीर (पीओके) के सवाल पर अब्दुल्ला ने कहा कि वहाँ के लोग भी उनके भाई हैं और उन पर हो रहे अत्याचारों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र इतना बड़ा संगठन है और उसकी मानवाधिकार शाखा भी बहुत बड़ी है। उन्हें जाकर देखना चाहिए कि वहाँ की हालत क्या है। लेकिन वहाँ सब चुप हैं; कोई भी देश कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।' यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की भूमिका पर व्यापक बहस छिड़ी हुई है।
लश्कर-ए-तैयबा की साजिश की जांच
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, अनंतनाग और कुलगाम में हुए दोनों हमले लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' की साजिश का हिस्सा हैं। एजेंसियों का मानना है कि लश्कर कश्मीर में नागरिकों को निशाना बनाने के लिए अपने सहयोगी संगठनों का इस्तेमाल करने की पुरानी रणनीति को फिर से अपना रहा है। जांचकर्ता लश्कर-ए-तैयबा के एक सदस्य की भूमिका की पड़ताल कर रहे हैं, जिसने कथित तौर पर लश्कर कमांडर जाकिर गनई के साथ मिलकर अनंतनाग, शोपियां और कुलगाम में हमलों को अंजाम दिया।
महबूबा मुफ्ती पर टिप्पणी से परहेज
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को लेकर पूछे गए सवाल पर अब्दुल्ला ने संक्षिप्त जवाब दिया: 'मैं महबूबा जी को जवाब नहीं दूंगा। वह जो कहती हैं, कहती हैं।' गौरतलब है कि दोनों नेताओं के बीच कश्मीर के राजनीतिक भविष्य को लेकर मतभेद पहले भी सामने आ चुके हैं।
आगे की स्थिति
सुरक्षा बलों ने अनंतनाग और कुलगाम में तलाशी अभियान तेज़ कर दिया है। राजनीतिक दलों की माँग है कि सरकार घाटी में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करे और स्थानीय प्रतिनिधियों को विश्वास में ले। 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक स्थिति और सुरक्षा परिदृश्य दोनों पर यह बहस जारी रहने की संभावना है।