फारूक अब्दुल्ला ने हमले के बाद कहा, 'मेरे दिल में कभी नफरत नहीं रही'

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फारूक अब्दुल्ला ने हमले के बाद कहा, 'मेरे दिल में कभी नफरत नहीं रही'

सारांश

जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला ने खुद पर हमले के बाद मीडिया से बात की। उन्होंने नफरत के खिलाफ अपनी सोच और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।

Key Takeaways

  • फारूक अब्दुल्ला ने खुद पर हुए हमले के बाद नफरत के खिलाफ बयान दिया।
  • उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।
  • केंद्र सरकार से राज्य का दर्जा वापस देने की मांग की।
  • आतंकवाद के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त की।
  • एनएसजी और पुलिस ने उनकी सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जम्मू, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने खुद पर हुए हमले के बाद गुरुवार को पहली बार मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि मेरे मन में कभी किसी के लिए नफरत नहीं रही और मेरे घर का दरवाजा सभी के लिए खुला है। जिस युवक ने मुझ पर हमला किया, मैं उसे जानता नहीं था और आज मैंने उसकी फोटो अपने मोबाइल में देखी। उन्होंने आगे कहा कि आप कितनी भी सुरक्षा बढ़ा लें, अगर हमलावर का इरादा हो तो वह हमला कर ही देगा। साथ ही, उन्होंने पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।

फारूक अब्दुल्ला ने बताया कि वह जम्मू में एक शादी समारोह में शामिल हुए थे। जैसे ही वह समारोह के बाद आयोजकों की अनुमति से घर के लिए निकले, उन्हें पटाखों जैसी आवाज सुनाई दी। पहले तो उन्हें लगा कि शादी में पटाखा फटा है, लेकिन जब उन्हें गर्मी महसूस हुई, तब उन्हें समझ में आया कि कुछ और हुआ है।

उन्होंने कहा कि तभी उन्हें जल्दी से कार में बैठा दिया गया। उनके सुरक्षाकर्मी भी वहां मौजूद थे, जिनमें से एक ने हमलावर का हाथ खींचने की कोशिश की, जिससे उसका बैलेंस बिगड़ गया। उन्होंने बताया कि एक गोली चलने की आवाज भी सुनी। इसके बाद, वह सुरक्षित अपने घर लौट आए।

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि हमलावर का मकसद क्या था। उन्होंने कहा, "मैंने कभी किसी के साथ गलत नहीं किया। जो भी मेरे पास आया, मैंने हमेशा उन्हें प्यार और सहयोग देने की कोशिश की। मेरे दिल में किसी के प्रति नफरत नहीं है।"

केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार को यह देखना चाहिए कि क्या वास्तव में हालात सुधरे हैं। उन्होंने कहा, “हमें एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में मिलकर काम करना होगा। यदि चुनी हुई सरकार के पास अधिकार नहीं हैं तो वह कैसे चल सकती है? हमें राज्य का दर्जा वापस देने का वादा किया गया था, परंतु वह आज तक पूरा नहीं हुआ।”

अपनी सुरक्षा पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि चाहे कितनी भी सुरक्षा बढ़ाई जाए, लेकिन हमलावर हमेशा फायदे में रहता है। उन्होंने कहा कि हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जहाँ आतंकवाद का खतरा बढ़ता जा रहा है। हालांकि, आतंकवाद को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है, परंतु यह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

पुलिस की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जिस शादी में वह गए थे, वहां कई प्रमुख हस्तियां मौजूद थीं, लेकिन कोई पुलिसकर्मी नहीं था। अल्लाह की कृपा से, उनकी सुरक्षा उनके साथ थी और उनकी जान बच गई।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें फोन किया और उनकी सुरक्षा का हालचाल लिया, साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएँ तब होती हैं जब समाज में नफरत का माहौल होता है। कोई भी धर्म नफरत नहीं सिखाता, बल्कि प्यार करना सिखाता है।

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि एनएसजी और राज्य पुलिस ने उनकी जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली। उन्होंने कहा, "उनकी बहादुरी के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।"

Point of View

बल्कि यह समाज में नफरत और सुरक्षा के मुद्दों पर भी प्रकाश डालता है। उनका यह कहना कि उनके दरवाजे सभी के लिए खुले हैं, एक सकारात्मक संदेश है।
NationPress
13/03/2026

Frequently Asked Questions

फारूक अब्दुल्ला पर हमला कब हुआ?
यह हमला 12 मार्च को जम्मू में एक शादी समारोह के बाद हुआ।
फारूक अब्दुल्ला ने हमले के बाद क्या कहा?
उन्होंने कहा कि उनके दिल में किसी के लिए नफरत नहीं है और उन्होंने पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
क्या फारूक अब्दुल्ला को हमलावर के बारे में जानकारी थी?
उन्होंने कहा कि वह हमलावर को नहीं जानते थे।
उन्होंने सुरक्षा के बारे में क्या कहा?
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि सुरक्षा बढ़ाने से भी हमलावर को रोकना मुश्किल होता है।
क्या केंद्र सरकार ने इस मामले में कोई कार्रवाई की?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने फारूक अब्दुल्ला को फोन कर मामले की जांच का आश्वासन दिया।
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