27 जुलाई 2026
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फारूक अब्दुल्ला ने पीओके हिंसा पर पाकिस्तान को घेरा, संयुक्त राष्ट्र से जाँच की माँग

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फारूक अब्दुल्ला ने पीओके हिंसा पर पाकिस्तान को घेरा, संयुक्त राष्ट्र से जाँच की माँग

सारांश

फारूक अब्दुल्ला ने पीओके में हो रही हिंसा को 'जुल्म' करार देते हुए पाकिस्तान पर सीधा निशाना साधा और संयुक्त राष्ट्र से जमीनी जाँच की माँग की — यह किसी प्रमुख कश्मीरी नेता की ओर से अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की दुर्लभ और स्पष्ट अपील है।

मुख्य बातें

फारूक अब्दुल्ला ने 11 जून 2026 को श्रीनगर में पीओके की स्थिति को 'बेहद गंभीर' बताया।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से पीओके में जाँच दल भेजने की सीधी अपील की।
अब्दुल्ला ने कहा — 'वहाँ कई लोग शहीद हो चुके हैं', पर स्वीकारा कि पूरी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं।
जम्मू-कश्मीर में स्थिरता के लिए विलय की शर्तों की समीक्षा और कश्मीरियों के सम्मान की बहाली को ज़रूरी बताया।
उपराज्यपाल के पास केंद्रित शक्तियों पर सवाल उठाते हुए निर्वाचित सरकार को पूरे अधिकार देने की माँग की।
पीएम मोदी के 'सबसे लंबे कार्यकाल' के दावे को खारिज किया — नेहरू के 17 साल बनाम मोदी के 12 साल का हवाला दिया।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने 11 जून 2026 को श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) में जारी हिंसा और विरोध-प्रदर्शनों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से अपील की कि वह वहाँ की जमीनी स्थिति का खुद जाकर आकलन करे।

पीओके में हिंसा पर क्या बोले अब्दुल्ला

अब्दुल्ला ने कहा, 'पीओके कठिन स्थिति से गुजर रहा है और वहाँ लोगों पर जुल्म हो रहा है। जो हिस्सा पाकिस्तान के पास है, वहाँ आज जुल्म हो रहा है। वहाँ कई लोग शहीद हो चुके हैं।' उन्होंने स्वीकार किया कि पूरी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन स्थिति को बेहद गंभीर बताया।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मानवाधिकारों की स्थिति पर तत्काल ध्यान देने की माँग करते हुए कहा कि यूएन की टीम को वहाँ का दौरा करना चाहिए और खुद देखना चाहिए कि स्थानीय लोगों को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

राज्य का दर्जा और प्रशासनिक शक्तियों का सवाल

राज्य का दर्जा बहाल किए जाने के सवाल पर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थिरता तभी आएगी, जब भारत के साथ विलय की शर्तों की समीक्षा की जाएगी और कश्मीरियों का सम्मान बहाल किया जाएगा। उनके शब्दों में, 'स्थिति स्थिर नहीं है। स्थिरता तब आएगी, जब उन्हें यह एहसास होगा कि हम भी इंसान हैं।'

उन्होंने वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और कहा कि अधिकांश शक्तियाँ उपराज्यपाल के पास हैं, जबकि ये शक्तियाँ दिल्ली से नामित व्यक्ति के पास नहीं होनी चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जनता ने एक सरकार चुनी है, इसलिए उसे उसकी पूरी शक्तियाँ मिलनी चाहिए।

नेहरू-मोदी कार्यकाल की तुलना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे लंबे कार्यकाल पूरा करने के दावे पर अब्दुल्ला ने असहमति जताई। उन्होंने कहा, 'नहीं, पंडित जवाहरलाल नेहरू 17 साल तक इस पद पर रहे थे, जबकि वे अभी सिर्फ 12 साल से प्रधानमंत्री हैं।'

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब पीओके में कथित तौर पर विरोध-प्रदर्शन और हिंसक झड़पें लगातार जारी हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस क्षेत्र की स्थिति को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि पीओके में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप नए नहीं हैं, लेकिन किसी प्रमुख कश्मीरी नेता द्वारा सीधे संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की माँग करना इस बहस को नई धार देता है। अब्दुल्ला की यह अपील भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर विवाद पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों साध रहे हैं। पीओके की पीड़ा का उल्लेख करते हुए वे अप्रत्यक्ष रूप से यह भी कह रहे हैं कि भारत के साथ रहने का अर्थ बेहतर होना चाहिए — और इसके लिए राज्य दर्जे की बहाली पहली शर्त है। गौरतलब है कि जब तक पीओके में हिंसा की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती, तब तक यूएन अपील की व्यावहारिक सफलता सीमित रहेगी — पाकिस्तान ऐसी किसी जाँच को स्वीकार करने की स्थिति में नहीं है। मुख्यधारा की कवरेज इस बयान को केवल पाक-विरोधी रूप में पेश कर रही है, जबकि इसका असली लक्ष्य दिल्ली को भी संदेश देना है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फारूक अब्दुल्ला ने पीओके पर क्या कहा?
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि पीओके में लोगों पर जुल्म हो रहा है और कई लोग शहीद हो चुके हैं। उन्होंने स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से वहाँ जाँच दल भेजने की माँग की।
फारूक अब्दुल्ला ने संयुक्त राष्ट्र से क्यों अपील की?
उन्होंने कहा कि पीओके की पूरी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है, इसलिए यूएन की टीम को खुद वहाँ जाकर जमीनी हालात देखने चाहिए। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मानवाधिकारों की स्थिति पर तत्काल ध्यान देना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे पर अब्दुल्ला का क्या रुख है?
अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थिरता तभी आएगी जब भारत के साथ विलय की शर्तों की समीक्षा होगी और कश्मीरियों का सम्मान बहाल किया जाएगा। उन्होंने निर्वाचित सरकार को पूरी शक्तियाँ देने की माँग दोहराई।
अब्दुल्ला ने उपराज्यपाल की शक्तियों पर क्या आपत्ति जताई?
उन्होंने कहा कि अधिकांश शक्तियाँ उपराज्यपाल के पास केंद्रित हैं, जबकि ये शक्तियाँ दिल्ली से नामित व्यक्ति के पास नहीं होनी चाहिए। जनता ने सरकार चुनी है, इसलिए उसे उसके अधिकार मिलने चाहिए।
क्या मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे हैं?
फारूक अब्दुल्ला ने इस दावे को खारिज किया। उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू 17 साल तक प्रधानमंत्री रहे, जबकि नरेंद्र मोदी अभी 12 साल से इस पद पर हैं।
राष्ट्र प्रेस
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