फारूक अब्दुल्ला कश्मीर बयान पर देश से माफी मांगें: ओम प्रकाश राजभर की मांग
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने 24 अक्टूबर को अंबेडकर नगर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला के कश्मीर संबंधी बयान की कड़ी आलोचना की। राजभर ने आरोप लगाया कि अब्दुल्ला का बयान जनता में भ्रम और गलतफहमी फैलाने वाला है, और उन्होंने सार्वजनिक रूप से देश से माफी मांगने की अपील की।
राजभर का मुख्य आरोप
राजभर ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला को शायद देश में हो रहे बदलावों की सही जानकारी नहीं है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवादी गतिविधियों पर बड़े पैमाने पर अंकुश लगा है। राजभर ने कहा, 'फारूक अब्दुल्ला को इस तरह के बयान देने से पहले ज़मीनी हकीकत को समझना चाहिए और लोगों के बीच भ्रम पैदा करने से बचना चाहिए।'
आर्टिकल 370 और कश्मीर की स्थिति
राजभर ने दावा किया कि आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर में पहले होने वाली हिंसक घटनाओं पर रोक लगी है और वहाँ के हालात में उल्लेखनीय सुधार आया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जब विदेश दौरों पर जाते हैं, तो भारत को बुद्ध की धरती बताते हुए शांति, प्रेम और मैत्री का संदेश देते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब कश्मीर की राजनीतिक स्थिति को लेकर विभिन्न दलों के बीच बयानबाजी का दौर चल रहा है।
उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था का हवाला
राजभर ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में दंगों, कर्फ्यू और बड़े माफियाओं पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है। उनके अनुसार, कानून-व्यवस्था में बड़े पैमाने पर सुधार आया है और आम जनता अमन-चैन को प्राथमिकता देती है। गौरतलब है कि राजभर स्वयं उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार में सहयोगी दल के मंत्री हैं।
कांग्रेस पर निशाना
राजभर ने कांग्रेस पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि करीब 60 वर्षों तक कांग्रेस की सरकार रही और फारूक अब्दुल्ला भी उस दौर में कांग्रेस के साथ जुड़े रहे, लेकिन उस अवधि में इन मुद्दों पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। आलोचकों का कहना है कि राजभर का यह बयान आगामी राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए दिया गया है।
आगे क्या
फारूक अब्दुल्ला की ओर से इस बयान पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कश्मीर के मुद्दे पर यह बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज़ हो सकती है, खासकर जब राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ रही है।