फारूक अब्दुल्ला के कश्मीर बयान पर एनडीए का पलटवार, दिलीप घोष बोले — 'ऐसी राजनीति अब नहीं चलेगी'
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के जम्मू-कश्मीर पर दिए गए बयान ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को एनडीए नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया। दिलीप घोष और ओपी राजभर सहित कई भाजपा नेताओं ने अब्दुल्ला पर निशाना साधते हुए अनुच्छेद 370 हटाने, आतंकवाद पर अंकुश और जम्मू-कश्मीर में शांति बहाल होने का हवाला दिया।
क्या था फारूक अब्दुल्ला का बयान
पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को उत्तर कश्मीर के बारामूला में एक पार्टी सम्मेलन में बोलते हुए कश्मीर मुद्दे पर केंद्र की चुप्पी पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान द्वारा इस विषय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीवित रखने के प्रयास क्षेत्र के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं और नई दिल्ली की नीति पर सवाल खड़े किए थे। यह बयान एनडीए नेताओं के लिए तत्काल प्रतिक्रिया का आधार बन गया।
दिलीप घोष की तीखी प्रतिक्रिया
दिलीप घोष ने कहा, 'जम्मू-कश्मीर में कोई आतंकवादी नहीं बचा है। यह आतंकवाद से मुक्त हो गया है। वहां के लोग आतंकवाद नहीं चाहते हैं। वहां विकास हो रहा है और केंद्र सरकार इसे देश के बाकी हिस्सों के साथ एकीकृत करके विकसित करने का काम कर रही है।' उन्होंने आगे कहा कि वहां के नेता केवल क्षेत्र को अलग रखकर राजनीति करना जानते हैं, लेकिन ऐसी राजनीति अब नहीं चलेगी।
फारूक अब्दुल्ला पर सीधा प्रहार करते हुए घोष ने कहा, 'वह पाकिस्तान से हाथ मिलाते हैं। फारूक अब्दुल्ला की राजनीति अब तक इसी तरह चलती रही है। यह अब स्वीकार्य नहीं होगा। केवल भाजपा ही प्रगति और जनआकांक्षाओं को पूरा कर सकती है।' गौरतलब है कि घोष पश्चिम बंगाल सरकार से जुड़े मंत्री हैं और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शुमार किए जाते हैं।
ओपी राजभर का केंद्र की नीतियों का बचाव
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओपी राजभर ने भी अब्दुल्ला के बयान की आलोचना करते हुए कहा, 'फारूक अब्दुल्ला शायद नहीं जानते कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में आतंकवादी गतिविधियों पर बड़े पैमाने पर अंकुश लगाया गया है। कश्मीर के मामले में आपने देखा कि अनुच्छेद 370 को हटा दिया गया। वहां जो हिंसा और खून-खराबा होता था, उसे भी काफी हद तक रोक दिया गया है।'
राजभर ने यह भी कहा, 'आज स्थिति ऐसी है कि जब भी देश के प्रधानमंत्री किसी दूसरे देश की यात्रा पर जाते हैं तो वे कहते हैं कि हम भगवान बुद्ध की धरती से आए हैं और शांति का संदेश लेकर आए हैं। प्रधानमंत्री हमेशा यही संदेश देते हैं।'
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक पुनर्गठन के बाद की नई व्यवस्था अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुई है। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से नेशनल कॉन्फ्रेंस और भाजपा के बीच वैचारिक टकराव लगातार बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान आगामी राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए अपनी-अपनी जमीन मज़बूत करने की कोशिश हैं।
यह भी गौरतलब है कि फारूक अब्दुल्ला का बारामूला में दिया गया बयान उनकी पार्टी के एक आंतरिक सम्मेलन का हिस्सा था, जिसे बाद में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया का केंद्र बना दिया गया। एनडीए नेताओं की त्वरित प्रतिक्रिया संकेत देती है कि कश्मीर का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में अभी भी संवेदनशील बना हुआ है।
आगे क्या होगा
नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से अभी तक इन प्रतिक्रियाओं पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कश्मीर पर यह बहस आने वाले दिनों में और तेज़ हो सकती है, खासतौर पर जब केंद्र और राज्य स्तर पर नीतिगत प्राथमिकताएँ तय हो रही हैं।