फारूक अब्दुल्ला के विवादित बयान पर बजरंग दल का जम्मू में विरोध, राजनीति छोड़ने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला के एक विवादित बयान ने जम्मू में तीखा राजनीतिक तनाव पैदा कर दिया है। फारूक अब्दुल्ला ने कथित तौर पर कहा था कि 'पाकिस्तान कश्मीरियों की रक्षा कर रहा है, वरना भारत के इरादे ठीक नहीं हैं।' इस बयान को देशविरोधी करार देते हुए सोमवार, 26 अक्टूबर को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जम्मू की सड़कों पर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया।
विरोध-प्रदर्शन का स्वरूप
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जम्मू में सड़कों पर उतरकर फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ नारेबाजी की और उनका पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने माँग उठाई कि अब्दुल्ला के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, हालाँकि माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
बजरंग दल की प्रतिक्रिया
बजरंग दल के अध्यक्ष राकेश बजरंगी ने कहा, 'हम पहले ही कह चुके हैं कि डॉक्टर फारूक अब्दुल्ला का मानसिक संतुलन खराब हो चुका है। उन्हें राजनीति से संन्यास लेकर अपना इलाज कराना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार नहीं है जब अब्दुल्ला ने ऐसा बयान दिया हो — उनके अनुसार, अब्दुल्ला 'लगातार सुर्खियों में बने रहने के लिए' इस प्रकार के बयान देते हैं।
राकेश बजरंगी ने आगे कहा कि अब्दुल्ला के बयान से यह स्पष्ट होता है कि वे देश के हित में नहीं बोलते। उन्होंने केंद्र सरकार से माँग की कि ऐसे लोगों को 'जेल की सलाखों के पीछे' भेजा जाए। बजरंग दल के इस बयान को आलोचना के नज़रिए से देखा जाना चाहिए क्योंकि इसमें व्यक्तिगत आरोप शामिल हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ और आरोप
बजरंगी ने दावा किया कि जब कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था, उस दौर में फारूक अब्दुल्ला और उनके परिवार ने अलगाववादियों का सहयोग किया और उनकी सरकार के कार्यकाल में कश्मीर 'महीनों तक बंद' रहा। गौरतलब है कि ये आरोप राजनीतिक रूप से विवादास्पद हैं और अब्दुल्ला पक्ष की ओर से कोई तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर को हाल ही में विधानसभा चुनावों के बाद नई सरकार मिली है और राज्य में राजनीतिक संवेदनशीलता अभी भी उच्च स्तर पर बनी हुई है। फारूक अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) सरकार में वे समर्थन की भूमिका में हैं।
आगे क्या
बजरंग दल ने स्पष्ट किया है कि यदि फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो विरोध-प्रदर्शन का दायरा बढ़ाया जाएगा। फिलहाल जम्मू प्रशासन की ओर से इस मामले में किसी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान-विवाद आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है।