जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की मांग: 20 दिसंबर तक संविधान बनाने का अल्टीमेटम, भूख हड़ताल जारी
सारांश
मुख्य बातें
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ के गठन और चुनाव कराने की माँग को लेकर छात्रों का आंदोलन 26 अक्टूबर 2026 को और तेज हो गया, जब प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय की कुलपति को एक औपचारिक माँगपत्र सौंपा। छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी माँगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक भूख हड़ताल और शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा।
मुख्य माँगें और समयसीमा
छात्रों की सबसे अहम माँग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन 20 दिसंबर 2026 तक छात्र संघ का संविधान तैयार कर उसे मंजूरी दे। इसके बाद संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर छात्र संघ चुनाव की तारीख की औपचारिक घोषणा की जाए। छात्रों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि चुनाव कराने की स्पष्ट समयसीमा चाहिए।
माँगपत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि चुनाव की प्रक्रिया केवल वादों तक सीमित न रहे — संविधान को मंजूरी देने से लेकर चुनाव की तारीख घोषित करने तक की हर कड़ी के लिए एक निश्चित समयसीमा तय हो।
अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की माँग
छात्रों ने आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर की गई सभी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लेने की माँग भी उठाई है। उनके अनुसार इन कार्रवाइयों में कारण बताओ नोटिस, निलंबन, परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध और विश्वविद्यालय से निष्कासन जैसी सख्त कदम शामिल हैं।
साथ ही छात्रों ने यह भी माँग की है कि इस विरोध प्रदर्शन के संबंध में आगे कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई न की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन उनका संवैधानिक अधिकार है और किसी भी प्रदर्शनकारी छात्र से माफी माँगने की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।
मुख्य सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे की माँग
माँगपत्र में छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य सुरक्षा सलाहकार का इस्तीफा माँगा है। यह माँग उन घटनाओं की पृष्ठभूमि में उठाई गई है जो आंदोलन के दौरान परिसर में घटित हुईं। गौरतलब है कि इस तरह की माँग विश्वविद्यालय प्रशासन के ऊपरी स्तर पर जवाबदेही की माँग को रेखांकित करती है।
प्रशासन से ठोस प्रतिबद्धता की अपेक्षा
कुलपति को सौंपे गए पत्र में छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से सभी माँगों पर स्पष्ट और सकारात्मक रुख अपनाने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि आंदोलन समाप्त करने के लिए प्रशासन की ओर से ठोस प्रतिबद्धता जरूरी है, न कि मौखिक आश्वासन।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनावों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में लंबे समय से लोकतांत्रिक तरीके से चुना गया छात्र संघ नहीं है, और यह आंदोलन उसी रिक्तता को भरने की माँग का प्रतीक बन गया है।
आगे की राह
फिलहाल छात्रों ने भूख हड़ताल और शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया है। अब सबकी नजरें विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया और माँगपत्र पर उसके अगले कदम पर टिकी हैं। यदि प्रशासन ने समयसीमा के भीतर ठोस आश्वासन नहीं दिया, तो आंदोलन के और तीव्र होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।