25 अक्टूबर 2026
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जामिया मिलिया इस्लामिया में 14वें दिन भी धरना जारी, छात्र संघ बहाली समेत 3 मांगों पर अड़े छात्र

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जामिया मिलिया इस्लामिया में 14वें दिन भी धरना जारी, छात्र संघ बहाली समेत 3 मांगों पर अड़े छात्र

सारांश

जामिया मिलिया इस्लामिया में 14 दिनों से जारी छात्र आंदोलन अब सिर्फ छात्र संघ तक सीमित नहीं रहा — 17 अक्टूबर की कार्रवाई में निलंबन और प्रॉक्टर इस्तीफे की माँग जुड़ चुकी है। कक्षाएँ ऑनलाइन, परिसर के बाहर पुलिस — और प्रशासन-छात्र वार्ता का कोई संकेत नहीं।

मुख्य बातें

जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र आंदोलन 25 अक्टूबर 2026 को 14वें दिन भी जारी रहा।
प्रदर्शनकारी 3 मांगों पर अड़े हैं: छात्र संघ की बहाली, 17 अक्टूबर की कार्रवाई वापस और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई।
छात्र अनीश खान और फरहान इसराइल ने यूनिवर्सिटी प्रॉक्टर और चीफ सिक्योरिटी एडवाइजर के इस्तीफे की माँग की।
विश्वविद्यालय ने सभी कक्षाएँ ऑनलाइन स्थानांतरित कर दी हैं; परिसर के बाहर पुलिस बल तैनात है।
छात्रों ने विवादित स्लोगन के आरोपों को खारिज करते हुए इसे आंदोलन से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया।

जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली में छात्र संघ की बहाली को लेकर शुरू हुआ विद्यार्थियों का धरना-प्रदर्शन 25 अक्टूबर 2026 को 14वें दिन भी जारी रहा। छात्र कैंपस के भीतर धरने पर बैठे हैं, जबकि विश्वविद्यालय परिसर के बाहर सुरक्षा के मद्देनज़र पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने अपनी तीन प्रमुख मांगों से पीछे हटने से साफ इनकार कर दिया है।

मुख्य घटनाक्रम

छात्र अनीश खान ने बताया कि आंदोलन की शुरुआत छात्र संघ की बहाली की एकल मांग से हुई थी, लेकिन अब मुद्दे बढ़कर तीन हो गए हैं। पहली मांग छात्र संघ को तत्काल बहाल करने की है। दूसरी मांग 17 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई — जिसमें निलंबन, कारण बताओ नोटिस और कैंपस प्रतिबंध शामिल हैं — को वापस लेने की है। तीसरी मांग उन अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की है जिन पर छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार का आरोप है।

छात्रों की मांगें और आरोप

अनीश खान ने आरोप लगाया कि 17 अक्टूबर की कार्रवाई के दौरान छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया गया। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रॉक्टर के इस्तीफे की भी माँग की। छात्र फरहान इसराइल ने कहा, 'जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ की बहाली होनी चाहिए। इसके साथ ही यूनिवर्सिटी प्रॉक्टर और चीफ सिक्योरिटी एडवाइजर का इस्तीफा होना चाहिए। इसके अलावा छात्रों के खिलाफ जो कार्रवाई की गई है, उसको खत्म किया जाए।'

दीवारों पर कथित विवादित स्लोगन लिखे जाने के सवाल पर फरहान इसराइल ने कहा कि अब तक किसी स्लोगन लिखे जाने की पुष्टि नहीं हुई है और उनका आरोप है कि यह मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है। उन्होंने कहा, 'जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जाती, हम पीछे नहीं हटेंगे।'

विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया

जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच जामिया मिलिया इस्लामिया प्रशासन ने सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएँ ऑनलाइन आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस व्यवस्था से कई छात्रों को असुविधा हुई है। परिसर पहुँचे छात्रों ने बताया कि प्रदर्शन के कारण सामान्य अकादमिक गतिविधियाँ बाधित हो रही हैं।

गौरतलब है कि विश्वविद्यालय परिसर के बाहर पुलिस बल की तैनाती बनी हुई है। छात्र फरहान इसराइल ने आरोप लगाया कि प्रशासन आंदोलन को जबरन समाप्त कराना चाहता है, इसलिए बल तैनात किया गया है। हालाँकि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।

आम छात्रों पर असर

धरने के 14 दिन पूरे होने के साथ ही कैंपस का सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है। ऑनलाइन कक्षाओं के निर्णय से विशेष रूप से उन छात्रों को परेशानी है जो दूरदराज़ से परिसर पहुँचते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब विश्वविद्यालय में परीक्षाओं और सत्रांत मूल्यांकन का दबाव भी बढ़ रहा है।

आगे क्या

छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि तीनों मांगें पूरी होने तक धरना जारी रहेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच अभी तक किसी ठोस वार्ता की जानकारी सामने नहीं आई है। स्थिति के और लंबे खिंचने की आशंका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

टालमटोल है; जब तक वार्ता नहीं होती, शैक्षणिक नुकसान छात्रों का ही होगा।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र प्रदर्शन क्यों हो रहा है?
छात्र मुख्य रूप से विश्वविद्यालय में छात्र संघ की बहाली की माँग कर रहे हैं। आंदोलन की शुरुआत इसी एकल मांग से हुई थी, लेकिन अब इसमें 17 अक्टूबर की कार्रवाई में निलंबित छात्रों की बहाली और जिम्मेदार अधिकारियों के इस्तीफे की माँग भी जुड़ गई है।
17 अक्टूबर को जामिया में क्या हुआ था?
17 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने कई छात्रों के विरुद्ध निलंबन, कारण बताओ नोटिस और कैंपस प्रतिबंध जैसी कार्रवाइयाँ कीं। छात्रों का आरोप है कि उस दौरान उनके साथ कठोर व्यवहार किया गया।
जामिया प्रशासन ने प्रदर्शन के बीच क्या कदम उठाए हैं?
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएँ ऑनलाइन आयोजित करने का निर्णय लिया है और परिसर के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया है। छात्रों और प्रशासन के बीच किसी वार्ता की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है।
जामिया छात्रों की तीन मांगें क्या हैं?
पहली मांग छात्र संघ की बहाली, दूसरी 17 अक्टूबर की कार्रवाई में निलंबित छात्रों के निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेना, और तीसरी प्रदर्शन के दौरान कथित दुर्व्यवहार के लिए जिम्मेदार अधिकारियों — विशेषकर यूनिवर्सिटी प्रॉक्टर और चीफ सिक्योरिटी एडवाइजर — के खिलाफ कार्रवाई है।
जामिया धरने का सामान्य छात्रों पर क्या असर पड़ा है?
14 दिनों से जारी धरने के चलते कैंपस की सामान्य अकादमिक गतिविधियाँ बाधित हैं। विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन कक्षाओं का विकल्प दिया है, लेकिन कई छात्रों को इससे असुविधा हो रही है, खासकर जो परिसर में उपस्थित होने के लिए दूर से आते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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