जामिया मिलिया इस्लामिया में गेट बंद: 15 दिन से आंदोलनरत छात्रों का फूटा गुस्सा, तीन मांगों पर अड़े
सारांश
मुख्य बातें
जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली को लेकर पिछले 14-15 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन 24 अक्टूबर 2026 को उस वक्त और तेज हो गया, जब विश्वविद्यालय प्रशासन ने कैंपस के सभी गेट बंद करने का आदेश जारी किया। आंदोलनकारी छात्रों का आरोप है कि प्रशासन भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को जबरन हटाकर आंदोलन को कुचलने की कोशिश कर रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
छात्रों ने तीन सूत्री मांगें सामने रखी हैं — छात्र संघ की बहाली, प्रदर्शनकारियों पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाना और प्रॉक्टर का इस्तीफा। एक प्रदर्शनकारी छात्र ने कहा, 'हमारी रणनीति शुरू से ही स्पष्ट रही है। हम पिछले 14-15 दिनों से यहाँ प्रदर्शन कर रहे हैं और छात्र भूख हड़ताल पर हैं। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं, हम यहाँ से नहीं जाएंगे।'
गौरतलब है कि कैंपस के गेट बंद करने के आदेश को छात्रों ने प्रशासन की 'घबराहट का प्रमाण' बताया। एक अन्य छात्र ने कहा, 'विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी तरह दबाव में है और हमारी मांगों को दबाने की कोशिश कर रहा है।'
प्रशासन की कार्रवाई पर आरोप
छात्रों के अनुसार, प्रदर्शन स्थल हटाने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों और सुरक्षा गार्डों को कैंपस में तैनात किया गया। एक छात्र ने कहा, 'वे कैंपस के अंदर हिंसक माहौल बना रहे हैं। पहले भी ऐसा किया था, बच्चों को जबरन हटाया था। देखिए कैसे वे अभी छात्रों को घसीट रहे हैं।' छात्रों ने इसे 'शांतिपूर्ण भूख हड़ताल का हिंसक दमन' करार दिया।
आम छात्रों पर असर
गेट बंद करने के फैसले का असर उन सैकड़ों छात्रों पर भी पड़ेगा जो कैंपस के बाहर किराये पर रहते हैं और देर रात इब्न-ए-सीना लाइब्रेरी में पढ़ाई के लिए आते हैं। यह पुस्तकालय रात 2 बजे तक खुला रहता है। एक छात्र ने बताया, 'कई छात्र एक ही कमरे में सात-सात लोग रहते हैं, इसलिए लाइब्रेरी ही उनकी पढ़ाई की मुख्य जगह है।' इसके अलावा, प्रदर्शन के बाद से कई कक्षाएँ ऑनलाइन कर दी गई हैं, जिससे छात्रों में और नाराजगी है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब जामिया में छात्र संघ चुनावों की माँग लंबे समय से लंबित है। छात्रों का कहना है कि प्रशासन ने अब तक उनकी किसी भी माँग पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया। प्रशासन की ओर से गेट बंद करने के फैसले पर आधिकारिक बयान अभी तक सामने नहीं आया है।
क्या होगा आगे
छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक तीनों माँगें पूरी नहीं होतीं, प्रदर्शन जारी रहेगा। यह आंदोलन देश के अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनावों की माँग से जुड़े व्यापक विमर्श की याद दिलाता है। आने वाले दिनों में यदि प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत नहीं होती, तो तनाव और बढ़ सकता है।