जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की मांग पर हंगामा, JMI ने सभी कक्षाएं ऑनलाइन कीं
सारांश
मुख्य बातें
जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की माँग को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन 24 अक्टूबर 2026 को भी जारी रहा, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से और अगले आदेश तक सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने का निर्णय लिया। परिसर में बिगड़ते हालात को देखते हुए यह कदम छात्रों की सुरक्षा और शैक्षणिक निरंतरता दोनों को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
विश्वविद्यालय का आधिकारिक आदेश
जेएमआई के सक्षम प्राधिकारी ने शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को एक आधिकारिक नोटिस जारी किया। इसमें कहा गया, 'मौजूदा हालात को देखते हुए और यूनिवर्सिटी कैंपस में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जेएमआई के सक्षम प्राधिकारी ने यह निर्णय लिया है कि यूनिवर्सिटी के सभी कोर्सेज की कक्षाएं तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक ऑनलाइन माध्यम से चलाई जाएंगी।'
नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया कि यह कदम 'छात्रों की सुरक्षा और भलाई को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि उनकी पढ़ाई का नुकसान न हो और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के जारी रह सके।'
फैकल्टी और छात्रों को निर्देश
विश्वविद्यालय ने सभी डीन, विभागाध्यक्षों और निदेशकों को निर्देश दिया है कि वे ऑनलाइन क्लास शेड्यूल का पालन सुनिश्चित करें और शैक्षणिक गतिविधियाँ नियमित रूप से चलती रहें। फैकल्टी सदस्यों से अनुरोध किया गया है कि वे ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए कक्षाएं संचालित करने की व्यवस्था करें और छात्रों को आवश्यक अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराएं। किसी भी आगामी अपडेट के लिए विश्वविद्यालय की आधिकारिक प्रक्रिया को ही मान्य माना जाएगा।
छात्र संघ चुनाव: मुख्य माँगें
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पिछले 20 वर्षों से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं। छात्रों की तीन प्रमुख माँगें हैं — चुनाव कराने के लिए एक स्वतंत्र समिति का गठन, चुनाव तिथि की तत्काल घोषणा, और बिना किसी विलंब के चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत। यह आंदोलन पिछले कई दिनों से परिसर में सक्रिय है।
व्यापक संदर्भ और महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनावों की बहाली का मुद्दा फिर से चर्चा में है। गौरतलब है कि दिल्ली विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में भी इस तरह के आंदोलन समय-समय पर उठते रहे हैं। जामिया के मामले में दो दशकों का अंतराल इस माँग को और अधिक मुखर बनाता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का ऑनलाइन कक्षाओं का निर्णय निकट भविष्य में लागू रहेगा और स्थिति सामान्य होने पर ही परिसर में पठन-पाठन बहाल होने की संभावना है।