29 अक्टूबर 2026
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जामिया में छात्र संघ बहाली की माँग: 18वें दिन भी प्रदर्शन जारी, हॉस्टल खाली करने के आदेश पर छात्राओं में रोष

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जामिया में छात्र संघ बहाली की माँग: 18वें दिन भी प्रदर्शन जारी, हॉस्टल खाली करने के आदेश पर छात्राओं में रोष

सारांश

जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की माँग पर 18 दिनों से जारी प्रदर्शन अब हॉस्टल खाली कराने के अचानक आदेश से और भड़क उठा है। पीएचडी छात्राओं तक को लाठीचार्ज और ब्लैकलिस्टिंग की धमकियों के आरोप, और बिना नोटिस 12 जनवरी तक कैंपस बंद — जामिया में टकराव गहराता जा रहा है।

मुख्य बातें

जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाली की माँग पर विरोध-प्रदर्शन 29 अक्टूबर 2026 को 18वें दिन भी जारी रहा।
पीएचडी छात्रा उजमा ने आरोप लगाया कि बेगम हज़रत महल गर्ल्स हॉस्टल में छात्राओं को बिना पूर्व नोटिस शनिवार तक हॉस्टल खाली करने का आदेश दिया गया।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कथित तौर पर 12 जनवरी तक के लिए कैंपस बंद करने का फैसला लिया है।
छात्राओं पर रेस्टिकेशन और लाठीचार्ज की धमकियों के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
केरल, पश्चिम बंगाल और बिहार से आई छात्राओं को ट्रेन आरक्षण न मिलने के कारण अचानक निकासी से व्यावहारिक मुश्किलें।
छात्रों की माँग है कि प्रशासन चुनाव के लिए स्पष्ट टाइमलाइन जारी करे।

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव की बहाली की माँग को लेकर चल रहा विरोध-प्रदर्शन गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को अपने 18वें दिन भी जारी रहा। छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन से चुनाव तिथियों की स्पष्ट घोषणा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली की माँग पर अड़े हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि प्रशासन का रवैया सत्तावादी हो चुका है और परिसर में छात्रों की रोज़मर्रा की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

जामिया मिलिया इस्लामिया में वर्षों से छात्र संघ के चुनाव स्थगित पड़े हैं, जिसे लेकर छात्रों में असंतोष लगातार बढ़ता रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव की बहाली एक अहम मुद्दा बना हुआ है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कथित तौर पर 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने और संविधान पारित करने की बात कही है, लेकिन प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि बिना स्पष्ट टाइमलाइन के यह आश्वासन पर्याप्त नहीं है।

छात्राओं का बयान और प्रमुख आरोप

प्रदर्शन में शामिल जामिया की पीएचडी छात्रा उजमा ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, 'हमारा यह प्रदर्शन छात्र संघ की माँग को लेकर है, जो सभी छात्रों की सामूहिक माँग है। छात्र संघ की ज़रूरत इसलिए है क्योंकि प्रशासन का जो रवैया है, वह पूरी तरह से सत्तावादी हो चुका है। कैंपस में रहने वाले छात्र रोज़मर्रा की ज़िंदगी में जिन समस्याओं का सामना करते हैं, उनको सुनने वाला कोई नहीं है। ऐसे में छात्र संघ की ज़रूरत पहले से कहीं ज़्यादा महसूस हो रही है।'

उजमा ने यह भी बताया कि वह बेगम हज़रत महल गर्ल्स हॉस्टल में रहती हैं। उनके अनुसार, बुधवार रात अचानक सभी छात्राओं को बिना किसी पूर्व आधिकारिक नोटिस के शनिवार तक हॉस्टल खाली करने का आदेश दे दिया गया। उन्होंने कहा, 'बहुत-सी छात्राओं को अभी प्लेसमेंट ऑफर मिले हैं, कई पीएचडी स्कॉलर हैं जिन्हें लाइब्रेरी और किताबों की ज़रूरत है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 12 जनवरी तक के लिए कैंपस बंद करने का फैसला ले लिया है और हमें जबरन हॉस्टल खाली करने के लिए कहा जा रहा है। यह पूरी तरह से अव्यावहारिक है।'

धमकियों और दबाव के आरोप

उजमा ने आरोप लगाया कि जब छात्राएँ अपनी समस्याओं को लेकर वार्डन और उनकी टीम के पास जाती हैं, तो उन्हें रेस्टिकेशन की धमकी दी जाती है। उनके अनुसार, लड़कियों को यह तक कहा जाता है कि अगर हॉस्टल खाली नहीं किया तो लाठीचार्ज किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि वह स्वयं हॉस्टल की मेस कमेटी की सदस्य हैं, लेकिन विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने पर उन्हें कमेटी से ब्लैकलिस्ट करने की धमकी दी गई। इन आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की तत्काल कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी।

दूरदराज़ के छात्रों की व्यावहारिक मुश्किलें

गौरतलब है कि केरल, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे दूरदराज़ के राज्यों से आने वाली कई छात्राओं को घर जाने के लिए 3-4 दिन का समय चाहिए होता है। साथ ही, इस समय ट्रेनों में आरक्षण भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे में बिना किसी पूर्व सूचना के हॉस्टल खाली कराने का आदेश छात्राओं के लिए गंभीर व्यावहारिक समस्या बन गया है।

छात्रों की माँग और आगे की राह

उजमा ने माँग की कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई करे। उन्होंने कहा, 'हम चाहते हैं कि हॉस्टल में बैठे नालायक प्रशासन को हटाया जाए और ऐसे काबिल लोगों को जिम्मेदारी दी जाए जो लड़कियों की समस्याओं को सुनें और उनका समाधान निकालें।' छात्रों की मुख्य माँग यह है कि प्रशासन छात्र संघ चुनाव के लिए एक स्पष्ट टाइमलाइन जारी करे। जब तक ऐसा नहीं होता, प्रदर्शन जारी रहने का संकेत छात्रों ने दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन स्पष्ट तिथि देने से परहेज़ किया — यही अस्पष्टता प्रदर्शन को जीवित रखती है। बिना नोटिस हॉस्टल खाली कराने का आदेश और लाठीचार्ज की कथित धमकियाँ, अगर सत्यापित हों, तो यह प्रशासनिक विफलता से आगे बढ़कर संस्थागत जवाबदेही का सवाल बन जाती हैं — एक ऐसा पहलू जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की माँग क्यों उठ रही है?
जामिया में वर्षों से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं, जिसके कारण छात्रों की रोज़मर्रा की समस्याएँ सुनने वाला कोई प्रतिनिधि निकाय नहीं है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि बिना छात्र संघ के प्रशासन का सत्तावादी रवैया बेरोकटोक जारी है।
जामिया हॉस्टल खाली कराने का विवाद क्या है?
बुधवार रात बेगम हज़रत महल गर्ल्स हॉस्टल में बिना किसी पूर्व आधिकारिक नोटिस के छात्राओं को शनिवार तक हॉस्टल खाली करने का आदेश दिया गया। विश्वविद्यालय ने 12 जनवरी तक कैंपस बंद रखने का फैसला लिया है, जिससे दूरदराज़ के राज्यों से आई छात्राओं को ट्रेन आरक्षण न मिलने के कारण भारी व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं।
क्या जामिया प्रशासन ने चुनाव कराने का आश्वासन दिया है?
प्रशासन ने कथित तौर पर 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने और संविधान पारित करने की बात कही है। हालाँकि प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि बिना स्पष्ट टाइमलाइन के यह आश्वासन अधूरा है और जब तक तारीख घोषित नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारी छात्राओं पर किन धमकियों के आरोप लगाए गए हैं?
पीएचडी छात्रा उजमा के अनुसार, प्रशासन की ओर से छात्राओं को रेस्टिकेशन और लाठीचार्ज की धमकियाँ दी गई हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन में भाग लेने पर उन्हें मेस कमेटी से ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी दी गई। इन आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका।
जामिया छात्र प्रदर्शन कब से चल रहा है और इसमें कौन शामिल हैं?
यह विरोध-प्रदर्शन 29 अक्टूबर 2026 को 18वें दिन में प्रवेश कर गया है। इसमें स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर के छात्र शामिल हैं, जिनमें केरल, पश्चिम बंगाल, बिहार सहित विभिन्न राज्यों से आए विद्यार्थी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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