26 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने मानी छात्रों की माँगें, छात्र संघ चुनाव होंगे; निलंबन नोटिस वापस

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने मानी छात्रों की माँगें, छात्र संघ चुनाव होंगे; निलंबन नोटिस वापस

सारांश

15 दिनों की भूख हड़ताल और धरने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन ने झुकते हुए छात्र संघ चुनाव कराने की सहमति दी और सभी निलंबन नोटिस वापस लिए — 2006 के बाद पहली बार विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्र प्रतिनिधित्व की वापसी की राह खुली।

मुख्य बातें

जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन ने 26 अक्टूबर 2026 को छात्रों की माँगें स्वीकार कीं।
छात्र संघ के संविधान को मंजूरी के 15 दिन बाद चुनाव कराए जाएंगे।
आंदोलन के दौरान जारी सभी निलंबन और शो-कॉज नोटिस रद्द किए गए।
विरोध के दौरान सुरक्षाकर्मियों की कार्रवाई की जाँच के लिए समिति गठित होगी।
छात्रों ने प्रशासन-विरोधी बयानों और पोस्ट के लिए सार्वजनिक माफी माँगने की प्रतिबद्धता दी।
निर्वाचित छात्र संघ 2006 में भंग किया गया था; यह पहली बार इसकी बहाली का रास्ता खुला है।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली ने 26 अक्टूबर 2026 को छात्रों के 15 दिनों के लगातार विरोध प्रदर्शन के बाद उनकी प्रमुख माँगें स्वीकार कर लीं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंदोलन के दौरान छात्रों को जारी सभी निलंबन और शो-कॉज नोटिस रद्द कर दिए हैं, और निर्वाचित छात्र संघ के गठन के लिए चुनाव कराने पर भी सहमति जताई है।

मुख्य घोषणाएँ

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद मेहताब आलम रिजवी द्वारा जारी आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया, 'जामिया छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिन बाद छात्र संघ चुनाव कराए जाएंगे। आंदोलन के दौरान छात्रों को दिए गए सभी निलंबन और शो-कॉज नोटिस को रद्द कर दिया गया है।'

इसके अतिरिक्त, प्रशासन ने विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मचारियों की कार्रवाई की जाँच के लिए एक जाँच समिति गठित करने का भी निर्णय लिया है। यह समिति यह तय करेगी कि परिसर में आंदोलन के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने किस प्रकार व्यवहार किया।

विरोध की पृष्ठभूमि

छात्र पिछले 15 दिनों से धरने पर बैठे थे। उनकी मूल माँग थी कि 2006 में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा भंग किए गए निर्वाचित छात्र संघ को पुनर्बहाल किया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनावों की माँग तेज़ हुई है।

गौरतलब है कि भूख हड़ताल करने वाले छात्रों और उनके प्रतिनिधियों ने लिखित रूप में यह प्रतिबद्धता दी थी कि माँगें स्वीकार होते ही आंदोलन तत्काल समाप्त कर दिया जाएगा। इस समझौते पर भूख हड़ताली छात्रों और उनके प्रतिनिधि मंडल के हस्ताक्षर दर्ज हैं।

छात्रों की प्रतिबद्धता

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, विरोध करने वाले छात्रों ने यह भी स्वीकार किया कि वे आंदोलन के दौरान प्रशासन के विरुद्ध दिए गए किसी भी अपमानजनक बयान, कार्रवाई या सोशल मीडिया पोस्ट के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिए सार्वजनिक रूप से माफी माँगेंगे।

आदेश में यह भी उल्लेख है कि ऐसी सभी पोस्ट को सोशल मीडिया चैनलों से तत्काल प्रभाव से हटाया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया, 'इस बात को रिकॉर्ड में ले लिया गया है और इसका पालन हो रहा है या नहीं, इस पर नज़र रखी जाएगी।'

आगे क्या होगा

अब सबकी निगाहें जामिया छात्र संघ के संविधान की मंजूरी की प्रक्रिया पर टिकी हैं, जिसके बाद 15 दिन के भीतर चुनाव की राह खुलेगी। सुरक्षाकर्मियों की जाँच समिति की रिपोर्ट भी परिसर के माहौल को आकार देगी। विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र नेताओं के बीच बने इस समझौते की प्रभावशीलता आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नज़रिए से बहस का विषय बन सकती है। असली कसौटी यह है कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने में कितना समय लगता है, क्योंकि उसी पर चुनाव की समयसीमा निर्भर करती है — प्रशासन इस प्रक्रिया को अनिश्चित काल तक खींच भी सकता है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव कब होंगे?
जामिया छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिन के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। संविधान अनुमोदन की प्रक्रिया अभी जारी है, इसलिए सटीक तारीख की घोषणा बाकी है।
जामिया में छात्र संघ कब से बंद था?
जामिया मिल्लिया इस्लामिया का निर्वाचित छात्र संघ वर्ष 2006 में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा भंग कर दिया गया था। तब से अब तक करीब दो दशकों से परिसर में कोई चुनावी छात्र प्रतिनिधित्व नहीं था।
छात्रों के निलंबन नोटिस क्यों वापस लिए गए?
छात्रों के 15 दिनों के लगातार विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने समझौता करते हुए आंदोलन के दौरान जारी सभी निलंबन और शो-कॉज नोटिस रद्द कर दिए। रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद मेहताब आलम रिजवी ने इसकी आधिकारिक घोषणा की।
जाँच समिति किस बात की जाँच करेगी?
विश्वविद्यालय प्रशासन ने विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मचारियों की कार्रवाई की जाँच के लिए एक समिति बनाने का निर्णय लिया है। यह समिति यह देखेगी कि आंदोलन के दौरान परिसर सुरक्षाकर्मियों का व्यवहार उचित था या नहीं।
समझौते में छात्रों से माफी की शर्त क्यों रखी गई?
आधिकारिक आदेश के अनुसार, विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रशासन के खिलाफ जो अपमानजनक बयान, कार्रवाइयाँ या सोशल मीडिया पोस्ट हुई थीं, उनके लिए छात्रों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिए सार्वजनिक माफी माँगने और पोस्ट हटाने पर सहमति जताई। प्रशासन ने कहा कि इसके अनुपालन पर नज़र रखी जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 20 घंटे पहले
  2. कल
  3. कल
  4. कल
  5. 2 दिन पहले
  6. 2 दिन पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले