23 अक्टूबर 2026
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जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 20 साल बाद छात्र संघ चुनाव की मांग, 5 छात्र भूख हड़ताल पर

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जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 20 साल बाद छात्र संघ चुनाव की मांग, 5 छात्र भूख हड़ताल पर

सारांश

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 20 साल से बंद छात्र संघ चुनाव की माँग को लेकर 5 छात्र भूख हड़ताल पर। DU में चुनाव हो चुके, JNU-AMU में तैयारी जारी — जामिया अकेला केंद्रीय विश्वविद्यालय क्यों पीछे? प्रशासन की चुप्पी से आंदोलन तेज़ होने के आसार।

मुख्य बातें

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पिछले 20 वर्षों से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं।
5 छात्र — जिनमें 4 छात्र और 1 छात्रा शामिल हैं — 23 अक्टूबर 2026 को भूख हड़ताल पर हैं।
छात्रों की माँग: चुनाव कमेटी गठन, तारीख की घोषणा और बिना देरी प्रक्रिया शुरू करना।
प्रदर्शन स्थल पर लिखा 'फ्री कश्मीर' नारा हटाया गया; छात्रों ने इसे शरारती तत्व की करतूत बताया।
एक छात्र ने दावा किया कि प्रवेश के दौरान 12 सुरक्षाकर्मियों ने उसका पहचान-पत्र जाँचा।
DU में चुनाव हो चुके हैं, JNU और AMU में भी प्रक्रिया जारी है।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया (नई दिल्ली) में छात्र संघ चुनाव बहाल कराने की मांग को लेकर 23 अक्टूबर 2026 को छात्रों का प्रदर्शन जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों का दावा है कि इस केंद्रीय विश्वविद्यालय में पिछले 20 वर्षों से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं। छात्रों की एकसूत्री मांग है कि चुनाव के लिए एक कमेटी गठित की जाए, तारीख घोषित हो और प्रक्रिया बिना देरी के शुरू की जाए।

भूख हड़ताल और प्रदर्शन

प्रदर्शन में शामिल छात्र अतीक अहमद ने बताया कि उनके पाँच साथी — जिनमें चार छात्र और एक छात्रा शामिल हैं — भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी माँग बिल्कुल स्पष्ट है और इसे ठीक से समझे जाने की ज़रूरत है।

अतीक अहमद ने अन्य विश्वविद्यालयों से तुलना करते हुए कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव हो चुके हैं, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में चुनाव होने हैं और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में तैयारियाँ चल रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश के अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में चुनाव हो रहे हैं तो जामिया में यह प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई जा रही।

'फ्री कश्मीर' नारे पर छात्रों की सफाई

प्रदर्शन स्थल पर लिखे गए 'फ्री कश्मीर' के नारे को लेकर पूछे जाने पर अतीक अहमद ने कहा कि यह किसी शरारती तत्व की करतूत थी जिसका उद्देश्य आंदोलन को भटकाना और मुख्य मांग को कमज़ोर करना था। उनके अनुसार उस नारे को तुरंत हटा दिया गया।

अतीक ने आरोप लगाया कि इस तरह के नारे या पोस्टर जानबूझकर आंदोलन को बदनाम करने, ध्यान भटकाने और भ्रम फैलाने के लिए लगाए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा नारा लिखना गलत है और वे इसकी निंदा करते हैं। साथ ही बताया कि छात्रों की बैठक में इस पर चर्चा हो चुकी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की निगरानी के लिए एक मॉनिटरिंग टीम बनाई जाएगी।

सुरक्षा व्यवस्था पर आरोप

प्रदर्शन में शामिल एक अन्य छात्र ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उसने दावा किया कि विश्वविद्यालय में प्रवेश के दौरान 12 सुरक्षाकर्मियों ने उसका पहचान-पत्र जाँचा। इसी छात्र ने यह भी आरोप लगाया कि करीब दो महीने पहले प्रवेश परीक्षा में सफल होने के बावजूद प्रशासन ने उसका औपचारिक दाखिला नहीं लिया था।

यह ऐसे समय में आया है जब देश भर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनावों को लेकर बहस तेज़ हुई है। लिंगदोह समिति की सिफारिशें, जो छात्र संघ चुनावों का ढाँचा तय करती हैं, दो दशक पहले लागू हुई थीं, लेकिन कई संस्थान अभी भी इन्हें पूरी तरह अमल में नहीं लाए हैं।

आगे क्या होगा

प्रदर्शनकारी छात्रों ने एकजुट होकर माँग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन तत्काल चुनाव कमेटी बनाए और समयसीमा घोषित करे। भूख हड़ताल जारी रहने की स्थिति में आंदोलन का दायरा बढ़ने की आशंका है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक नीतिगत विफलता है जिसे नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है। जब DU, JNU और AMU जैसे केंद्रीय संस्थान नियमित चुनाव करा रहे हैं, तो जामिया की यह खामोशी लिंगदोह समिति की सिफारिशों की अनदेखी को उजागर करती है। 'फ्री कश्मीर' नारे का मुद्दा एक बड़े पैटर्न की ओर इशारा करता है — जहाँ किसी भी छात्र आंदोलन को एक विवादित नारे या घटना से जोड़कर असली माँग को दबाने की कोशिश होती है। विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी और कड़ी सुरक्षा के आरोप मिलकर एक ऐसी तस्वीर बनाते हैं जहाँ छात्रों की लोकतांत्रिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने की जगह रोका जा रहा है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव कब से नहीं हुए हैं?
प्रदर्शनकारी छात्रों के अनुसार जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पिछले 20 वर्षों से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं। छात्र अतीक अहमद ने माँग की है कि तत्काल चुनाव कमेटी बनाई जाए और तारीख घोषित की जाए।
जामिया में भूख हड़ताल पर कितने छात्र हैं?
23 अक्टूबर 2026 को पाँच छात्र भूख हड़ताल पर हैं, जिनमें चार छात्र और एक छात्रा शामिल हैं। छात्र अतीक अहमद ने यह जानकारी दी।
जामिया में 'फ्री कश्मीर' का नारा किसने लिखा?
प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि यह नारा किसी शरारती तत्व ने आंदोलन को भटकाने के उद्देश्य से लिखा था, जिसे तुरंत हटा दिया गया। छात्रों ने इसकी निंदा करते हुए ऐसी घटनाओं की निगरानी के लिए एक मॉनिटरिंग टीम बनाने का ऐलान किया।
अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव की क्या स्थिति है?
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में छात्र संघ चुनाव हो चुके हैं, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में चुनाव होने हैं और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में तैयारियाँ जारी हैं। छात्रों ने इसी आधार पर सवाल उठाया है कि जामिया में चुनाव क्यों नहीं हो रहे।
जामिया प्रशासन ने छात्रों की माँग पर क्या कहा?
अब तक जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। छात्रों ने माँग की है कि प्रशासन ठोस कदम उठाए, अन्यथा आंदोलन जारी रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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