30 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जामिया में छात्र संघ चुनाव की घोषणा पर कांग्रेस ने कहा — 'छात्रों के साहस और संकल्प की जीत'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जामिया में छात्र संघ चुनाव की घोषणा पर कांग्रेस ने कहा — 'छात्रों के साहस और संकल्प की जीत'

सारांश

दो दशकों की प्रतीक्षा के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की घोषणा हुई। भूख हड़ताल, प्रशासनिक एफआईआर और विरोध दमन की कोशिशों के बावजूद NSUI के छात्रों ने यह लड़ाई जीती — और कांग्रेस ने इसे छात्र लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया।

मुख्य बातें

जामिया मिलिया इस्लामिया में लगभग दो दशकों बाद छात्र संघ चुनाव की घोषणा की गई।
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने इसे NSUI के छात्रों के साहस और दृढ़ संकल्प की जीत बताया।
प्रतापगढ़ी ने जामिया प्रशासन द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को 'हास्यास्पद' करार दिया और कानूनी लड़ाई की घोषणा की।
कांग्रेस नेता उदित राज और सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने भी छात्रों को बधाई देते हुए इसे ऐतिहासिक पल बताया।
सांसद प्रतापगढ़ी ने आरोप लगाया कि परिसर में विवादित नारे प्रशासन ने 'साजिश' के तहत लगवाए, छात्रों ने नहीं।

कांग्रेस ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की घोषणा का स्वागत करते हुए इसे छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन की ऐतिहासिक जीत बताया। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि जामिया प्रशासन ने विरोध प्रदर्शन को दबाने की हर कोशिश की, फिर भी छात्रों का हौसला नहीं टूटा।

छात्रों के संघर्ष की पृष्ठभूमि

जामिया मिलिया इस्लामिया में पिछले करीब दो दशकों से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए थे। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) से जुड़े छात्र लंबे समय से इस बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार के लिए लड़ रहे थे। आंदोलन के दौरान कई छात्र भूख हड़ताल पर बैठे और छात्राओं ने भी बड़ी संख्या में अपना समर्थन दर्ज कराया।

प्रतापगढ़ी के अनुसार, इस प्रदर्शन को बदनाम करने के लिए विश्वविद्यालय परिसर में विवादित नारे भी लगाए गए, जिनके बारे में उन्होंने आरोप लगाया कि ये छात्रों ने नहीं, बल्कि प्रशासन ने किसी 'साजिश' के तहत लिखवाए थे।

इमरान प्रतापगढ़ी का बयान और एफआईआर विवाद

सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा, 'यह जामिया में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के दृढ़ संकल्प और साहस की जीत है। मैं जामिया के सभी छात्रों को बधाई देता हूं। जिस तरह से छात्र आंदोलन कर रहे थे और भूख हड़ताल पर थे और छात्राओं की ओर से दिखाया गया समर्थन अपने आप में ऐतिहासिक था।'

प्रतापगढ़ी ने बताया कि वे छात्रों का समर्थन करने के लिए ऑटोरिक्शा में सवार होकर सादे कपड़ों में परिसर में दाखिल हुए थे और गेट नंबर 4 से अंदर गए। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर 'हास्यास्पद' थी और उन्होंने कहा, 'इससे हम कोर्ट और जांच में निपटेंगे।'

अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता उदित राज ने भी इस घोषणा का श्रेय NSUI के छात्रों को दिया। उन्होंने कहा, 'यह एनएसयूआई के छात्रों के साहस और संघर्ष का नतीजा है। प्रशासन को बेवजह रुकावटें नहीं खड़ी करनी चाहिए थीं। बहरहाल, अब उसे चुनाव कराने की घोषणा करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।'

वहीं, सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने इस फैसले को पूरे देश में छात्र लोकतंत्र के लिए एक अहम पल बताया। उन्होंने कहा, 'पिछले दो दशकों से उन्हें एक यूनियन बनाने के बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित रखा गया था। मुझे लगता है कि यह पूरे देश के छात्र समुदाय के लिए जश्न मनाने का मौका है।'

राहुल गांधी के सत्याग्रह से जोड़ा संदर्भ

प्रतापगढ़ी ने यह भी कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा पूरे देश में चलाए जा रहे सत्याग्रह का भी छात्रों पर सकारात्मक असर पड़ा। उन्होंने भूख हड़ताल पर बैठे NSUI के सभी छात्रों को बधाई दी।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब देशभर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनावों की माँग तेज हो रही है। जामिया की यह सफलता अन्य विश्वविद्यालयों में चल रहे आंदोलनों के लिए एक नई ऊर्जा का संचार कर सकती है। अब सबकी नज़रें इस पर हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन चुनाव की तिथियों और प्रक्रिया की घोषणा कब करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी उतना ही सच है कि देश के एक प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालय में दो दशक तक यह बुनियादी अधिकार रोके रखना अपने आप में एक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। एफआईआर विवाद और कथित साजिश के आरोप बताते हैं कि टकराव केवल चुनाव तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें सत्ता और जवाबदेही का गहरा प्रश्न भी शामिल था। असली परीक्षा अब यह होगी कि क्या प्रशासन निष्पक्ष और समयबद्ध चुनाव कराता है — या यह घोषणा भी टालमटोल की एक नई कड़ी बनती है।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की घोषणा क्यों महत्वपूर्ण है?
जामिया में लगभग दो दशकों से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए थे, जिससे छात्रों को यह बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार नहीं मिल पा रहा था। NSUI के नेतृत्व में भूख हड़ताल और लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद यह घोषणा हुई, इसलिए इसे ऐतिहासिक माना जा रहा है।
इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ जामिया में एफआईआर क्यों दर्ज हुई थी?
जामिया प्रशासन ने कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, जब वे छात्रों का समर्थन करने परिसर में पहुँचे थे। प्रतापगढ़ी ने इस एफआईआर को 'हास्यास्पद' बताते हुए कहा कि वे कोर्ट और जाँच में इससे निपटेंगे।
NSUI क्या है और जामिया आंदोलन में उसकी क्या भूमिका रही?
नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का छात्र संगठन है। जामिया में छात्र संघ चुनाव की माँग को लेकर NSUI के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल की, जिसके बाद प्रशासन को चुनाव की घोषणा करनी पड़ी।
जामिया प्रशासन पर परिसर में विवादित नारे लगवाने का आरोप किसने लगाया?
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय परिसर में जो विवादित नारे लिखे गए, वे छात्रों ने नहीं बल्कि जामिया प्रशासन ने 'साजिश' के तहत लिखवाए, ताकि छात्र आंदोलन को बदनाम किया जा सके। यह आरोप अभी तक सत्यापित नहीं हुआ है।
सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने जामिया के इस फैसले पर क्या कहा?
सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने इस घोषणा को पूरे देश के छात्र समुदाय के लिए जश्न मनाने का अवसर बताया। उन्होंने कहा कि राजधानी के एक प्रमुख विश्वविद्यालय में दो दशक तक छात्र संघ न बनने देना लोकतंत्र के साथ अन्याय था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 2 दिन पहले
  3. 3 दिन पहले
  4. 4 दिन पहले
  5. 5 दिन पहले
  6. 6 दिन पहले
  7. 6 दिन पहले
  8. 6 दिन पहले