जामिया पोस्टर विवाद: बुद्धिजीवियों ने संवाद से समाधान की माँग की, आंदोलन जारी
सारांश
मुख्य बातें
जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में छात्रों का विरोध प्रदर्शन 26 अक्टूबर 2026 को भी जारी रहा — यह तब भी नहीं थमा जब विश्वविद्यालय प्रशासन ने तीन प्रमुख माँगें मान ली थीं। कैंपस की दीवारों पर मिले विवादित पोस्टरों और बिना अनुमति प्रवेश के मामले में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद समेत अन्य सांसदों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर ने इस विवाद को राजनीतिक रंग भी दे दिया है। इस पूरे घटनाक्रम पर अब बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पूर्व छात्रों ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है।
मुख्य घटनाक्रम
सोमवार शाम को छात्रों ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कैंपस के भीतर नारेबाज़ी और प्रदर्शन किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन के अनुसार, शांति बहाली के लिए बातचीत का सिलसिला जारी है, लेकिन छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी माँगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन नहीं रुकेगा।
बुद्धिजीवियों की प्रतिक्रिया
उर्दू साहित्य के विद्वान सिद्दीकुर रहमान किदवई ने इस विवाद पर कहा, 'जामिया में पहले कभी ऐसा नहीं हुआ है कि कैंपस में लोग इस तरह आपस में भिड़ जाएँ और पोस्टर अभियान चलाने लगें। छात्र संघ और शिक्षक संघ हमेशा साथ मिलकर बातचीत के ज़रिए कैंपस के मुद्दों को सुलझाते रहे हैं। कैंपस में लोगों के बीच कभी इस स्तर की हिंसा या दुश्मनी नहीं देखी गई।'
सामाजिक और महिला अधिकार कार्यकर्ता सैयदा हमीद ने विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'ये तीन माँगें... इनके जवाब में बस गोल-मोल बातें कही गई हैं। यह टालमटोल करने वाला जवाब है। इन माँगों पर एक स्पष्ट और निश्चित समय-सीमा के भीतर कार्रवाई की जानी चाहिए।'
संस्थापक परिवार की आवाज़
छात्र संघ बहाली की माँग के समर्थन में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता समीना मिश्रा ने भी अपनी बात रखी। वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति और जामिया के सह-संस्थापक डॉ. ज़ाकिर हुसैन की परपोती हैं। उन्होंने कहा, 'मैं इस संस्थान की पूर्व छात्रा हूँ और इसी इलाके में रहती हूँ। जामिया में एक छात्रा के तौर पर बिताए गए दो साल मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण रहे — उन सालों ने मेरे नज़रिए को आकार दिया।'
एफआईआर और राजनीतिक पहलू
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद समेत कई सांसदों पर कैंपस में बिना अनुमति प्रवेश करने और विवादित पोस्टरों से जुड़े होने का आरोप है। राष्ट्रीय छात्र यूनियन ऑफ़ इंडिया (NSUI) के पूर्व सोशल मीडिया प्रमुख जीशान खान ने भी इस मामले पर अपने विचार रखे। गौरतलब है कि यह विवाद उस समय उभरा है जब जामिया में छात्र संघ चुनाव लंबे समय से स्थगित हैं।
आगे की राह
विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच की खाई फिलहाल पाटती नहीं दिख रही। बुद्धिजीवियों की राय में संवाद ही एकमात्र स्थायी समाधान है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या प्रशासन माँगों पर ठोस समय-सीमा तय करता है और क्या राजनीतिक दलों की संलिप्तता के बाद मामला अदालत तक पहुँचता है।