जेएनयू-जामिया विवाद: सीपीआई नेता गिरीश चंद्र शर्मा बोले — छात्र आंदोलन को बदनाम करने की साजिश
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के राष्ट्रीय सचिव गिरीश चंद्र शर्मा ने 25 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में जेएनयू-जामिया विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया की दीवारों पर लिखे विवादित नारे एक सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा हैं, जिसका मकसद छात्रों और उनके आंदोलन को बदनाम करना है। उन्होंने यह भी कहा कि यह सब केंद्र सरकार के दबाव में हो रहा है।
जामिया विवाद पर सीपीआई का रुख
शर्मा ने कहा, 'जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन के बाद भारत सरकार काफी घबरा गई। सरकार को डर था कि जामिया में छात्र संघ की बहाली के लिए चल रहा आंदोलन, वोट की चोरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन से न जुड़ जाए।' उनके अनुसार, इसी घबराहट में जामिया प्रशासन पर दबाव डालकर आंदोलन को कमज़ोर करने की कोशिश की गई।
शर्मा ने आगे कहा कि ये विवादित नारे बाहर से भीड़ में घुसाए गए लोगों ने लिखे और इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी (BJP) का केंद्रीय इशारा है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष पर आरोप लगाने के लिए एफआईआर दर्ज कराई गई है और जाँच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।
फारूक अब्दुल्ला के बयान पर सीपीआई की राय
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान को लेकर दिए गए विवादित बयान पर शर्मा ने कहा कि अब्दुल्ला एक जिम्मेदार नेता हैं और ऐसे परिवार से आते हैं जिसने स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया तथा कश्मीर को भारत से जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा, 'या तो उनके बयान को समझने में कोई गलती हुई है, या फिर बोलते समय उनसे कोई चूक हो गई होगी।' शर्मा ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की माँग का संदर्भ देते हुए कहा कि भाजपा ने यह वादा किया था लेकिन अब उससे मुकर रही है। उनके अनुसार, इस संवेदनशील माहौल में कोई भी बयान आए तो भाजपा उसे मुद्दा बना देती है।
'इंडिया' गठबंधन की रैली और भाजपा के आरोप
1 नवंबर को रामलीला मैदान, नई दिल्ली में प्रस्तावित 'इंडिया' गठबंधन की रैली को लेकर भाजपा का आरोप है कि यह तारीख 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी है, इसलिए उस दिन रैली करना सिख समुदाय की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।
इस पर शर्मा ने कहा कि राजनीतिक पार्टियाँ रैली की तारीख तय करते समय जगह की उपलब्धता और सुविधा देखती हैं। रामलीला के कारण मैदान व्यस्त था, अब उपलब्ध हुआ है। उन्होंने कहा कि 'इंडिया' गठबंधन की बैठक में देशभर में पाँच रैलियाँ करने का फैसला हुआ था, जिनमें एक दिल्ली में तय हुई। पुलिस से अनुमति मिलने के बाद ही तारीख की घोषणा की गई।
व्यापारी समुदाय और भाजपा संबंध
शर्मा ने भाजपा द्वारा व्यापारियों की आपत्तियों को आगे करने पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान में रैली से व्यापार पर पड़ने वाले असर का सवाल उठाया गया, लेकिन यह किसी से छुपा नहीं है कि व्यापारी समुदाय के अधिकांश लोग भाजपा समर्थक रहे हैं। उनके अनुसार, रैली की संभावित सफलता को देखते हुए भाजपा घबराई हुई है।
आगे क्या होगा
जामिया दीवार-लेखन प्रकरण में जाँच जारी है और सीपीआई ने माँग की है कि निष्पक्ष जाँच हो ताकि असली दोषी सामने आ सकें। 1 नवंबर की 'इंडिया' गठबंधन की रैली पर सियासी तापमान बढ़ने की उम्मीद है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब विपक्ष केंद्र सरकार पर चुनावी धाँधली के आरोप लेकर जन-आंदोलन तेज़ करने की कोशिश में है।