क्या जेएनयू में छात्र पढ़ाई के लिए जाते हैं या आतंकवाद फैलाने?

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क्या जेएनयू में छात्र पढ़ाई के लिए जाते हैं या आतंकवाद फैलाने?

सारांश

क्या जेएनयू में छात्र वास्तव में पढ़ाई के लिए जाते हैं या आतंकवाद फैलाने? यह सवाल उठाते हुए, भाजपा नेता हाजी अरफात शेख ने नारेबाजी की गंभीरता पर प्रकाश डाला है। उनका कहना है कि राजनीतिक दल छात्रों के माध्यम से अपनी बातें कहने की कोशिश कर रहे हैं। आइए जानते हैं इस मुद्दे की गहराई।

Key Takeaways

  • जेएनयू में राजनीतिक विवाद और नारेबाजी के पीछे की मानसिकता को समझना जरूरी है।
  • छात्रों को अपनी आवाज उठाने का अधिकार है, लेकिन इसे शांति से करना चाहिए।
  • कानून और संविधान की सीमाओं का पालन करना अनिवार्य है।

मुंबई, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र भाजपा नेता हाजी अरफात शेख ने जेएनयू में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी पर सवाल उठाया और कहा कि क्या वहां छात्र पढ़ने जाते हैं या आतंकवाद फैलाने?

हाजी अरफात शेख ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि जिस तरह से जेएनयू में यह सब होता है, वह कई सालों से देखा जा रहा है। राजनीतिक दल जो अपनी बात नहीं कह पाते, वह छात्रों के माध्यम से यह सब कहने की कोशिश करते हैं। जो मामला कोर्ट में है, उसका फैसला कोर्ट को करना है। 3000 से अधिक पेपर जमा किए गए हैं और 30,000 से अधिक सबूत पुलिस ने दिए हैं। क्या इस मामले को लेकर इस तरह की नारेबाजी उचित है?

उन्होंने कहा कि एक अच्छे वकील का होना जरूरी है। कानून और संविधान का पालन करना चाहिए। इसके अनुसार देखा जाएगा कि कोई दोषी है या नहीं। अगर हर चीज का दोष प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर डाला जाएगा, तो यह ठीक नहीं है।

हाजी अरफात शेख ने आरोप लगाया कि जब दिल्ली में दंगा हुआ, तब वहां किसकी सरकार थी? किसके समर्थन से यह सब हो रहा था? अब वे लोग समाप्त हो गए हैं। जो बीज बोए गए थे, वही उगने वाले हैं। उन्होंने हर बात के लिए प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराने के बजाय कानून का सहारा लेने की सलाह दी और कहा कि इस तरह की हरकतों से छात्रों को बचना चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया कि जेएनयू में क्या पढ़ाया जा रहा है और इसके पीछे कौन लोग हैं? क्या ये लोग पढ़ाई करने जा रहे हैं या आतंकवाद फैलाने? यह बड़ा सवाल है। वहां के प्रोफेसर और मैनेजमेंट भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। हर बार वहीं से इस तरह की आवाज क्यों उठती है? आवाज उठाने का अधिकार सबको है, लेकिन इस तरह की नारेबाजी करना गलत है।

पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर चल रहे विवाद पर उन्होंने कहा कि लोग जागरूक हो रहे हैं। शहर की स्थिति ठीक नहीं है। ऐसा लगता है कि शहर का विकास थम सा गया है। लोग बदलाव चाहते हैं और इसी बदलाव से सीएम ममता बनर्जी को डर लग रहा है।

उद्धव-राज ठाकरे के एकसाथ चुनाव लड़ने पर उन्होंने कहा कि मुंबई शहर में उन्हें कोई फायदा नहीं होने वाला है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी उनका असर नहीं दिखा। उन्होंने कहा कि एक नेता हैं, जो कभी गंगा की बुराई करते हैं और अजान की आवाज को बंद करने की बात करते हैं। दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे हैं, जो सेक्युलर बनने की कोशिश कर रहे हैं। ये विकास पर कोई बात नहीं कर रहे हैं। भाजपा और उसके उम्मीदवार विकास पर चुनाव लड़ रहे हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि इससे पहले 25 साल तक बीएमसी शिवसेना के पास थी, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। एक समय था जब मुंबई के बीच पर बड़े-बड़े स्टार घूमते थे, लेकिन आज समुद्र के किनारे जाएं तो बच्चे बीमार हो जाते हैं। उन्होंने मुंबई को क्या दिया?

हाजी अरफात शेख ने कहा कि जब महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस बने तो उन्होंने कॉस्टल रोड दिया। अब जब नजारा देखते हैं तो लोग वाह कहते हैं। मुंबई में विकास भी हमारी सरकार ने किया है। केंद्र की सरकार ने हमारी मदद की, जिससे महाराष्ट्र और मुंबई का विकास हुआ है। अगर केंद्र में पीएम मोदी और महाराष्ट्र में फडणवीस न होते, तो ये काम कैसे होते?

भाजपा नेता ने विश्वास जताया कि महाराष्ट्र और मुंबई में भाजपा की जीत होगी और मुंबई में भाजपा का ही मेयर होगा। मुसलमान कह रहे हैं कि इस बात में हम भाजपा के साथ हैं।

Point of View

जहां शिक्षा संस्थानों में राजनीतिक धारणाओं का प्रवेश चिंता का विषय बन गया है। हर छात्र को अपनी आवाज उठाने का हक है, लेकिन यह जरूरी है कि यह आवाज शांति और सहिष्णुता से भरी हो। हमें विचारशीलता के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करने की जरूरत है।
NationPress
09/01/2026

Frequently Asked Questions

जेएनयू में नारेबाजी का क्या कारण है?
जेएनयू में नारेबाजी का मुख्य कारण राजनीतिक विचारधाराएं और छात्र संगठनों के बीच मतभेद है।
क्या जेएनयू में पढ़ाई का माहौल सही है?
जेएनयू में पढ़ाई का माहौल बहस और चर्चा के लिए खुला है, लेकिन यह अक्सर राजनीतिक विवादों में उलझ जाता है।
हाजी अरफात शेख का इस मामले पर क्या कहना है?
हाजी अरफात शेख ने कहा कि छात्रों को पढ़ाई के लिए वहां आना चाहिए, न कि आतंकवाद फैलाने के लिए।
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