कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन: त्रुटिरहित मतदाता सूची की मांग में आज कोलकाता में धरना
सारांश
Key Takeaways
- कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन आज कोलकाता में होगा।
- त्रुटिरहित मतदाता सूची की मांग की जा रही है।
- एसआईआर में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।
- एक करोड़ से अधिक मतदाताओं की सुनवाई पर सवाल उठाए गए हैं।
- कलकत्ता हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की मांग की है।
नई दिल्ली, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच पश्चिम बंगाल में चल रहे एसआईआर के मुद्दे पर कांग्रेस आज विरोध प्रदर्शन करने जा रही है। कांग्रेस ने एसआईआर में व्यापक अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए त्रुटिरहित मतदाता सूची की मांग की है।
पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुभंकर सरकार ने इस संबंध में शुक्रवार दोपहर दो बजे से कोलकाता में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के समक्ष 24 घंटे का धरना देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि पार्टी का हमेशा से यह मानना रहा है कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए और न ही कोई फर्जी नाम इसमें शामिल किया जाना चाहिए।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्ष 4 नवंबर से शुरू हुई एसआईआर प्रक्रिया के चलते वास्तविक मतदाताओं को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और नाम हटाए जाने का डर बढ़ गया है।
राज्य कांग्रेस अध्यक्ष के अनुसार, एक करोड़ से अधिक मतदाताओं की सुनवाई तथाकथित 'तार्किक विसंगतियों' के आधार पर की गई है, जिसकी कानूनी वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। सुभंकर सरकार ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के कुछ निर्णयों के कारण अदालतों को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ा है।
गौरतलब है कि कांग्रेस आगामी दिनों में अपने आंदोलन को तेज करने की योजना बना रही है, जिसमें एसआईआर के तहत अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित करने, किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम 'तार्किक विसंगति' के आधार पर बाहर न करने, और चुनावी पंजीकरण अधिकारियों की कानूनी शक्तियों को कम न करने की मांगें शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, प्रपत्र 6, 7 और 8 में प्रस्तुत सभी आवेदनों का उचित सुनवाई के माध्यम से निपटारा किया जाए। गलती से बाहर किए गए पात्र मतदाताओं को एक नया कार्यक्रम और स्पष्ट दिशानिर्देश प्रदान किए जाने चाहिए, जो नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले पूरे किए जाएं।
वहीं, कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को 200 न्यायिक अधिकारियों की मांग की है, जिनमें 100-100 अधिकारी ओडिशा और झारखंड हाईकोर्ट से होंगे। यह अधिकारी उन न्यायिक अधिकारियों की टीम में शामिल किए जाएंगे, जिन्हें 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' के अंतर्गत पहचाने गए मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच और निर्णय लेने के लिए पहले से नियुक्त किया गया है।