अमेरिकी अदालतों ने भारतीय डिटेनों को दी बड़ी राहत: बॉंड सुनवाई का आदेश
सारांश
Key Takeaways
- अमेरिकी अदालतों ने कई भारतीय नागरिकों को राहत दी है।
- बॉंड सुनवाई या तत्काल रिहाई का आदेश दिया गया है।
- न्यायाधीशों ने इमिग्रेशन अधिकारियों की प्रक्रिया में खामियों को उजागर किया है।
- सरकार को ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे।
- सभी बंदियों को राहत नहीं मिली है।
वाशिंगटन, २७ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। इस सप्ताह अमेरिका की कई अदालतों ने इमिग्रेशन डिटेंशन में बंद कुछ भारतीय नागरिकों को बॉन्ड सुनवाई या तत्काल रिहाई का आदेश दिया है। ये निर्णय कैलिफोर्निया, मिशिगन, न्यूयॉर्क और ओक्लाहोमा की जिला अदालतों से आए हैं। न्यायाधीशों ने कहा कि इमिग्रेशन अधिकारियों ने या तो गलत डिटेंशन कानून लागू किया या पर्याप्त विधिक प्रक्रिया (ड्यू प्रोसेस) का पालन नहीं किया।
कैलिफोर्निया में सैन डिएगो अदालत ने हरबीत सिंह की ओर से दायर याचिका को मंजूर करते हुए कहा कि सात दिनों के भीतर व्यक्तिगत बॉंड सुनवाई कराई जाए। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि बिना बॉंड सुनवाई के लंबी हिरासत अनुचित है और यह विधिक प्रक्रिया का उल्लंघन है। सरकार को यह साबित करना होगा कि व्यक्ति फरार होने का खतरा या समुदाय के लिए खतरा है।
मिशिगन में वेस्टर्न डिस्ट्रिक्ट की एक अदालत ने सागर राम को सशर्त राहत दी। अदालत ने आदेश दिया कि पांच कार्यदिवसों के भीतर धारा 1226(ए) के तहत बॉंड सुनवाई कराई जाए या तत्काल रिहाई की जाए। न्यायाधीश ने सरकार के इस दावे को खारिज कर दिया कि आवश्यक डिटेंशन लागू है।
ओक्लाहोमा में, एक अदालत ने करनदीप सिंह के मामले में समान फैसला दिया। न्यायाधीश ने कहा कि उनकी हिरासत धारा 1226(ए) के अंतर्गत आती है, जो बॉंड की अनुमति देती है, न कि धारा 1225(बी)(२) के अनिवार्य हिरासत प्रावधान के तहत। अदालत ने तुरंत बॉंड सुनवाई का आदेश दिया।
न्यूयॉर्क में, ब्रुकलिन की अदालत ने हरमनप्रीत सिंह को हैबियस राहत प्रदान की और नई बॉंड सुनवाई का आदेश दिया। इसके साथ ही, सरकार को स्पष्ट और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करना होगा कि उसके भागने का खतरा है या वह समुदाय के लिए खतरा है। न्यायाधीश ने कहा कि उचित सुरक्षा उपायों के बिना निरंतर हिरासत ५वें संशोधन का उल्लंघन है।
कैलिफोर्निया के एक अन्य मामले में अदालत ने भवानदीप सिंह ढालीवाल की तत्काल रिहाई का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि उन्हें हिरासत से तुरंत रिहा किया जाए और अधिकारियों को बिना कानूनी प्रक्रिया के फिर से गिरफ्तार करने से रोका।
सैन डिएगो के एक अलग मामले में अदालत ने आदेश दिया कि विक्रांत सिंह को उसकी पिछली रिहाई की शर्तों के तहत इमिग्रेशन कस्टडी से तुरंत रिहा किया जाए।
हालांकि, सभी बंदियों को राहत नहीं मिली।
मिशिगन में कोर्ट ने गुरप्रीत वालिया सिंह की ओर से दायर हैबियस याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि उन्हें पहले ही हिरासत की पुनर्समीक्षा (रीडिटरमिनेशन) मिल चुकी थी। न्यायाधीश ने फैसला दिया कि उनकी हिरासत कानून या संविधान का उल्लंघन नहीं करती।
ओक्लाहोमा की कोर्ट ने एक मजिस्ट्रेट जज की सिफारिश को अपनाया और बॉंड न दिए जाने को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।