क्या जेएनयू विवाद पर जफर इस्लाम ने कहा कि देश तोड़ने वाली सोच को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता?
सारांश
Key Takeaways
- जफर इस्लाम ने जेएनयू में विवादास्पद टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।
- देश को तोड़ने वाली सोच का विरोध आवश्यक है।
- सुप्रीम कोर्ट का निर्णय स्पष्ट है कि ऐसे विचारों को सहन नहीं किया जाएगा।
नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जेएनयू में पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई विवादास्पद टिप्पणी पर भाजपा नेताओं ने तीखी निंदा की है। भाजपा नेता जफर इस्लाम ने कहा कि ऐसी विचारधारा का कड़ा प्रतिरोध होना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस से संवाद करते हुए जफर इस्लाम ने बताया कि दिल्ली दंगे के मामलों में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय स्पष्ट है कि देश को तोड़ने वाली सोच को सहन नहीं किया जा सकता। यदि इस प्रकार का विरोध होता है, तो यह स्पष्ट है कि जेएनयू में किस प्रकार की मानसिकता विकसित हो रही है, और जनता भी इसका विरोध कर रही है।
उन्होंने आगे कहा कि चाहे कांग्रेस हो, समाजवादी पार्टी या अन्य विपक्षी दल, ये सभी कसाब और अफजल गुरु के साथ खड़े थे। सभी को पता है कि उनकी सोच क्या है। ये केवल वोट की राजनीति करते हैं और देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर सकते हैं।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एसआईआर पर विरोध पर उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को हार का डर सताता है। फर्जी वोटरों के माध्यम से जीतने वाली ममता बनर्जी को चिंता है कि अगर ये वोटर नहीं रहे तो वे कैसे जीतेंगी? ममता बनर्जी कितनी भी लड़ाई कर लें, एसआईआर लागू होगा और वोटर लिस्ट का शुद्धिकरण होगा।
भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने कहा कि जेएनयू में लगाए जा रहे नारे एक शहरी-नक्सलवाद विचारधारा के हैं, जिसे राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी समर्थन देती है। यह वही विचारधारा है जिसे बौद्धिक आतंकवाद में परिवर्तित किया जा रहा है। उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में कांग्रेस के नेता आए। जेएनयू में मोदी और अमित शाह के खिलाफ विवादित टिप्पणियां की गईं, जिसका कांग्रेस समर्थन कर रही है। यही कारण है कि चुनावों में जनता बार-बार कांग्रेस को विपक्ष में बैठाती है।
भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि देशविरोधी ताकतें कितनी भी कोशिश कर लें, भारत में भारतीयता और राष्ट्रवाद ही विजयी होगा। जिन लोगों ने देश को टुकड़ों में बांटने की साजिश की, खासकर जेएनयू से जुड़े कुछ तत्वों ने, उन्होंने ऐसी गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को किसी भी प्रकार की जमानत याचिका दायर करने पर एक वर्ष का बैन लगा दिया, जो स्पष्ट दर्शाता है कि देशविरोधी गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को भारतीय कानून के तहत सजा अवश्य मिलेगी।