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क्या जेएनयू कैंपस में आपत्तिजनक नारे लगाने वाले छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी?

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क्या जेएनयू कैंपस में आपत्तिजनक नारे लगाने वाले छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी?

सारांश

क्या जेएनयू के छात्रों द्वारा लगाए गए आपत्तिजनक नारों के चलते एफआईआर दर्ज होगी? जानें इस विवाद की पूरी कहानी और इसके पीछे के कारण।

मुख्य बातें

जेएनयू में आपत्तिजनक नारेबाजी का मामला उठाया गया।
मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने दिल्ली पुलिस को पत्र लिखा।
यह घटना सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद हुई।
छात्रों ने सरकार विरोधी नारे लगाए।
एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।

नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के मुख्य सुरक्षा अधिकारी (सीएसओ) नवीन यादव ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस को एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ लगाए गए आपत्तिजनक नारों के संबंध में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

सोमवार को कई लेफ्ट-विंग छात्र संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के विरोध में नारेबाजी की। यह नारेबाजी ‘गुरिल्ला ढाबा’ नाम से आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई, जिसका उद्देश्य जनवरी 2020 में हुए हमले की छठी बरसी को मनाना था।

सीएसओ द्वारा वसंत कुंज थाने के थानाध्यक्ष को भेजे गए पत्र में बताया गया कि यह कार्यक्रम साबरमती छात्रावास के बाहर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का नाम ‘गुरिल्ला ढाबा के साथ प्रतिरोध की रात’ रखा गया था।

उन्होंने कहा, "शुरुआत में, भीड़ उस बरसी को मनाने तक सीमित लग रही थी। वहां लगभग 30-35 छात्र उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान पहचाने गए प्रमुख छात्रों में अदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद आजमी, महबूब इलाही, कनिष्क, पाकीजा खान, शुभम और अन्य शामिल थे।"

हालांकि, उन्होंने बताया कि जैसे ही घटना के दौरान पता चला कि सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों में जेएनयू के पूर्व छात्रों उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं, तब भीड़ का रुख और लहजा बदल गया।

सीएसओ ने कहा, "कुछ छात्रों ने बहुत आपत्तिजनक, भड़काऊ और उत्तेजक नारे लगाने शुरू कर दिए। यह भारत की सर्वोच्च अदालत की सीधी अवमानना है। ऐसे नारे लगाना लोकतांत्रिक विरोध के बिल्कुल विपरीत है और जेएनयू आचार संहिता का उल्लंघन करता है।"

उन्होंने कहा, "लगाए गए नारे 'स्पष्ट रूप से सुनाई दे रहे थे,' जो किसी 'सहज या अनजाने में अभिव्यक्ति' के बजाय 'जानबूझकर और सचेत दुराचार' का संकेत देते हैं।"

सीएसओ ने आगे बताया कि घटना के समय सुरक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद थे। सुरक्षा कर्मियों में इंस्पेक्टर (एसएसएस) गोरखनाथ, सुपरवाइजर विशाल कुमार और सुरक्षा गार्ड जय कुमार मीना और पूजा शामिल थे।

उन्होंने पत्र में आगे पुलिस से बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने का आग्रह किया। यह घटना सोमवार शाम को हुई, जब सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों में जेएनयू के पूर्व छात्रों को जमानत देने से इनकार कर दिया।

डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) से जुड़े लगभग 30 से 40 छात्रों ने कैंपस में सरकार विरोधी नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समाज में विभाजन भी उत्पन्न कर सकती हैं। हमें चाहिए कि हम संवाद और सहिष्णुता को बढ़ावा दें।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएनयू में कौन से नारे लगाए गए?
छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए।
क्या एफआईआर दर्ज होगी?
मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने दिल्ली पुलिस को एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
इस घटना का उद्देश्य क्या था?
यह घटना 2020 में हुए हमले की छठी बरसी को मनाने के लिए आयोजित की गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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