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क्या जेएनयू में विवादित नारों के लिए आलोक कुमार ने की कड़ी निंदा?

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क्या जेएनयू में विवादित नारों के लिए आलोक कुमार ने की कड़ी निंदा?

सारांश

विश्व हिंदू परिषद के आलोक कुमार ने जेएनयू में भड़काऊ नारों की निंदा की, जिससे विश्वविद्यालय की पवित्रता पर प्रश्नचिन्ह लगा। क्या यह घटना फिर से शिक्षा संस्थानों में विवाद को जन्म देगी?

मुख्य बातें

आलोक कुमार ने जेएनयू में विवादित नारों की निंदा की।
यह घटना 2020 दिल्ली दंगों के संदर्भ में है।
उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न मिलने का विरोध किया गया।
विश्व हिंदू परिषद ने शिक्षा संस्थानों में ऐसे नारों को खतरा बताया।
जांच और कार्रवाई की उम्मीद की गई है।

नई दिल्ली, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं को निशाना बनाते हुए आपत्तिजनक नारों की कड़ी निंदा की है।

उन्होंने कहा कि जेएनयू की पवित्रता फिर से इन नारों से खराब की गई है। यह घटना 5 जनवरी 2026 की रात हुई, जब कुछ छात्रों ने 2020 दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत न मिलने के विरोध में प्रदर्शन किया था।

आलोक कुमार ने अपने बयान में कहा कि इस बार उकसावे की वजह उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न मिलना था। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि अभियोजन के पास दोनों के खिलाफ दंगों में शामिल होने के सीधे सबूत हैं। कोर्ट ने 2020 में हिंदुओं पर हुए हमलों के बड़े षड्यंत्र में उनकी मुख्य भूमिका पर भी टिप्पणी की थी। दोनों पर देश की एकता और अखंडता के खिलाफ साजिश रचने का आरोप है, जो गंभीर अपराध है। सभी को ट्रायल का इंतजार करना चाहिए, जहां आरोपी अपनी बेगुनाही साबित कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि मुट्ठी भर लोगों ने धैर्य रखने की बजाय आधी रात को कैंपस का माहौल बिगाड़ने की हिम्मत दिखाई। यह शर्मनाक और कायरता भरा कदम है। यूनिवर्सिटी ने एफआईआर दर्ज कराई है और जांच होनी चाहिए। दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी मनमानी का लाइसेंस नहीं है। ऐसे नारे जो कब्र खुदवाने की बात करते हैं अभद्र और आपराधिक हैं।

आलोक कुमार ने आगे कहा कि ये नारे देशवासियों को आंतरिक खतरों की याद दिलाते हैं। हमें हमेशा सतर्क रहना होगा क्योंकि आजादी की कीमत यही है।

बता दें कि यह घटना जेएनयू में पुराने विवादों को फिर से जीवित करती है जहां पहले भी ऐसे नारे लग चुके हैं।

वहीं, विश्व हिंदू परिषद का मानना है कि शिक्षा संस्थानों में ऐसी गतिविधियां लोकतंत्र के लिए खतरा हैं और इन्हें रोकना जरूरी है। इस मामले में पुलिस जांच और सख्त कार्रवाई की उम्मीद है ताकि कैंपस की शांति बनी रहे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएनयू में विवादित नारे क्यों लगाए गए?
छात्रों ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न मिलने के विरोध में ये नारे लगाए।
आलोक कुमार ने इस पर क्या कहा?
आलोक कुमार ने इसे शर्मनाक और कायरता भरा कदम बताया और कहा कि इसे रोकना चाहिए।
क्या विश्वविद्यालय ने कोई कार्रवाई की है?
हाँ, विश्वविद्यालय ने एफआईआर दर्ज कराई है और जांच की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है।
इन नारों का लोकतंत्र पर क्या प्रभाव है?
ये नारे लोकतंत्र की मूल्यों को चुनौती देते हैं और असहमति की स्थिति को बढ़ाते हैं।
क्या इस घटना के बाद पुलिस कार्रवाई की उम्मीद है?
हाँ, विश्व हिंदू परिषद ने पुलिस जांच और सख्त कार्रवाई की उम्मीद जताई है।
राष्ट्र प्रेस
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