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क्या जेएनयू कैंपस में देशविरोधी नारे लगाना निंदनीय नहीं है?: आशीष सूद

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क्या जेएनयू कैंपस में देशविरोधी नारे लगाना निंदनीय नहीं है?: आशीष सूद

सारांश

नए साल की शुरुआत में जेएनयू कैंपस में देशविरोधी नारे लगाने की घटना को लेकर गृह मंत्री आशीष सूद ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन देश को तोड़ने की कोशिशों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।

मुख्य बातें

लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है।
देशद्रोह की गतिविधियों की कड़ी निंदा होनी चाहिए।
राजनीतिक संरक्षण ऐसे तत्वों को बढ़ावा देता है।
जेएनयू में ऐसी घटनाएँ चिंताजनक हैं।
एकजुटता से ही हम अपने देश की रक्षा कर सकते हैं।

नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत खारिज होने के बाद जेएनयू परिसर में देशविरोधी नारे लगाना अत्यंत निंदनीय है। लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन हिंसा, उकसावे और व्यक्तिगत या वैचारिक हिंसा की राजनीति के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता। यह बयान दिल्ली सरकार के गृह मंत्री आशीष सूद ने दिया है।

आशीष सूद ने कहा कि हम लोकतंत्र में असहमति पर सहमत हो सकते हैं। आप शिक्षा नीति पर चर्चा कीजिए, वित्तीय नीतियों पर बहस कीजिए, अन्य जनहित के मुद्दों पर संवाद कीजिए, लेकिन जो लोग देश को तोड़ने की साजिश करते हैं, उनके प्रति कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि शरजील इमाम वही व्यक्ति है जिसने ‘चिकन नेक’ काटकर पूर्वोत्तर भारत को देश से अलग करने की बात कही थी। देशविरोधी नारे लगाने वालों में उमर खालिद का नाम सामने आया है। 2020 के दंगों में भी उसकी भूमिका पाई गई है।

दुर्भाग्य यह है कि ऐसे तत्वों को राजनीतिक संरक्षण इसलिए मिलता है क्योंकि इस विधानसभा में ऐसे लोग मौजूद हैं जिन्होंने शरजील इमाम के साथ मंच साझा किया है। इंडी अलायंस में शामिल कई नेताओं ने कन्हैया कुमार के साथ मिलकर चुनाव लड़ा है।

जब इस प्रकार के लोगों को संरक्षण और वैचारिक समर्थन दिया जाता है, तब जेएनयू जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में गैर-जिम्मेदार और राष्ट्रविरोधी तत्व सिर उठाते हैं। जेएनयू में जो कुछ हुआ, शरजील इमाम और उमर खालिद के समर्थन में नारे लगाना, यह न केवल निंदनीय है, बल्कि देश के खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि मैं इसे स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता हूं कि इस प्रकार की गतिविधियां देशद्रोह की श्रेणी में आती हैं और इसकी मैं कड़े शब्दों में निंदा करता हूं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब यह देश के खिलाफ जाती है, तो इसे रोकना आवश्यक है। जेएनयू जैसे संस्थानों में ऐसी घटनाएँ चिंताजनक हैं और हमें एकजुट होकर अपने देश की रक्षा करनी चाहिए।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएनयू में देशविरोधी नारे क्यों लगाए गए?
जेएनयू में कुछ छात्रों ने शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत खारिज होने के बाद देशविरोधी नारे लगाए, जो कि निंदनीय है।
आशीष सूद ने इस घटना पर क्या कहा?
आशीष सूद ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन देश को तोड़ने की कोशिशों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।
राष्ट्र प्रेस
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