क्या जेएनयू के नारे लगाने वाले छात्रों से हॉस्टल सुविधा वापस ली जानी चाहिए?: ध्रुव कटोच
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली दंगों की जमानत याचिकाएं खारिज होना
- ध्रुव कटोच का बयान
- जमानत न मिलने से लोकतंत्र मजबूत होगा
- जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाना गलत है
- सख्त कार्रवाई की आवश्यकता
नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली दंगों से जुड़े उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने पर मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) ध्रुव कटोच ने कहा कि यह कोर्ट का फैसला पूर्णतः सही है। उन्हें जमानत नहीं मिलनी चाहिए थी, जिससे भारत का लोकतंत्र और मजबूत होगा।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में ध्रुव कटोच ने कहा कि जब कोर्ट कोई निर्णय लेती है, तो वह केस के मेरिट पर आधारित होता है। निश्चित रूप से कुछ ठोस कारण रहे होंगे। अदालत के समक्ष प्रस्तुत सबूतों के आधार पर जमानत देने से इनकार किया गया है। कोर्ट के निर्णय सोच-समझकर किए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में दंगे हुए हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है। यह पूरी तरह से योजनाबद्ध थे, जिसका उद्देश्य भारत को अस्थिर करना था। जो सबूत कोर्ट के सामने प्रस्तुत किए गए, उनके आधार पर जमानत नहीं दी गई है। मुझे लगता है कि अदालत ने जमानत न देकर एक बहुत अच्छा कदम उठाया है, जिससे भारत का लोकतंत्र मजबूत होगा।
जेएनयू परिसर में हुई नारेबाजी पर उन्होंने कहा कि जेएनयू एक प्रसिद्ध विश्वविद्यालय है, जहां हजारों छात्र अध्ययन करते हैं, लेकिन इनमें 50 से 100 छात्र ऐसे हैं जो देशविरोधी नारे लगाते हैं। विदेशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मैंने अन्य लोकतंत्रों में भी देखा है जहां इस तरह के नारे लगाए जाते हैं, लेकिन भारत की सुरक्षा पर कोई सवाल नहीं उठाता। भारत में कुछ छात्र देशविरोधी नारे लगाते हैं। सवाल यह है कि इस तरह के नारे लगाने के लिए इन छात्रों को कौन प्रेरित करता है? इसके पीछे कौन है? इन्हें ऐसा करने के लिए कौन वित्तीय सहायता दे रहा है? ये विदेशी या अंदर की ताकतों के प्रभाव में हैं।
उन्होंने आगे कहा कि छात्र करदाताछात्रावास की सुविधा वापस ले ली जानी चाहिए। दिल्ली पुलिस को पूरे मामले की जांच करनी चाहिए और देशहित के खिलाफ लगाए गए नारों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। अगर कोई बात सही नहीं है तो छात्रों को प्रदर्शन करने का हक है, लेकिन इस प्रकार के नारे नहीं लगाने चाहिए। दुनिया में कहीं भी इस तरह के नारे नहीं लगाए जाते हैं।
जेएनयू प्रशासन द्वारा लिखी गई चिट्ठी पर उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसी घटनाएं होती थीं। जब कार्रवाई होती है तो छात्र बहाने बनाते हैं। जब तक सख्त कार्रवाई नहीं होगी, इस तरह के नारे लगते रहेंगे।