25 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या जेएनयू के नारे लगाने वाले छात्रों से हॉस्टल सुविधा वापस ली जानी चाहिए?: ध्रुव कटोच

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या जेएनयू के नारे लगाने वाले छात्रों से हॉस्टल सुविधा वापस ली जानी चाहिए?: ध्रुव कटोच

सारांश

क्या जेएनयू के छात्रों द्वारा लगाए गए देशविरोधी नारों को नजरअंदाज किया जाना चाहिए? मेजर जनरल (रिटायर्ड) ध्रुव कटोच का मानना है कि ऐसे छात्रों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। जानिए उनका क्या कहना है।

मुख्य बातें

दिल्ली दंगों की जमानत याचिकाएं खारिज होना ध्रुव कटोच का बयान जमानत न मिलने से लोकतंत्र मजबूत होगा जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाना गलत है सख्त कार्रवाई की आवश्यकता

नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली दंगों से जुड़े उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने पर मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) ध्रुव कटोच ने कहा कि यह कोर्ट का फैसला पूर्णतः सही है। उन्हें जमानत नहीं मिलनी चाहिए थी, जिससे भारत का लोकतंत्र और मजबूत होगा।

राष्ट्र प्रेस से बातचीत में ध्रुव कटोच ने कहा कि जब कोर्ट कोई निर्णय लेती है, तो वह केस के मेरिट पर आधारित होता है। निश्चित रूप से कुछ ठोस कारण रहे होंगे। अदालत के समक्ष प्रस्तुत सबूतों के आधार पर जमानत देने से इनकार किया गया है। कोर्ट के निर्णय सोच-समझकर किए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में दंगे हुए हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है। यह पूरी तरह से योजनाबद्ध थे, जिसका उद्देश्य भारत को अस्थिर करना था। जो सबूत कोर्ट के सामने प्रस्तुत किए गए, उनके आधार पर जमानत नहीं दी गई है। मुझे लगता है कि अदालत ने जमानत न देकर एक बहुत अच्छा कदम उठाया है, जिससे भारत का लोकतंत्र मजबूत होगा।

जेएनयू परिसर में हुई नारेबाजी पर उन्होंने कहा कि जेएनयू एक प्रसिद्ध विश्वविद्यालय है, जहां हजारों छात्र अध्ययन करते हैं, लेकिन इनमें 50 से 100 छात्र ऐसे हैं जो देशविरोधी नारे लगाते हैं। विदेशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मैंने अन्य लोकतंत्रों में भी देखा है जहां इस तरह के नारे लगाए जाते हैं, लेकिन भारत की सुरक्षा पर कोई सवाल नहीं उठाता। भारत में कुछ छात्र देशविरोधी नारे लगाते हैं। सवाल यह है कि इस तरह के नारे लगाने के लिए इन छात्रों को कौन प्रेरित करता है? इसके पीछे कौन है? इन्हें ऐसा करने के लिए कौन वित्तीय सहायता दे रहा है? ये विदेशी या अंदर की ताकतों के प्रभाव में हैं।

उन्होंने आगे कहा कि छात्र करदाताछात्रावास की सुविधा वापस ले ली जानी चाहिए। दिल्ली पुलिस को पूरे मामले की जांच करनी चाहिए और देशहित के खिलाफ लगाए गए नारों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। अगर कोई बात सही नहीं है तो छात्रों को प्रदर्शन करने का हक है, लेकिन इस प्रकार के नारे नहीं लगाने चाहिए। दुनिया में कहीं भी इस तरह के नारे नहीं लगाए जाते हैं।

जेएनयू प्रशासन द्वारा लिखी गई चिट्ठी पर उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसी घटनाएं होती थीं। जब कार्रवाई होती है तो छात्र बहाने बनाते हैं। जब तक सख्त कार्रवाई नहीं होगी, इस तरह के नारे लगते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

मैं मानता हूँ कि छात्रों के लिए यह आवश्यक है कि वे अपने विचारों को व्यक्त करें, लेकिन यह भी जरूरी है कि वे अपने शब्दों के प्रति जिम्मेदार रहें। देश की एकता और अखंडता के लिए हमें सभी आवाजों का सम्मान करना चाहिए, बशर्ते वे हमारे संविधान और कानून के अनुरूप हों।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएनयू में लगे देशविरोधी नारे किसने लगाए?
जेएनयू में कुछ छात्रों ने देशविरोधी नारे लगाए, जिनकी संख्या 50 से 100 के बीच मानी जा रही है।
ध्रुव कटोच ने इस मामले पर क्या कहा?
ध्रुव कटोच ने कहा कि ऐसे छात्रों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें हॉस्टल की सुविधा वापस ले ली जानी चाहिए।
क्या कोर्ट ने सही फैसला किया?
ध्रुव कटोच के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही है और इससे भारत का लोकतंत्र मजबूत होगा।
छात्रों को प्रदर्शन करने का अधिकार है?
हां, छात्रों को प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन उन्हें देशविरोधी नारे नहीं लगाने चाहिए।
क्या जेएनयू प्रशासन ने इस पर कोई कार्रवाई की है?
जेएनयू प्रशासन द्वारा पहले भी इस तरह की घटनाओं पर कार्रवाई की गई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 महीने पहले
  2. 6 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले