तमिलनाडु में उपराष्ट्रपति ने आईआईएचटी सलेम के नए शैक्षणिक ब्लॉक का उद्घाटन किया, हैंडलूम विरासत की मजबूती पर ध्यान केंद्रित
सारांश
Key Takeaways
सलेम, २७ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को तमिलनाडु के सलेम में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हैंडलूम टेक्नोलॉजी (आईआईएचटी) के नए शैक्षणिक ब्लॉक का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत की समृद्ध हैंडलूम परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने में आईआईएचटी की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की और कहा कि यह संस्थान पारंपरिक कारीगरी को वैश्विक बाजार के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण सेतु का काम कर रहा है।
उद्घाटन समारोह में उपराष्ट्रपति ने सलेम के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व को उजागर किया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सलेम का राष्ट्रीय नेता थिरु सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) से गहरा संबंध है, जिन्होंने यहीं से अपने कानूनी करियर की शुरुआत की और सलेम म्युनिसिपैलिटी के चेयरमैन के रूप में कार्य किया। उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन में राजाजी के नए बस्ट के उद्घाटन का भी उल्लेख किया, जिसे एडवर्ड लुटियंस के बस्ट की जगह स्थापित किया गया है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आईआईएचटी सलेम पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक टेक्सटाइल विज्ञान को मिलाकर उत्पादकता बढ़ा रहा है, गुणवत्ता में सुधार कर रहा है और हाथ से बुने कपड़ों की मौलिक पहचान को बनाए रखते हुए बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन संभव बना रहा है। उन्होंने भारत की विविध हैंडलूम विरासत का उल्लेख करते हुए वाराणसी के सिल्क ब्रोकेड, बंगाल की जामदानी, असम का मूगा सिल्क, कश्मीर की कानी शॉल, आंध्र प्रदेश की वेंकटगिरी और मंगलगिरी बुनाई तथा मध्य प्रदेश की माहेश्वरी और चंदेरी साड़ियों का उदाहरण दिया।
तमिलनाडु की बुनाई परंपराओं पर विशेष जोर देते हुए, उन्होंने चेट्टिनाडु कंडांगी साड़ियां, कांचीपुरम सिल्क, अरानी सिल्क, थिरुबुवनम सिल्क, चेन्नीमलाई कंबल, नागरकोइल वेश्ती-तौलिए, और मदुरै सुंगुडी साड़ियों का उल्लेख किया।
उपराष्ट्रपति ने इंडिया-यूरोपीय यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) के संदर्भ में कहा कि इससे टेक्सटाइल उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की केंद्रित कोशिशों से यह संभव हो रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सलेम से यूरोपीय संघ को टेक्सटाइल निर्यात में बड़ी बढ़ोतरी होगी और अंबुर से लेदर निर्यात भी तेजी से बढ़ेगा।
अंत में उपराष्ट्रपति ने अपील की कि आईआईएचटी सलेम हैंडलूम क्षेत्र को भविष्य की क्रिएटिव इंडस्ट्री में बदलने में अहम भूमिका निभाए, जो मूल्य सृजन करे, कारीगरों की मेहनत की इज्जत बनाए रखे और देश भर के बुनकरों के लिए टिकाऊ रोजगार सुनिश्चित करे।
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने आईआईएचटी परिसर में एक प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया, जहां भारत के विभिन्न हैंडलूम उत्पाद प्रदर्शित किए गए थे। इस अवसर पर केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, तमिलनाडु सरकार के पर्यटन मंत्री आर. राजेन्द्रन सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
यह उद्घाटन भारत की हैंडलूम विरासत को संरक्षित करते हुए आधुनिकता से जोड़ने और वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आईआईएचटी जैसे संस्थान न केवल तकनीकी उन्नति ला रहे हैं, बल्कि लाखों कारीगर परिवारों की आजीविका को भी मजबूत कर रहे हैं।