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क्या जेएनयू में नारेबाजी के पीछे छिपी है राजनीति में हिंसा की प्रवृत्ति?

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क्या जेएनयू में नारेबाजी के पीछे छिपी है राजनीति में हिंसा की प्रवृत्ति?

सारांश

जेएनयू में नारेबाजी के मुद्दे पर दिल्ली सरकार के मंत्रियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। आशीष सूद ने कहा कि राजनीति में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। क्या यह राजनीतिक असहमति का एक नया चेहरा है? जानिए इस विवाद की गहराई।

मुख्य बातें

राजनीति में हिंसा का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है।
शिक्षा नीति पर चर्चा आवश्यक है।
नारेबाजी के पीछे का कारण राजनीतिक असहमति है।
राजनेताओं को अपने कार्यों के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए।

नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में सोमवार रात हुई नारेबाजी को लेकर दिल्ली सरकार के मंत्रियों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मंत्री आशीष सूद ने स्पष्ट रूप से कहा कि राजनीति में हिंसा या व्यक्तिगत हिंसक कृत्यों के लिए कोई स्थान नहीं है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से संबंधित नीतियों पर बहस संभव है। लोकतंत्र में असहमति सामान्य है। शिक्षा नीति, वित्त और अन्य मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन जो लोग देश को तोड़ने का प्रयास करते हैं, उनके लिए कोई स्थान नहीं है।

आशीष सूद ने तंज करते हुए कहा कि दिल्ली विधानसभा में ऐसे लोग भी मौजूद हैं, जिन्होंने शरजील इमाम के साथ मंच साझा किया है।

जेएनयू में नारेबाजी को लेकर मंत्री कपिल मिश्रा ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने न्यूज एजेंसी राष्ट्र प्रेस से कहा, "सांपों के फन कुचले जा रहे हैं, सपोले बिलबिला रहे हैं।"

कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया कि ऐसे लोग आतंकवादियों, नक्सलियों और दंगाइयों के समर्थन में नारे लगाते हैं। अब इन्हें यह समझ आ गया है कि जहां-जहां नक्सली सक्रिय थे, वहां उनका खात्मा किया जा रहा है। इसी कारण उनकी बौखलाहट सामने आ रही है।

इसके अलावा, दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन आम आदमी पार्टी द्वारा विधानसभा परिसर में प्रदूषण के खिलाफ किए गए प्रदर्शन पर भी कपिल मिश्रा ने तीखा हमला बोला।

उन्होंने कहा कि 'आप' के नेता अपना चेहरा दिखाने की स्थिति में नहीं हैं और इसलिए उन्हें मुंह छिपाना पड़ रहा है। 12 साल तक दिल्ली में उनकी सरकार रही और पिछले साल इसी समय आतिशी दिल्ली की मुख्यमंत्री थीं। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि आज वही लोग मुंह छुपाकर घूम रहे हैं, क्योंकि उन्होंने जनता को दिखाने लायक कोई काम नहीं किया। अगर 12 साल में सही तरीके से कार्य किया होता, तो आज इस तरह चेहरा छुपाने की नौबत नहीं आती। इन बयानों के बाद राजधानी की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन हिंसा का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। यह महत्वपूर्ण है कि हम लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करें और अपने विचारों को शांति से व्यक्त करें।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएनयू में नारेबाजी का कारण क्या था?
जेएनयू में नारेबाजी का कारण विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर असहमति है, जिसमें शिक्षा नीति और देश की सुरक्षा शामिल हैं।
क्या आशीष सूद का बयान महत्वपूर्ण है?
हाँ, आशीष सूद का बयान राजनीति में हिंसा के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश है।
कपिल मिश्रा ने नारेबाजी पर क्या कहा?
कपिल मिश्रा ने नारेबाजी को आतंकवादियों और नक्सलियों के समर्थन में बताया।
राष्ट्र प्रेस
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