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क्या जेएनयू में सांपों के फन कुचले जा रहे हैं और सपोले बिलबिला रहे हैं?

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क्या जेएनयू में सांपों के फन कुचले जा रहे हैं और सपोले बिलबिला रहे हैं?

सारांश

दिल्ली के जेएनयू में नारेबाजी के मुद्दे पर कपिल मिश्रा ने आम आदमी पार्टी और वामपंथियों पर तीखा हमला किया है। उनकी टिप्पणियों में नक्सलियों और आतंकियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदर्भ दिया गया है। क्या यह हताशा का परिणाम है?

मुख्य बातें

कपिल मिश्रा ने जेएनयू में नारेबाजी पर हमला बोला।
नक्सलियों और आतंकियों पर सख्त कार्रवाई हो रही है।
कपिल मिश्रा ने हताशा का जिक्र किया।

नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में नारेबाजी को लेकर दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने आम आदमी पार्टी और वामपंथी संगठनों पर तीखा हमला किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के माध्यम से उन्होंने कहा कि जेएनयू में नक्सलियों, आतंकियों और दंगाइयों के समर्थन में नारे लगाने वाले लोग हताश हैं। इसका कारण यह है कि नक्सलियों का खात्मा हो रहा है, आतंकियों पर सख्त कार्रवाई हो रही है, और दंगाइयों की पहचान अदालत कर चुकी है।

कपिल मिश्रा ने अपने पोस्ट में लिखा, "सांपों के फन कुचले जा रहे हैं, सपोले बिलबिला रहे हैं. जेएनयू में नक्सलियों, आतंकियों, और दंगाइयों के समर्थन में भद्दे नारे लगाने वाले हताश हैं क्योंकि नक्सली खत्म किए जा रहे हैं, आतंकी निपटाए जा रहे हैं, और दंगाइयों को कोर्ट पहचान चुका है।"

एक अन्य 'एक्स' पोस्ट में कपिल मिश्रा ने एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि नक्सली भी मारे जाएंगे और आतंकी भी। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ जेएनयू में की जा रही नारेबाजी से कोई लाभ नहीं होने वाला है।

जेएनयू परिसर में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी पर प्रतिक्रिया देते हुए कपिल मिश्रा ने कहा कि कुछ लोग देश, धर्म और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के खिलाफ नारे लगाते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग अफजल गुरु, आतंकियों और नक्सलियों के समर्थन में आवाज उठाते रहे हैं। नक्सलियों और आतंकियों का सफाया किया जा रहा है और दिल्ली में हिंसा फैलाने वालों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ चुका है, इसलिए यह सब उनकी हताशा का नतीजा है।

इससे पहले सोमवार को भी कपिल मिश्रा ने दिल्ली दंगों से जुड़े मामले पर बयान दिया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने पर कहा था कि यह फैसला एक बार फिर साबित करता है कि दिल्ली दंगे एक सोची-समझी साजिश थे।

कपिल मिश्रा ने कहा था कि पूरे देश ने देखा है कि किस तरह से दिल्ली दंगे में शामिल आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण दिया गया और किस तरह से वकीलों की एक बड़ी जमात उनके पक्ष में खड़ी कर दी गई। ये लोग इन आरोपियों को बचाने के लिए कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा रहे थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत पर रोक लगा दी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी दिखाया है कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच टकराव जारी है। यह एक ऐसी स्थिति है जहां न केवल छात्रों की आवाज़ें, बल्कि देश की सुरक्षा और न्याय भी महत्वपूर्ण हैं।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कपिल मिश्रा ने जेएनयू में नारेबाजी पर क्या कहा?
कपिल मिश्रा ने कहा कि जेएनयू में नक्सलियों और आतंकियों के समर्थन में नारे लगाने वाले लोग हताश हैं क्योंकि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो रही है।
क्या कपिल मिश्रा का आरोप सही है?
कपिल मिश्रा का आरोप है कि जेएनयू में नारेबाजी करने वाले लोग नक्सलियों और आतंकियों का समर्थन करते हैं, जो एक विवादास्पद मुद्दा है।
जेएनयू में हो रहे नारेबाजी का क्या महत्व है?
यह नारेबाजी न केवल राजनीतिक विचारधाराओं का प्रतिनिधित्व करती है, बल्कि यह छात्र आंदोलन और स्वतंत्रता की आवाज को भी दर्शाती है।
राष्ट्र प्रेस
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