25 अक्टूबर 2026
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सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट: CM पेमा खांडू ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, गलत जानकारी पर जताई चिंता

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सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट: CM पेमा खांडू ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, गलत जानकारी पर जताई चिंता

सारांश

चीन के यारलुंग त्सांगपो बाँध की आशंकाओं के बीच अरुणाचल के CM पेमा खांडू ने सियांग प्रोजेक्ट पर सर्वदलीय बैठक बुलाकर सहमति बनाने की कोशिश की। गलत जानकारी से फैले भ्रम को दूर करने के लिए AITF और स्थानीय संगठनों से भी संवाद शुरू हुआ।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने 25 अक्टूबर 2026 को ईटानगर में सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट की पीएफआर पर सर्वदलीय बैठक आयोजित की।
बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा , पर्यावरणीय चिंताओं और स्थानीय लोगों की आकांक्षाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने प्रोजेक्ट को लेकर फैली गलत जानकारी पर चिंता जताई और पारदर्शिता व खुली बातचीत पर ज़ोर दिया।
अरुणाचल इंडिजिनस ट्राइब्स फोरम (AITF) और CBOs के साथ भी अलग बैठक हुई; जागरूकता अभियान को मज़बूत करने पर सहमति बनी।
यह परियोजना सियांग नदी पर प्रस्तावित है; चीन द्वारा यारलुंग त्सांगपो पर बड़े बाँध बनाने के कारण केंद्र सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम मान रही है।

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने 25 अक्टूबर 2026 को ईटानगर में सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट की प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट (पीएफआर) पर सभी दलों के विधायकों के साथ एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रोजेक्ट को लेकर फैल रही गलत जानकारी और भ्रम को दूर करना तथा राष्ट्रीय एवं स्थानीय हितों के बीच संतुलन पर राजनीतिक सहमति बनाना था।

सर्वदलीय बैठक में क्या हुआ

मुख्यमंत्री खांडू ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बताया कि बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरण संबंधी चिंताओं और स्थानीय लोगों की आकांक्षाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने लिखा, 'हमारी प्राथमिकता सियांग घाटी के लोगों के अधिकारों और आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।'

सरकार का प्रयास है कि इस बड़े प्रोजेक्ट को लेकर सभी दल मिलकर काम करें और एक सामूहिक दृष्टिकोण अपनाया जाए। बैठक में प्रोजेक्ट से जुड़े तकनीकी, सामाजिक और रणनीतिक पहलुओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

गलत जानकारी पर मुख्यमंत्री की चिंता

मुख्यमंत्री ने एक अन्य पोस्ट में प्रोजेक्ट को लेकर फैल रही अफवाहों और गलत धारणाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट को लेकर फैली गलत जानकारी और गलत धारणाओं के कारण हमारे लोगों के मन में चिंताएँ पैदा हो रही हैं। तथ्यों, पारदर्शिता और खुली बातचीत के ज़रिए जानकारी की इस कमी को दूर करना बहुत ज़रूरी है।'

खांडू ने स्पष्ट किया कि सही जानकारी के अभाव में स्थानीय जनता प्रोजेक्ट के रणनीतिक महत्व और उससे जुड़ी सच्चाई को नहीं समझ पा रही, और इसे दूर करना राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी है।

आदिवासी संगठनों के साथ संवाद

सर्वदलीय बैठक के अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने अरुणाचल इंडिजिनस ट्राइब्स फोरम (AITF) और कम्युनिटी-बेस्ड ऑर्गेनाइजेशंस (CBOs) के साथ भी अलग से बैठक की। इस संवाद में प्रोजेक्ट पर चर्चा के साथ-साथ पूरे अरुणाचल प्रदेश में जागरूकता अभियान को मज़बूत करने के सामूहिक प्रयासों पर सहमति बनी।

गौरतलब है कि आदिवासी समुदायों की भागीदारी इस प्रोजेक्ट की स्वीकार्यता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि विस्थापन और पर्यावरणीय प्रभाव की आशंकाएँ स्थानीय स्तर पर लंबे समय से चर्चा में हैं।

सियांग प्रोजेक्ट का रणनीतिक महत्व

सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट अरुणाचल प्रदेश की सियांग नदी पर प्रस्तावित एक विशाल हाइड्रोपावर परियोजना है। यह नदी आगे असम में ब्रह्मपुत्र के नाम से जानी जाती है। केंद्र सरकार इस परियोजना को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से अत्यंत महत्वपूर्ण मान रही है, क्योंकि चीन अपनी ओर यारलुंग त्सांगपो नदी पर बड़े बाँध निर्मित कर रहा है, जिससे भारत में जल-प्रवाह प्रभावित होने की आशंका जताई जाती है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-चीन सीमा पर जल-संसाधनों को लेकर रणनीतिक सतर्कता बढ़ी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रोजेक्ट केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं, बल्कि नदी के प्रवाह पर रणनीतिक नियंत्रण का भी माध्यम है।

आगे की राह

मुख्यमंत्री खांडू ने स्पष्ट किया कि सरकार पारदर्शिता और जन-भागीदारी के माध्यम से इस प्रोजेक्ट पर आम सहमति बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सर्वदलीय सहमति और आदिवासी संगठनों के साथ खुला संवाद इस प्रक्रिया के दो अहम स्तंभ बने हुए हैं। आने वाले दिनों में राज्य सरकार प्रोजेक्ट की पीएफआर के आधार पर अगले कदमों की घोषणा कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती यह है कि 'गलत जानकारी' का ठीकरा फोड़ने से पहले सरकार ने स्वयं कितनी पारदर्शिता बरती। सियांग घाटी के समुदायों की विस्थापन और पर्यावरणीय आशंकाएँ वास्तविक हैं और महज़ अफवाह नहीं। प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट सार्वजनिक किए बिना 'खुली बातचीत' का आह्वान अधूरा लगता है। यदि केंद्र सरकार वास्तव में इस परियोजना को राष्ट्रीय सुरक्षा की धुरी मानती है, तो स्थानीय सहमति के लिए ठोस मुआवज़ा और पुनर्वास ढाँचा अभी तक सामने नहीं आया — यही वह खाई है जिसे भरे बिना कोई भी बैठक दीर्घकालिक भरोसा नहीं बना सकती।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट क्या है?
यह अरुणाचल प्रदेश की सियांग नदी पर प्रस्तावित एक विशाल हाइड्रोपावर परियोजना है, जो आगे असम में ब्रह्मपुत्र बन जाती है। केंद्र सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानती है, खासकर चीन द्वारा यारलुंग त्सांगपो पर बड़े बाँध बनाने की पृष्ठभूमि में।
CM पेमा खांडू ने सर्वदलीय बैठक क्यों बुलाई?
मुख्यमंत्री खांडू ने प्रोजेक्ट की प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट (पीएफआर) पर राजनीतिक सहमति बनाने और प्रोजेक्ट को लेकर फैली गलत जानकारी व भ्रम को दूर करने के लिए यह बैठक आयोजित की। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरण और स्थानीय लोगों की चिंताओं पर भी चर्चा हुई।
इस प्रोजेक्ट पर स्थानीय समुदायों की क्या चिंताएँ हैं?
सियांग घाटी के स्थानीय और आदिवासी समुदायों में विस्थापन, पर्यावरणीय प्रभाव और अपनी ज़मीन-संस्कृति के नुकसान को लेकर चिंताएँ हैं। इसीलिए मुख्यमंत्री ने अरुणाचल इंडिजिनस ट्राइब्स फोरम (AITF) और सामुदायिक संगठनों (CBOs) के साथ अलग बैठक भी की।
चीन के बाँध से भारत को क्या खतरा है?
चीन अपनी ओर यारलुंग त्सांगपो नदी पर बड़े बाँध बना रहा है, जो आगे भारत में सियांग और फिर ब्रह्मपुत्र बनती है। इससे भारत में नदी के जल-प्रवाह और बाढ़ पर रणनीतिक नियंत्रण की आशंका जताई जाती है, जिसे देखते हुए केंद्र सरकार इस परियोजना को राष्ट्रीय हित में मान रही है।
सियांग प्रोजेक्ट पर आगे क्या होगा?
राज्य सरकार सर्वदलीय सहमति और आदिवासी संगठनों के साथ संवाद के आधार पर पीएफआर के अगले कदमों की घोषणा कर सकती है। मुख्यमंत्री खांडू ने पारदर्शिता और जन-भागीदारी को प्रक्रिया का केंद्र बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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