सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट: CM पेमा खांडू ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, गलत जानकारी पर जताई चिंता
सारांश
मुख्य बातें
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने 25 अक्टूबर 2026 को ईटानगर में सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट की प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट (पीएफआर) पर सभी दलों के विधायकों के साथ एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रोजेक्ट को लेकर फैल रही गलत जानकारी और भ्रम को दूर करना तथा राष्ट्रीय एवं स्थानीय हितों के बीच संतुलन पर राजनीतिक सहमति बनाना था।
सर्वदलीय बैठक में क्या हुआ
मुख्यमंत्री खांडू ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बताया कि बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरण संबंधी चिंताओं और स्थानीय लोगों की आकांक्षाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने लिखा, 'हमारी प्राथमिकता सियांग घाटी के लोगों के अधिकारों और आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।'
सरकार का प्रयास है कि इस बड़े प्रोजेक्ट को लेकर सभी दल मिलकर काम करें और एक सामूहिक दृष्टिकोण अपनाया जाए। बैठक में प्रोजेक्ट से जुड़े तकनीकी, सामाजिक और रणनीतिक पहलुओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।
गलत जानकारी पर मुख्यमंत्री की चिंता
मुख्यमंत्री ने एक अन्य पोस्ट में प्रोजेक्ट को लेकर फैल रही अफवाहों और गलत धारणाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट को लेकर फैली गलत जानकारी और गलत धारणाओं के कारण हमारे लोगों के मन में चिंताएँ पैदा हो रही हैं। तथ्यों, पारदर्शिता और खुली बातचीत के ज़रिए जानकारी की इस कमी को दूर करना बहुत ज़रूरी है।'
खांडू ने स्पष्ट किया कि सही जानकारी के अभाव में स्थानीय जनता प्रोजेक्ट के रणनीतिक महत्व और उससे जुड़ी सच्चाई को नहीं समझ पा रही, और इसे दूर करना राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी है।
आदिवासी संगठनों के साथ संवाद
सर्वदलीय बैठक के अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने अरुणाचल इंडिजिनस ट्राइब्स फोरम (AITF) और कम्युनिटी-बेस्ड ऑर्गेनाइजेशंस (CBOs) के साथ भी अलग से बैठक की। इस संवाद में प्रोजेक्ट पर चर्चा के साथ-साथ पूरे अरुणाचल प्रदेश में जागरूकता अभियान को मज़बूत करने के सामूहिक प्रयासों पर सहमति बनी।
गौरतलब है कि आदिवासी समुदायों की भागीदारी इस प्रोजेक्ट की स्वीकार्यता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि विस्थापन और पर्यावरणीय प्रभाव की आशंकाएँ स्थानीय स्तर पर लंबे समय से चर्चा में हैं।
सियांग प्रोजेक्ट का रणनीतिक महत्व
सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट अरुणाचल प्रदेश की सियांग नदी पर प्रस्तावित एक विशाल हाइड्रोपावर परियोजना है। यह नदी आगे असम में ब्रह्मपुत्र के नाम से जानी जाती है। केंद्र सरकार इस परियोजना को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से अत्यंत महत्वपूर्ण मान रही है, क्योंकि चीन अपनी ओर यारलुंग त्सांगपो नदी पर बड़े बाँध निर्मित कर रहा है, जिससे भारत में जल-प्रवाह प्रभावित होने की आशंका जताई जाती है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-चीन सीमा पर जल-संसाधनों को लेकर रणनीतिक सतर्कता बढ़ी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रोजेक्ट केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं, बल्कि नदी के प्रवाह पर रणनीतिक नियंत्रण का भी माध्यम है।
आगे की राह
मुख्यमंत्री खांडू ने स्पष्ट किया कि सरकार पारदर्शिता और जन-भागीदारी के माध्यम से इस प्रोजेक्ट पर आम सहमति बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सर्वदलीय सहमति और आदिवासी संगठनों के साथ खुला संवाद इस प्रक्रिया के दो अहम स्तंभ बने हुए हैं। आने वाले दिनों में राज्य सरकार प्रोजेक्ट की पीएफआर के आधार पर अगले कदमों की घोषणा कर सकती है।