सियांग जलविद्युत परियोजना: हिंसक विरोध के बीच CM पेमा खांडू का पारदर्शिता और संवाद पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) — 11,200 मेगावाट की प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना — पर पारदर्शिता और खुले संवाद की जरूरत पर बल दिया। यह बयान सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों में परियोजना के खिलाफ भड़की हिंसा की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें एक NHPC कार्यालय, एक पुलिस थाना और दो राजनीतिक नेताओं के आवासों में तोड़फोड़ की गई।
सर्वदलीय बैठक और सामुदायिक संवाद
मुख्यमंत्री खांडू ने रविवार को परियोजना की प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट (PFR) पर सर्वदलीय विधायकों की बैठक बुलाई, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरणीय चिंताओं और स्थानीय आशंकाओं पर विचार-विमर्श हुआ। इसके अतिरिक्त उन्होंने अरुणाचल इंडिजिनस ट्राइब्स फोरम (AITF) और विभिन्न सामुदायिक संगठनों (CBOs) के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की।
खांडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि सरकार की प्राथमिकता सियांग घाटी के लोगों के अधिकारों और आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि परियोजना को लेकर फैली गलत सूचनाओं और गलतफहमियों के कारण लोगों में आशंकाएँ पैदा हो रही हैं और तथ्यों, पारदर्शिता एवं खुले संवाद के ज़रिये इस सूचना-अंतर को पाटना आवश्यक है।
पासीघाट हिंसा और केंद्र की प्रतिक्रिया
शुक्रवार और शनिवार को ईस्ट सियांग जिले के मुख्यालय पासीघाट में हुई हिंसा के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की दो कंपनियाँ — लगभग 250 जवान — अरुणाचल प्रदेश भेजी हैं। प्रदर्शनकारियों ने NHPC का एक कार्यालय और एक पुलिस थाने में आग लगा दी; इसके अलावा, राज्य भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष के आवास सहित दो राजनीतिक नेताओं के घरों में तोड़फोड़ की गई। कथित तौर पर पथराव के बाद 40 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए।
शनिवार को मुख्यमंत्री ने इन घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन यह कानून के दायरे में होना चाहिए और इससे संपत्ति को नुकसान नहीं पहुँचना चाहिए। उन्होंने सभी वर्गों से शांति बनाए रखने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की अपील की।
विरोध की पृष्ठभूमि
परियोजना के विरोध में आदि बाने केबांग यूनाइटेड, SUMP प्रभावित क्षेत्र युवा संघ, सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम की युवा शाखा और आदि गालो वेलफेयर सोसाइटी ने संयुक्त रूप से 12 घंटे के बंद का आह्वान किया था। यह ऐसे समय में आया है जब परियोजना के विरोधी यह आशंका जता रहे हैं कि बड़े पैमाने पर बाँध निर्माण से स्थानीय आदिवासी समुदायों की ज़मीन, जीवन-यापन और सांस्कृतिक पहचान पर गंभीर असर पड़ेगा।
यूनाइटेड तानी काउंसिल (UTC) ने भी रविवार को परियोजना का विरोध कर रहे लोगों के साथ खुले संवाद की अपील की। UTC के अध्यक्ष बामांग ताजी और महासचिव न्यादार लोया ने बताया कि उन्होंने सियांग बेसिन के दो दौरे किए हैं और विरोधकर्ताओं सहित संबंधित पक्षों की चिंताओं को समझने का प्रयास किया है।
सरकार का रुख और आगे की राह
मुख्यमंत्री खांडू ने दोहराया कि राज्य सरकार सभी संगठनों, संघों और संबंधित पक्षों के साथ बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि परियोजना के संभावित लाभों, प्रतिकूल प्रभावों और स्थानीय समुदायों की आशंकाओं सहित सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। गौरतलब है कि 11,200 मेगावाट की यह परियोजना भारत की सबसे बड़ी प्रस्तावित जलविद्युत परियोजनाओं में से एक है और इसका रणनीतिक महत्व — विशेषकर चीन की ओर से ऊपरी हिमालयी नदियों पर बाँध निर्माण के संदर्भ में — अत्यधिक है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार और समुदायों के बीच संवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।