25 अक्टूबर 2026
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सियांग जलविद्युत परियोजना: हिंसक विरोध के बीच CM पेमा खांडू का पारदर्शिता और संवाद पर जोर

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सियांग जलविद्युत परियोजना: हिंसक विरोध के बीच CM पेमा खांडू का पारदर्शिता और संवाद पर जोर

सारांश

अरुणाचल में 11,200 मेगावाट की सियांग जलविद्युत परियोजना के विरोध में आग और पथराव — NHPC कार्यालय जला, 40 पुलिसकर्मी घायल। CM पेमा खांडू ने संवाद का रास्ता खोला, केंद्र ने CRPF की RAF भेजी। असली सवाल यह है कि विकास और आदिवासी अधिकारों के बीच यह टकराव कब तक टलता रहेगा।

मुख्य बातें

CM पेमा खांडू ने 25 अक्टूबर 2026 को 11,200 MW की सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) पर सर्वदलीय बैठक बुलाई और पारदर्शिता व संवाद की जरूरत पर बल दिया।
पासीघाट में हुई हिंसा में NHPC कार्यालय और पुलिस थाने में आग, दो नेताओं के आवासों में तोड़फोड़; 40 से अधिक पुलिसकर्मी घायल।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने CRPF की RAF की दो कंपनियाँ (लगभग 250 जवान ) अरुणाचल प्रदेश भेजी।
आदि बाने केबांग यूनाइटेड समेत चार संगठनों ने 12 घंटे के बंद का आह्वान किया था।
यूनाइटेड तानी काउंसिल (UTC) ने खुले संवाद की अपील की; अध्यक्ष बामांग ताजी ने सियांग बेसिन के दो दौरे किए।
CM ने दोहराया कि सरकार परियोजना के सभी पहलुओं — लाभ, प्रतिकूल प्रभाव और स्थानीय आशंकाएँ — पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है।

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) — 11,200 मेगावाट की प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना — पर पारदर्शिता और खुले संवाद की जरूरत पर बल दिया। यह बयान सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों में परियोजना के खिलाफ भड़की हिंसा की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें एक NHPC कार्यालय, एक पुलिस थाना और दो राजनीतिक नेताओं के आवासों में तोड़फोड़ की गई।

सर्वदलीय बैठक और सामुदायिक संवाद

मुख्यमंत्री खांडू ने रविवार को परियोजना की प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट (PFR) पर सर्वदलीय विधायकों की बैठक बुलाई, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरणीय चिंताओं और स्थानीय आशंकाओं पर विचार-विमर्श हुआ। इसके अतिरिक्त उन्होंने अरुणाचल इंडिजिनस ट्राइब्स फोरम (AITF) और विभिन्न सामुदायिक संगठनों (CBOs) के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की।

खांडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि सरकार की प्राथमिकता सियांग घाटी के लोगों के अधिकारों और आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि परियोजना को लेकर फैली गलत सूचनाओं और गलतफहमियों के कारण लोगों में आशंकाएँ पैदा हो रही हैं और तथ्यों, पारदर्शिता एवं खुले संवाद के ज़रिये इस सूचना-अंतर को पाटना आवश्यक है।

पासीघाट हिंसा और केंद्र की प्रतिक्रिया

शुक्रवार और शनिवार को ईस्ट सियांग जिले के मुख्यालय पासीघाट में हुई हिंसा के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की दो कंपनियाँ — लगभग 250 जवान — अरुणाचल प्रदेश भेजी हैं। प्रदर्शनकारियों ने NHPC का एक कार्यालय और एक पुलिस थाने में आग लगा दी; इसके अलावा, राज्य भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष के आवास सहित दो राजनीतिक नेताओं के घरों में तोड़फोड़ की गई। कथित तौर पर पथराव के बाद 40 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए।

शनिवार को मुख्यमंत्री ने इन घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन यह कानून के दायरे में होना चाहिए और इससे संपत्ति को नुकसान नहीं पहुँचना चाहिए। उन्होंने सभी वर्गों से शांति बनाए रखने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की अपील की।

विरोध की पृष्ठभूमि

परियोजना के विरोध में आदि बाने केबांग यूनाइटेड, SUMP प्रभावित क्षेत्र युवा संघ, सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम की युवा शाखा और आदि गालो वेलफेयर सोसाइटी ने संयुक्त रूप से 12 घंटे के बंद का आह्वान किया था। यह ऐसे समय में आया है जब परियोजना के विरोधी यह आशंका जता रहे हैं कि बड़े पैमाने पर बाँध निर्माण से स्थानीय आदिवासी समुदायों की ज़मीन, जीवन-यापन और सांस्कृतिक पहचान पर गंभीर असर पड़ेगा।

यूनाइटेड तानी काउंसिल (UTC) ने भी रविवार को परियोजना का विरोध कर रहे लोगों के साथ खुले संवाद की अपील की। UTC के अध्यक्ष बामांग ताजी और महासचिव न्यादार लोया ने बताया कि उन्होंने सियांग बेसिन के दो दौरे किए हैं और विरोधकर्ताओं सहित संबंधित पक्षों की चिंताओं को समझने का प्रयास किया है।

सरकार का रुख और आगे की राह

मुख्यमंत्री खांडू ने दोहराया कि राज्य सरकार सभी संगठनों, संघों और संबंधित पक्षों के साथ बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि परियोजना के संभावित लाभों, प्रतिकूल प्रभावों और स्थानीय समुदायों की आशंकाओं सहित सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। गौरतलब है कि 11,200 मेगावाट की यह परियोजना भारत की सबसे बड़ी प्रस्तावित जलविद्युत परियोजनाओं में से एक है और इसका रणनीतिक महत्व — विशेषकर चीन की ओर से ऊपरी हिमालयी नदियों पर बाँध निर्माण के संदर्भ में — अत्यधिक है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार और समुदायों के बीच संवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर्यावरणीय संवेदनशीलता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच लंबे समय से चला आ रहा है। CM खांडू का 'संवाद और पारदर्शिता' का आह्वान स्वागत योग्य है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह केवल तात्कालिक तनाव कम करने की कवायद है या वास्तव में समुदायों को निर्णय-प्रक्रिया में भागीदार बनाने की प्रतिबद्धता? NHPC जैसी केंद्रीय एजेंसी की परियोजनाओं पर राज्य सरकार का नियंत्रण सीमित होता है, जो स्थानीय असंतोष को और गहरा कर सकता है। चीन के ऊपरी ब्रह्मपुत्र पर बाँध-निर्माण के संदर्भ में SUMP का रणनीतिक तर्क मज़बूत है, लेकिन रणनीतिक जरूरत और आदिवासी सहमति — दोनों को एक साथ साधने का रोडमैप अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) क्या है?
SUMP अरुणाचल प्रदेश के सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट क्षमता की जलविद्युत परियोजना है। यह भारत की सबसे बड़ी प्रस्तावित जलविद्युत परियोजनाओं में से एक है और इसे चीन के ऊपरी ब्रह्मपुत्र पर बाँध-निर्माण के जवाब में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
पासीघाट में हिंसा क्यों हुई?
SUMP के विरोध में आयोजित प्रदर्शन के दौरान शुक्रवार और शनिवार को पासीघाट में प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने NHPC कार्यालय और एक पुलिस थाने में आग लगा दी और दो नेताओं के आवासों में तोड़फोड़ की। कथित तौर पर पथराव में 40 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए।
केंद्र सरकार ने स्थिति सामान्य करने के लिए क्या किया?
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पासीघाट हिंसा के बाद CRPF की RAF की दो कंपनियाँ — लगभग 250 जवान — अरुणाचल प्रदेश भेजी हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्र में शांति-व्यवस्था बहाल करना है।
CM पेमा खांडू ने परियोजना पर क्या रुख अपनाया है?
मुख्यमंत्री खांडू ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर और AITF व सामुदायिक संगठनों से मिलकर पारदर्शिता एवं संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि परियोजना की गलत सूचनाओं से उपजी आशंकाओं को सटीक जानकारी से दूर किया जाना चाहिए और सरकार सभी पक्षों के साथ चर्चा के लिए तैयार है।
परियोजना का विरोध कौन-से संगठन कर रहे हैं?
परियोजना के विरोध में आदि बाने केबांग यूनाइटेड, SUMP प्रभावित क्षेत्र युवा संघ, सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम की युवा शाखा और आदि गालो वेलफेयर सोसाइटी सहित कई स्थानीय आदिवासी और सामुदायिक संगठन सक्रिय हैं। इन्होंने संयुक्त रूप से 12 घंटे के बंद का आह्वान किया था। यूनाइटेड तानी काउंसिल (UTC) ने संवाद की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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