6 अक्टूबर 2026
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अरुणाचल प्रदेश: राज्यपाल परनाइक और CM खांडू ने ₹1.5 लाख करोड़ SUMP परियोजना पर की समीक्षा

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अरुणाचल प्रदेश: राज्यपाल परनाइक और CM खांडू ने ₹1.5 लाख करोड़ SUMP परियोजना पर की समीक्षा

सारांश

₹1.5 लाख करोड़ की SUMP परियोजना सिर्फ बिजली का मामला नहीं — यह ब्रह्मपुत्र घाटी में भारत की रणनीतिक पकड़ का सवाल है। 11,200 मेगावाट क्षमता और चार विकास उद्देश्यों के साथ, यह पूर्वोत्तर के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्टों में से एक है।

मुख्य बातें

राज्यपाल केटी परनाइक और CM पेमा खांडू ने 6 अक्टूबर 2026 को इटानगर में विकास प्राथमिकताओं पर बैठक की।
प्रस्तावित SUMP की अनुमानित लागत ₹1.5 लाख करोड़ और उत्पादन क्षमता 11,200 मेगावाट है।
परियोजना जल सुरक्षा, ऊर्जा उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण और क्षेत्रीय विकास को साधती है।
राज्य सरकार ने SUMP की PFR पर व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया है।
अरुणाचल प्रदेश को PMAY-U और PMAY-U 2.0 में दो सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पुरस्कार मिले।

अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल केटी परनाइक और मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को इटानगर स्थित लोक भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें राज्य की रणनीतिक अवसंरचना परियोजनाओं और समावेशी विकास की प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का केंद्रबिंदु ₹1.5 लाख करोड़ की प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट (SUMP) रही, जिसे राष्ट्रीय रणनीतिक महत्व की परियोजना माना जाता है।

SUMP परियोजना: मुख्य तथ्य और महत्व

उपमुख्यमंत्री चोवना मीन के अनुसार, SUMP एक मेगा पनबिजली परियोजना है जिसकी प्रस्तावित उत्पादन क्षमता 11,200 मेगावाट है। यह परियोजना न केवल अरुणाचल प्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताई जा रही है। परियोजना का नाम सियांग नदी से लिया गया है, जो विशाल ब्रह्मपुत्र नदी का अरुणाचल प्रदेश में स्थानीय नाम है।

यह परियोजना जल सुरक्षा, ऊर्जा उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण और क्षेत्रीय विकास — चार अहम उद्देश्यों को एक साथ साधने का प्रयास करती है। सियांग जिले के विकास परिदृश्य में इससे महत्वपूर्ण बदलाव आने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री का प्रस्तुतीकरण और जनसंपर्क प्रयास

मुख्यमंत्री खांडू ने राज्यपाल को राज्य के विभिन्न विकासात्मक मुद्दों के साथ-साथ SUMP की पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट (PFR) पर जागरूकता फैलाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए व्यापक जनसंपर्क अभियानों की जानकारी दी। इन अभियानों के ज़रिए स्थानीय जनता की प्रतिक्रिया और सुझाव जुटाए गए हैं।

गौरतलब है कि बड़े अवसंरचना प्रोजेक्टों के मामले में स्थानीय समुदायों की आशंकाएँ और विस्थापन का मुद्दा अक्सर विवाद का कारण बनता है। ऐसे में सरकार का यह संवाद-केंद्रित दृष्टिकोण उल्लेखनीय है।

राज्यपाल की प्रतिक्रिया और प्रशंसा

राज्यपाल परनाइक ने मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिपरिषद की सियांग क्षेत्र के स्थानीय समुदायों और हितधारकों के साथ सीधे संवाद स्थापित करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल जनविश्वास बढ़ाने, चिंताओं का पारदर्शी ढंग से समाधान करने और विकास प्रक्रिया में नागरिकों को जागरूक भागीदार बनाने के लिए आवश्यक हैं।

राज्यपाल ने यह भी कहा कि नागरिकों के साथ सार्थक संवाद लोकतांत्रिक निर्णय-प्रक्रिया को सुदृढ़ करता है और प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं से जुड़े अवसरों एवं चुनौतियों की साझा समझ विकसित करने में मदद करता है। उन्होंने विश्वास जताया कि निरंतर परामर्श और जनभागीदारी से सूचित और रचनात्मक परिणाम प्राप्त होंगे।

PMAY पुरस्कार: आवास योजना में राज्य की उपलब्धि

बैठक में राज्यपाल ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U) और PMAY-U 2.0 के अंतर्गत अरुणाचल प्रदेश को मिले दो सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य पुरस्कारों की भी सराहना की। ये पुरस्कार आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा विश्व आवास दिवस 2026 समारोह के दौरान प्रदान किए गए। उन्होंने कहा कि ये सम्मान शहरी निवासियों के जीवन स्तर में सुधार और विकास के लाभों को प्रत्येक पात्र नागरिक तक पहुँचाने के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

आगे की राह

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पूर्वोत्तर भारत में बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं पर केंद्र सरकार का विशेष ज़ोर है और चीन की ओर से ब्रह्मपुत्र के ऊपरी हिस्से पर बड़े बाँध बनाए जाने की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में SUMP की रणनीतिक उपयोगिता और अधिक प्रासंगिक हो जाती है। राज्य सरकार के अगले कदमों और PFR पर जनसंवाद की प्रक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

200 मेगावाट — उसे पूर्वोत्तर के इतिहास की सबसे बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं में रखती है, लेकिन इसके साथ स्थानीय समुदायों के विस्थापन और पारिस्थितिक असंतुलन के जोखिम भी जुड़े हैं जिन पर मुख्यधारा की कवरेज अक्सर पर्याप्त ध्यान नहीं देती। राज्यपाल की जनसंवाद की प्रशंसा सकारात्मक है, पर असली कसौटी यह होगी कि PFR पर मिली जनप्रतिक्रिया को नीतिगत फैसलों में कितना स्थान मिलता है। यह ऐसे समय में आया है जब चीन ब्रह्मपुत्र के ऊपरी हिस्से पर बड़े बाँध बना रहा है, जो SUMP को केवल ऊर्जा नहीं, बल्कि जल-भू-राजनीति का मामला भी बनाता है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सियांग अपर मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट (SUMP) क्या है?
SUMP अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित एक मेगा पनबिजली परियोजना है जिसकी अनुमानित लागत ₹1.5 लाख करोड़ और उत्पादन क्षमता 11,200 मेगावाट है। यह परियोजना सियांग नदी (ब्रह्मपुत्र) पर बनाई जानी है और इसके ज़रिए जल सुरक्षा, बाढ़ नियंत्रण, ऊर्जा उत्पादन और क्षेत्रीय विकास के उद्देश्य एक साथ पूरे करने की योजना है।
SUMP परियोजना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उपमुख्यमंत्री चोवना मीन के अनुसार, SUMP केवल अरुणाचल प्रदेश नहीं बल्कि पूरे देश के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक महत्व की परियोजना है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ब्रह्मपुत्र के ऊपरी हिस्से पर चीन की गतिविधियाँ भारत के जल संसाधनों पर असर डाल सकती हैं।
राज्य सरकार ने SUMP पर जनसंपर्क कैसे किया?
राज्य सरकार ने परियोजना की पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट (PFR) पर जागरूकता फैलाने और जनता की प्रतिक्रिया जानने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया। मुख्यमंत्री खांडू ने सियांग क्षेत्र के स्थानीय समुदायों और हितधारकों से सीधे संवाद किया, जिसकी राज्यपाल ने प्रशंसा की।
अरुणाचल प्रदेश को PMAY में कौन से पुरस्कार मिले?
आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा आयोजित विश्व आवास दिवस 2026 समारोह में अरुणाचल प्रदेश को PMAY-शहरी और PMAY-U 2.0 के अंतर्गत दो सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य पुरस्कार प्रदान किए गए।
SUMP से सियांग जिले पर क्या असर पड़ेगा?
उपमुख्यमंत्री चोवना मीन के अनुसार, SUMP परियोजना से सियांग जिले के विकास परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव आने की उम्मीद है। हालाँकि, बड़े बाँध प्रोजेक्टों में स्थानीय समुदायों के विस्थापन और पर्यावरणीय प्रभाव जैसे मुद्दों पर भी जनसंवाद जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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