नीति आयोग बैठक में CM पेमा खांडू ने उठाई 40,000 MW जलविद्युत और फंडिंग सुधार की माँग
सारांश
मुख्य बातें
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने 12 जून 2026 को नई दिल्ली में नीति आयोग द्वारा आयोजित पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक में राज्य की विकास संबंधी चुनौतियों और रणनीतिक प्राथमिकताओं पर केंद्र सरकार से विशेष नीतिगत समर्थन की माँग रखी। उन्होंने जलविद्युत, कनेक्टिविटी, फंडिंग व्यवस्था और प्रशासनिक क्षमता निर्माण — चार प्रमुख क्षेत्रों में ठोस हस्तक्षेप की आवश्यकता बताई।
एक्ट ईस्ट पॉलिसी की सराहना, लेकिन विशेष सहायता की दरकार
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' को पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी, बुनियादी ढाँचे और जन-विश्वास में सुधार का श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि इस नीति से निवेश और विकास के नए द्वार खुले हैं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्रफल के हिसाब से पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा राज्य होने के बावजूद अरुणाचल प्रदेश को दुर्गम भूगोल और बिखरी आबादी के कारण अतिरिक्त विकासात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
खांडू ने कहा कि इन परिस्थितियों में सामान्य फॉर्मूले के बजाय राज्य को विशेष बुनियादी ढाँचा सहायता मिलनी चाहिए।
2047 तक 40,000 मेगावाट जलविद्युत का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश ने वर्ष 2047 तक 40,000 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने नीति आयोग और केंद्र के विभिन्न मंत्रालयों से समन्वित सहयोग माँगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जलविद्युत परियोजनाओं से स्थानीय युवाओं को रोज़गार दिलाने हेतु कौशल विकास और सहायक उद्योगों को प्रोत्साहन देना अनिवार्य है।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने बैठक में अरुणाचल प्रदेश की मानव संसाधन क्षमता की सराहना की और बड़े जलविद्युत परियोजना समूहों के सहयोग से औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को सुदृढ़ करने का सुझाव दिया।
जनसंख्या-आधारित फंडिंग व्यवस्था पर पुनर्विचार की माँग
वित्तीय संसाधनों के आवंटन पर खांडू ने मौजूदा जनसंख्या-आधारित फंडिंग व्यवस्था की समीक्षा का आग्रह किया। उनका तर्क था कि कम आबादी किंतु विशाल भौगोलिक क्षेत्र वाले राज्यों को इस व्यवस्था में नुकसान होता है। उन्होंने सुझाया कि फंडिंग के आधार में क्षेत्रफल, दुर्गम भूभाग और रणनीतिक महत्व को भी शामिल किया जाए।
इसके अतिरिक्त उन्होंने बताया कि अरुणाचल प्रदेश को अन्य पूर्वोत्तर राज्यों की तुलना में बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं का अपेक्षाकृत कम लाभ मिला है और इस अंतर को पाटने के लिए विशेष व्यवस्था बनाने का अनुरोध किया।
कनेक्टिविटी और सुशासन पहलें
कनेक्टिविटी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) का दायरा बढ़ाकर 250 या उससे अधिक आबादी वाले गाँवों तक करने की माँग की। उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम की सफलता के बावजूद कई दूरदराज़ गाँव अब भी सड़क संपर्क से वंचित हैं।
सुशासन के मोर्चे पर खांडू ने 'सरकार आपके द्वार', 'सेवा आपके द्वार' और 'कैबिनेट आपके द्वार' जैसी पहलों का उल्लेख किया, जिनके माध्यम से सरकारी सेवाएँ सीधे दूरस्थ गाँवों तक पहुँचाई जा रही हैं। उन्होंने 'इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसफॉर्मिंग अरुणाचल' की स्थापना की जानकारी देते हुए इसे एक प्रमुख नीति एवं प्रशासनिक थिंक टैंक के रूप में विकसित करने के लिए नीति आयोग से मार्गदर्शन माँगा।
आगे की राह
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब केंद्र सरकार पूर्वोत्तर के विकास को अपनी नीतिगत प्राथमिकता बता रही है। खांडू की माँगें — विशेषकर फंडिंग सूत्र में सुधार और जलविद्युत के लिए समन्वित समर्थन — अरुणाचल के दीर्घकालिक विकास एजेंडे की दिशा तय करेंगी। नीति आयोग की ओर से इन सुझावों पर आगे की कार्रवाई अपेक्षित है।