28 जुलाई 2026
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नीति आयोग बैठक में CM पेमा खांडू ने उठाई 40,000 MW जलविद्युत और फंडिंग सुधार की माँग

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नीति आयोग बैठक में CM पेमा खांडू ने उठाई 40,000 MW जलविद्युत और फंडिंग सुधार की माँग

सारांश

नीति आयोग की पूर्वोत्तर बैठक में CM पेमा खांडू ने अरुणाचल के लिए बड़ा एजेंडा पेश किया — 2047 तक 40,000 MW जलविद्युत, जनसंख्या-आधारित फंडिंग व्यवस्था में बदलाव और पीएमजीएसवाई का विस्तार। दुर्गम भूगोल और बिखरी आबादी को केंद्रीय नीति में उचित भार मिले, यही उनकी मुख्य माँग रही।

मुख्य बातें

CM पेमा खांडू ने 12 जून 2026 को नीति आयोग की पूर्वोत्तर मुख्यमंत्री बैठक में अरुणाचल के विकास मुद्दे उठाए।
राज्य ने 2047 तक 40,000 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखा है; केंद्रीय समन्वय की माँग।
जनसंख्या-आधारित फंडिंग फॉर्मूले की समीक्षा का आग्रह — क्षेत्रफल और दुर्गम भूभाग को भी आधार बनाने का सुझाव।
पीएमजीएसवाई का दायरा 250 या अधिक आबादी वाले गाँवों तक बढ़ाने की माँग।
'इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसफॉर्मिंग अरुणाचल' को नीति थिंक टैंक बनाने के लिए नीति आयोग से मार्गदर्शन माँगा।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने जलविद्युत समूहों के साथ आईटीआई को मज़बूत करने का सुझाव दिया।

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने 12 जून 2026 को नई दिल्ली में नीति आयोग द्वारा आयोजित पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक में राज्य की विकास संबंधी चुनौतियों और रणनीतिक प्राथमिकताओं पर केंद्र सरकार से विशेष नीतिगत समर्थन की माँग रखी। उन्होंने जलविद्युत, कनेक्टिविटी, फंडिंग व्यवस्था और प्रशासनिक क्षमता निर्माण — चार प्रमुख क्षेत्रों में ठोस हस्तक्षेप की आवश्यकता बताई।

एक्ट ईस्ट पॉलिसी की सराहना, लेकिन विशेष सहायता की दरकार

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' को पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी, बुनियादी ढाँचे और जन-विश्वास में सुधार का श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि इस नीति से निवेश और विकास के नए द्वार खुले हैं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्रफल के हिसाब से पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा राज्य होने के बावजूद अरुणाचल प्रदेश को दुर्गम भूगोल और बिखरी आबादी के कारण अतिरिक्त विकासात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

खांडू ने कहा कि इन परिस्थितियों में सामान्य फॉर्मूले के बजाय राज्य को विशेष बुनियादी ढाँचा सहायता मिलनी चाहिए।

2047 तक 40,000 मेगावाट जलविद्युत का महत्वाकांक्षी लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश ने वर्ष 2047 तक 40,000 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने नीति आयोग और केंद्र के विभिन्न मंत्रालयों से समन्वित सहयोग माँगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जलविद्युत परियोजनाओं से स्थानीय युवाओं को रोज़गार दिलाने हेतु कौशल विकास और सहायक उद्योगों को प्रोत्साहन देना अनिवार्य है।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने बैठक में अरुणाचल प्रदेश की मानव संसाधन क्षमता की सराहना की और बड़े जलविद्युत परियोजना समूहों के सहयोग से औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को सुदृढ़ करने का सुझाव दिया।

जनसंख्या-आधारित फंडिंग व्यवस्था पर पुनर्विचार की माँग

वित्तीय संसाधनों के आवंटन पर खांडू ने मौजूदा जनसंख्या-आधारित फंडिंग व्यवस्था की समीक्षा का आग्रह किया। उनका तर्क था कि कम आबादी किंतु विशाल भौगोलिक क्षेत्र वाले राज्यों को इस व्यवस्था में नुकसान होता है। उन्होंने सुझाया कि फंडिंग के आधार में क्षेत्रफल, दुर्गम भूभाग और रणनीतिक महत्व को भी शामिल किया जाए।

इसके अतिरिक्त उन्होंने बताया कि अरुणाचल प्रदेश को अन्य पूर्वोत्तर राज्यों की तुलना में बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं का अपेक्षाकृत कम लाभ मिला है और इस अंतर को पाटने के लिए विशेष व्यवस्था बनाने का अनुरोध किया।

कनेक्टिविटी और सुशासन पहलें

कनेक्टिविटी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) का दायरा बढ़ाकर 250 या उससे अधिक आबादी वाले गाँवों तक करने की माँग की। उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम की सफलता के बावजूद कई दूरदराज़ गाँव अब भी सड़क संपर्क से वंचित हैं।

सुशासन के मोर्चे पर खांडू ने 'सरकार आपके द्वार', 'सेवा आपके द्वार' और 'कैबिनेट आपके द्वार' जैसी पहलों का उल्लेख किया, जिनके माध्यम से सरकारी सेवाएँ सीधे दूरस्थ गाँवों तक पहुँचाई जा रही हैं। उन्होंने 'इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसफॉर्मिंग अरुणाचल' की स्थापना की जानकारी देते हुए इसे एक प्रमुख नीति एवं प्रशासनिक थिंक टैंक के रूप में विकसित करने के लिए नीति आयोग से मार्गदर्शन माँगा।

आगे की राह

यह बैठक ऐसे समय में हुई जब केंद्र सरकार पूर्वोत्तर के विकास को अपनी नीतिगत प्राथमिकता बता रही है। खांडू की माँगें — विशेषकर फंडिंग सूत्र में सुधार और जलविद्युत के लिए समन्वित समर्थन — अरुणाचल के दीर्घकालिक विकास एजेंडे की दिशा तय करेंगी। नीति आयोग की ओर से इन सुझावों पर आगे की कार्रवाई अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार 40,000 मेगावाट जलविद्युत का ठोस लक्ष्य और 'इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसफॉर्मिंग अरुणाचल' जैसी संस्थागत पहल इसे महज़ शिकायत से आगे ले जाती है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या केंद्र फंडिंग फॉर्मूले में क्षेत्रफल और रणनीतिक महत्व को वास्तविक भार देता है, या यह माँग फिर किसी रिपोर्ट में दब जाती है। चीन सीमा से लगे राज्य की रणनीतिक अहमियत को देखते हुए, इन माँगों को केवल विकास के नज़रिए से नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा के नज़रिए से भी परखा जाना चाहिए।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीति आयोग की बैठक में CM पेमा खांडू ने कौन-सी मुख्य माँगें रखीं?
CM पेमा खांडू ने 2047 तक 40,000 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन के लिए केंद्रीय समन्वय, जनसंख्या-आधारित फंडिंग व्यवस्था की समीक्षा, पीएमजीएसवाई का दायरा 250 या अधिक आबादी वाले गाँवों तक बढ़ाने और बाहरी सहायता परियोजनाओं में अरुणाचल की हिस्सेदारी बढ़ाने की माँग रखी।
अरुणाचल प्रदेश का 40,000 मेगावाट जलविद्युत लक्ष्य क्या है?
राज्य ने वर्ष 2047 तक 40,000 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए नीति आयोग और केंद्रीय मंत्रालयों से समन्वित सहयोग माँगा गया है, साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए कौशल विकास और सहायक उद्योगों को बढ़ावा देने पर भी ज़ोर दिया गया।
अरुणाचल प्रदेश जनसंख्या-आधारित फंडिंग व्यवस्था की समीक्षा क्यों चाहता है?
अरुणाचल प्रदेश पूर्वोत्तर का क्षेत्रफल में सबसे बड़ा राज्य है, लेकिन इसकी आबादी अपेक्षाकृत कम और बिखरी हुई है। मौजूदा जनसंख्या-आधारित फंडिंग फॉर्मूले में ऐसे राज्यों को नुकसान होता है, इसलिए CM खांडू ने क्षेत्रफल, दुर्गम भूभाग और रणनीतिक महत्व को भी फंडिंग का आधार बनाने का सुझाव दिया।
'इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसफॉर्मिंग अरुणाचल' क्या है?
यह अरुणाचल प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित एक नीति एवं प्रशासनिक थिंक टैंक है। CM खांडू ने इसे प्रमुख नीति संस्थान के रूप में विकसित करने के लिए नीति आयोग से मार्गदर्शन और सहयोग माँगा है।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने बैठक में क्या कहा?
नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने अरुणाचल प्रदेश की मानव संसाधन क्षमता की सराहना की। उन्होंने सुझाव दिया कि बड़े जलविद्युत परियोजना समूहों के सहयोग से राज्य के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को और मज़बूत किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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