बाल तस्करी और ऑनलाइन शोषण पर पूर्वोत्तर की साझा रणनीति जरूरी: CM पेमा खांडू का तवांग में आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने 31 जुलाई 2026 को तवांग में आयोजित 'नॉर्थ ईस्ट स्टेट कमिशन्स फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स कन्वेंशन 2026' के उद्घाटन सत्र में पूर्वोत्तर के सभी राज्यों से बाल तस्करी, ऑनलाइन शोषण और सीमापार खतरों से निपटने के लिए एकजुट क्षेत्रीय रणनीति अपनाने का आह्वान किया। यह पहला अवसर है जब पूर्वोत्तर के सभी राज्यों के बाल अधिकार संरक्षण आयोग एक साझा मंच पर एकत्र हुए हैं।
सम्मेलन का महत्व और पृष्ठभूमि
मुख्यमंत्री खांडू ने इस सम्मेलन को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर की भौगोलिक और सामाजिक संरचना ऐसी है कि तस्करी, ऑनलाइन शोषण और नशे जैसी समस्याएं अक्सर राज्य की सीमाएं पार कर जाती हैं — इसलिए अकेले किसी एक राज्य का प्रयास पर्याप्त नहीं है। तवांग को 'शांति, करुणा और सद्भाव की भूमि' बताते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य पर चर्चा के लिए इससे उपयुक्त स्थान कोई नहीं हो सकता। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर के कई राज्य बाल तस्करी के बढ़ते मामलों और डिजिटल माध्यमों के जरिए होने वाले शोषण से जूझ रहे हैं।
अरुणाचल प्रदेश की बाल कल्याण योजनाएँ
खांडू ने राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को आंकड़ों के साथ रेखांकित किया। दुलारी कन्या योजना के तहत अब तक 15,500 से अधिक लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता दी गई है और इस पर ₹38 करोड़ से अधिक खर्च किए गए हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत राज्यभर में 134 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए गए हैं।
गर्ल्स हेल्थ एंड हाइजीन स्कीम के लिए वर्ष 2026-27 में ₹3.3 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिससे 25,000 से अधिक लाभार्थियों को सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत 38,000 से अधिक लाभार्थियों को सहायता मिली है, जबकि सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के अंतर्गत 1.8 लाख से अधिक महिलाएं और बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं।
मिशन वात्सल्य और बाल संरक्षण ढाँचा
मिशन वात्सल्य के तहत 2,500 से अधिक कमजोर बच्चों को प्रायोजन सहायता दी जा रही है। इनमें से 2,479 बच्चों को स्पॉन्सरशिप, फॉस्टर केयर और आफ्टरकेयर योजनाओं के तहत प्रतिमाह ₹4,000 की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। राज्य में 152 आंगनवाड़ी केंद्र अपग्रेड किए जा चुके हैं और 'अडॉप्ट एन आंगनवाड़ी' पहल के तहत 125 और केंद्र विकसित किए जा रहे हैं।
संकट में फंसे बच्चों और महिलाओं के लिए 24x7 चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, सभी 25 जिलों में वन स्टॉप सेंटर और वुमेन हेल्पलाइन 181 को महत्वपूर्ण सुरक्षा-कवच बताया गया।
सरकार की प्राथमिकता और सामूहिक जिम्मेदारी
खांडू ने स्पष्ट किया कि किसी भी सरकार की सफलता केवल आर्थिक विकास या बुनियादी ढाँचे से नहीं, बल्कि इस बात से आँकी जाती है कि वह अपने सबसे कमजोर नागरिकों की कितनी प्रभावी ढंग से रक्षा करती है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा में सरकारों के साथ-साथ स्कूल, परिवार, पुलिस, न्यायपालिका, स्वास्थ्यकर्मी, सामुदायिक नेता और स्वयंसेवी संस्थाओं की भी बराबर की भागीदारी अनिवार्य है।
सम्मेलन से अपेक्षाएँ
मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान, बाल संरक्षण कानूनों के बेहतर क्रियान्वयन, लापता और तस्करी किए गए बच्चों के मामलों में अंतर-राज्य समन्वय तथा ऑनलाइन खतरों पर प्रभावी प्रतिक्रिया का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने कहा, 'इस सम्मेलन की सफलता भाषणों की संख्या से नहीं, बल्कि क्षेत्र के बच्चों के जीवन में आए ठोस बदलावों से मापी जाएगी।'