अरुणाचल के 32,000 से अधिक हथकरघा बुनकरों को सशक्त बनाने पर CM पेमा खांडू का बड़ा संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने 7 अगस्त 2026 को ईटानगर के डीके कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के तीन दिवसीय उद्घाटन समारोह में घोषणा की कि राज्य में 32,000 से अधिक हथकरघा बुनकर इस क्षेत्र से जुड़े हैं, जो ग्रामीण परिवारों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। उन्होंने राज्य की पारंपरिक बुनाई विरासत को एक सुदृढ़ आर्थिक क्षेत्र में परिवर्तित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री खांडू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश का हथकरघा क्षेत्र केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि राज्य की मूल जनजातियों की सांस्कृतिक पहचान और जीवित विरासत है। उन्होंने कहा, 'अरुणाचल का हर बुना हुआ कपड़ा हमारे लोगों, हमारी परंपराओं और हमारी पहचान की कहानी कहता है।' उनके अनुसार इस क्षेत्र में ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और टिकाऊ आर्थिक विकास का आधार बनने की अपार संभावना है।
सरकार की पहल और बुनियादी ढाँचा
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) स्थापित किए हैं, बुनाई के बुनियादी ढाँचे को उन्नत किया है और पारंपरिक डिज़ाइनों की प्रामाणिकता बनाए रखते हुए उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए हैं। साथ ही बुनकरों को समकालीन डिज़ाइन तकनीकों, प्राकृतिक रंगाई, गुणवत्ता सुधार और उत्पाद विविधीकरण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में प्रतिस्पर्धी बन सकें।
राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत अरुणाचल प्रदेश भर के बुनकरों और कारीगर समूहों को आर्थिक सहायता, कच्चा माल, आधुनिक करघे और मार्केटिंग सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
युवाओं और महिलाओं की भूमिका
खांडू ने युवा उद्यमियों से आह्वान किया कि वे पारंपरिक कारीगरी को आधुनिक ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म से जोड़कर हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र के विशाल अवसरों का दोहन करें। उन्होंने महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि हथकरघा सदैव महिला सशक्तिकरण का माध्यम रहा है और पीढ़ियों से महिलाएँ अपनी बुनाई कला के ज़रिए राज्य की अनूठी सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखे हुए हैं।
वैश्विक बाज़ार से जोड़ने का लक्ष्य
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में हथकरघा क्षेत्र को संगठित और निर्यात-उन्मुख बनाने की माँग बढ़ रही है। अरुणाचल की 26 से अधिक प्रमुख जनजातियों की विशिष्ट बुनाई शैलियाँ वैश्विक बाज़ार में एक अलग पहचान रखती हैं। सरकार का लक्ष्य इस विविधता को वैश्विक मंच पर स्थापित करना है।
आगे की राह
गौरतलब है कि 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो 1905 के स्वदेशी आंदोलन की याद में स्थापित किया गया था। इस वर्ष के समारोह में बुनकरों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किल डेवलपमेंट, डिज़ाइन नवाचार और उद्यमिता सहायता के ज़रिए सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने का संकल्प लिया गया। आने वाले समय में राज्य सरकार की नीतियाँ यह तय करेंगी कि यह संकल्प ज़मीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है।