7 अगस्त 2026
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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026: तेलंगाना के CM रेवंत रेड्डी और राज्यपाल शुक्ला ने बुनकरों की कला को सराहा

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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026: तेलंगाना के CM रेवंत रेड्डी और राज्यपाल शुक्ला ने बुनकरों की कला को सराहा

सारांश

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर तेलंगाना में राजनीतिक एकजुटता दिखी — CM रेवंत रेड्डी, राज्यपाल शुक्ला, बीआरएस के के.टी. रामा राव और केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी सभी ने बुनकरों की तारीफ की। पोचमपल्ली से सिरसिल्ला तक, तेलंगाना की हथकरघा विरासत राजनीतिक वादों और सांस्कृतिक गर्व दोनों का केंद्र बनी।

मुख्य बातें

7 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए.
रेवंत रेड्डी और राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने बुनकरों को बधाई दी।
राज्यपाल शुक्ला ने पोचमपल्ली इकत, गडवाल, नारायणपेट, सिरसिल्ला और कोठाकोटा जैसी परंपराओं को तेलंगाना की समृद्ध कपड़ा विरासत का प्रतीक बताया।
CM रेवंत रेड्डी ने बुनकरों की आजीविका, आधुनिक तकनीक और मार्केटिंग विस्तार के लिए कार्यक्रम जारी रखने का संकल्प दोहराया।
रामा राव ने दावा किया कि पूर्व BRS सरकार की योजनाओं — चेनेथा मित्रा, नेथाना बीमा और ऋण माफी — ने पलायन कर चुके बुनकरों को तेलंगाना वापस लाया।
किशन रेड्डी ने 7 अगस्त 1905 के स्वदेशी आंदोलन और 2015 में PM मोदी द्वारा स्थापित हथकरघा दिवस का उल्लेख करते हुए 'वोकल फॉर लोकल' का आह्वान किया।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने 7 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राज्य के बुनकर समुदाय को बधाई दी और उनकी रचनात्मकता, लगन एवं कौशल की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। हैदराबाद से जारी अपने-अपने संदेशों में दोनों नेताओं ने हथकरघा को भारतीय सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग बताया और नागरिकों से हाथ से बुने उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की।

राज्यपाल का संदेश: परंपरा के संरक्षक हैं बुनकर

राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने अपने संदेश में हथकरघा को भारत की सांस्कृतिक विरासत का गौरवपूर्ण प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, 'हमारे बुनकर हमारी संस्कृति के संरक्षक हैं। उनकी कारीगरी ने हमारी विरासत को संजोकर रखा है और तेलंगाना की हथकरघा परंपरा को स्थायी पहचान दिलाई है।' राज्यपाल ने विशेष रूप से पोचमपल्ली इकत, गडवाल, नारायणपेट, सिरसिल्ला और कोठाकोटा जैसी प्रतिष्ठित हथकरघा परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये तेलंगाना की समृद्ध कपड़ा विरासत को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करती हैं।

उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे हाथ से बुने हुए उत्पादों को चुनकर और बुनकर समुदाय की अथक मेहनत का सम्मान करके इस क्षेत्र को प्रोत्साहित करें।

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हथकरघा बुनकरों और कामगारों को बधाई देते हुए कहा कि हथकरघा एक महान विरासत है, जो दुनिया के सामने भारतीय संस्कृति और परंपराओं की भव्यता को प्रदर्शित करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार बुनकरों की आजीविका को मजबूत करने, आधुनिक तकनीक के ज़रिये उत्पादन क्षमता बढ़ाने, मार्केटिंग के अवसरों का विस्तार करने और पारंपरिक कलाओं के संरक्षण के लक्ष्य के साथ कई कार्यक्रम संचालित कर रही है।

यह ऐसे समय में आया है जब हथकरघा क्षेत्र को मशीन-निर्मित कपड़ों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है और बुनकरों की आय सुनिश्चित करना नीति-निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

बीआरएस का दावा: पिछली सरकार ने बुनकरों को लौटाया

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव ने भी बुनकरों को बधाई दी। उन्होंने दावा किया कि अविभाजित आंध्र प्रदेश के दौर में कुशल बुनकर रोज़गार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन कर गए थे। उनके अनुसार, बीआरएस सरकार ने 'चेनेथा मित्रा', 'नेथाना कु चेयुथा', 'नेथाना बीमा', बथुकम्मा साड़ियाँ, ऋण माफी और पेंशन जैसी योजनाओं के ज़रिये बुनकरों को तेलंगाना वापस बुलाया और उनकी जीवनदशा सुधारी। रामा राव ने कहा कि बीआरएस पार्टी हमेशा बुनकरों के कल्याण और हथकरघा उद्योग के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।

केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी का 'वोकल फॉर लोकल' आह्वान

केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने भी बुनकरों को बधाई देते हुए कहा कि भारत की हथकरघा परंपरा देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, बेहतरीन कारीगरी और आत्मनिर्भरता की भावना को प्रतिबिंबित करती है। उन्होंने याद दिलाया कि 7 अगस्त 1905 को शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की भावना को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में बुनकर समुदाय के सम्मान में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की स्थापना की थी। उन्होंने 'विकसित भारत' के संकल्प के साथ हथकरघा क्षेत्र को समर्थन देने और 'वोकल फॉर लोकल' की भावना को मज़बूत करने का आह्वान किया।

आगे की राह

गौरतलब है कि तेलंगाना में हथकरघा बुनकरों की बड़ी आबादी है और राज्य की कई बुनाई परंपराओं को भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिल चुका है। राजनीतिक दलों की प्रतिस्पर्धी घोषणाओं के बीच असली परीक्षा यह होगी कि सरकारी योजनाएँ ज़मीनी स्तर पर बुनकरों तक कितनी प्रभावी रूप से पहुँचती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी उतना ही पुराना पैटर्न है — बधाई संदेश भरपूर, ज़मीनी बदलाव की जवाबदेही कम। बीआरएस और कांग्रेस दोनों बुनकर-कल्याण का श्रेय लेने की होड़ में हैं, जबकि असली सवाल यह है कि GI टैग प्राप्त इन परंपराओं के बुनकरों की औसत मासिक आय आज कितनी है। जब तक योजनाओं के क्रियान्वयन की पारदर्शी समीक्षा नहीं होगी, ये घोषणाएँ हर साल 7 अगस्त को दोहराई जाने वाली रस्म बनकर रह जाएंगी।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस हर वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में इसकी शुरुआत 7 अगस्त 1905 को आरंभ हुए स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में बुनकर समुदाय के सम्मान और हथकरघा परंपरा को बढ़ावा देने के लिए की थी।
तेलंगाना की प्रमुख हथकरघा परंपराएँ कौन सी हैं?
तेलंगाना की प्रमुख हथकरघा परंपराओं में पोचमपल्ली इकत, गडवाल, नारायणपेट, सिरसिल्ला और कोठाकोटा शामिल हैं। इनमें से कई को भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त है, जो उनकी विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देता है।
CM रेवंत रेड्डी ने बुनकरों के लिए क्या वादा किया?
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि उनकी सरकार बुनकरों की आजीविका मज़बूत करने, आधुनिक तकनीक से उत्पादन क्षमता बढ़ाने, मार्केटिंग के अवसरों का विस्तार करने और पारंपरिक कलाओं के संरक्षण के लिए कई कार्यक्रम चला रही है।
बीआरएस ने बुनकरों के लिए क्या दावे किए?
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव ने दावा किया कि पूर्व बीआरएस सरकार ने 'चेनेथा मित्रा', 'नेथाना बीमा', बथुकम्मा साड़ियाँ, ऋण माफी और पेंशन जैसी योजनाओं के ज़रिये उन बुनकरों को तेलंगाना वापस बुलाया जो अविभाजित आंध्र प्रदेश के दौर में दूसरे राज्यों में पलायन कर गए थे।
'वोकल फॉर लोकल' से हथकरघा बुनकरों को क्या फायदा होता है?
'वोकल फॉर लोकल' की भावना के तहत नागरिकों को हाथ से बुने उत्पाद खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे बुनकरों की सीधी आय बढ़ती है और मध्यस्थों पर निर्भरता कम होती है। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने इस दिवस पर नागरिकों से यही संकल्प दोहराने का आह्वान किया।
राष्ट्र प्रेस
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