9 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

विश्व आदिवासी दिवस पर तेलंगाना के राज्यपाल शुक्ला और CM रेवंत रेड्डी ने की समावेशी विकास की अपील

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
विश्व आदिवासी दिवस पर तेलंगाना के राज्यपाल शुक्ला और CM रेवंत रेड्डी ने की समावेशी विकास की अपील

सारांश

विश्व आदिवासी दिवस पर तेलंगाना में सत्ता और विपक्ष एक स्वर में बोले — राज्यपाल शुक्ला ने समावेशी विकास की अपील की, CM रेवंत रेड्डी ने आदिवासी संस्कृति को मानवता का मार्गदर्शक बताया, और बीआरएस के केटी रामा राव ने पूर्व सरकार की उपलब्धियाँ गिनाईं।

मुख्य बातें

9 अगस्त 2026 को विश्व आदिवासी दिवस पर तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने आदिवासी समुदायों को शुभकामनाएँ दीं।
राज्यपाल ने आदिवासियों के अधिकारों, पहचान और जीवन शैली का सम्मान करने तथा समान अवसर और समावेशी विकास सुनिश्चित करने की अपील की।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने आदिवासी संस्कृति को 'विश्व सभ्यता की जड़' और 'पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक प्रकाश' बताया।
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव ने एक्स पर पोस्ट कर पूर्व केसीआर सरकार द्वारा एसटी आरक्षण 6% से 10% करने और कुमराम भीम आदिवासी भवन के निर्माण की उपलब्धियाँ गिनाईं।
तेलंगाना में अनुसूचित जनजाति समुदाय राज्य की सांस्कृतिक विविधता का अभिन्न हिस्सा है; 9 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है।

तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने 9 अगस्त 2026 को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी समुदायों को शुभकामनाएँ देते हुए उनके अधिकारों, सम्मान और समावेशी विकास सुनिश्चित करने का आह्वान किया। हैदराबाद से जारी अपने संदेशों में दोनों नेताओं ने आदिवासी संस्कृति और प्रकृति-संरक्षण में उनकी भूमिका को अनमोल बताया।

राज्यपाल का संदेश

राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि आदिवासी समुदायों की समृद्ध संस्कृति, परंपराएँ और सदियों पुरानी समझ हमारी विरासत का अनमोल खजाना हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि पीढ़ियों से ये समुदाय जंगलों, जल, जैव विविधता और प्रकृति के संरक्षक रहे हैं तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती को बचाए हुए हैं।

राज्यपाल ने सभी से आग्रह किया, 'आइए हम उनके अमूल्य योगदान का सम्मान करें और उनकी विरासत को बचाने तथा सभी के लिए एक टिकाऊ भविष्य बनाने के लिए मिलकर काम करें।' उन्होंने समान अवसर और समावेशी विकास सुनिश्चित करने की भी अपील की।

मुख्यमंत्री की भावना

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि आदिवासी लोग प्रकृति को ईश्वर और जंगल को अपनी माँ मानते हैं और पीढ़ियों से अपनी संस्कृति व परंपराओं की रक्षा करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा, 'विश्व सभ्यता की जड़ और प्रकृति से अटूट रूप से जुड़ी जीवन शैली, यही आदिवासी लोगों की संस्कृति है।'

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आदिवासी समुदायों का ज्ञान, सामूहिक जीवन शैली और सांस्कृतिक संरक्षण पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक प्रकाश का काम करते हैं। उन्होंने सभी से मिलकर आदिवासियों के अधिकारों, अस्तित्व और संस्कृति का सम्मान करने तथा उनके कल्याण, विकास और आत्म-सम्मान को सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

बीआरएस का पक्ष और पूर्व सरकार की उपलब्धियाँ

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव ने कहा कि आदिवासी लोग विविध संस्कृतियों और परंपराओं के प्रतीक हैं और प्रकृति के सच्चे संरक्षक हैं। उन्होंने कहा, 'आदिवासी जो जंगलों, पेड़ों, बांबी और जानवरों से प्यार करते हैं और उनका सम्मान करते हैं — वे कुमरम भीम के साहस का प्रतीक हैं, जिन्होंने 'जल, जंगल, जमीन' का नारा बुलंद किया था।'

केटी रामा राव ने एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि पूर्व केसीआर सरकार ने हैदराबाद के बंजारा हिल्स में कुमराम भीम आदिवासी भवन का निर्माण कराया और आसिफाबाद जिले का नाम कुमराम भीम के नाम पर रखा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बीआरएस सरकार ने विधानसभा में अनुसूचित जनजाति आरक्षण को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत करने का प्रस्ताव पारित किया, आदिवासी बस्तियों को ग्राम पंचायत का दर्जा दिया, एसटी गुरुकुलों और कॉलेजों की संख्या बढ़ाई तथा अंबेडकर ओवरसीज स्कॉलरशिप जैसी योजनाएँ चलाईं।

विश्व आदिवासी दिवस का महत्त्व

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित 9 अगस्त को प्रतिवर्ष विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य दुनियाभर के स्वदेशी समुदायों के अधिकारों की रक्षा और उनकी विशिष्ट पहचान को सम्मान देना है। भारत में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या कुल आबादी का लगभग 8.6 प्रतिशत है, और तेलंगाना में यह समुदाय राज्य की सांस्कृतिक विविधता का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।

आगे की राह

विभिन्न दलों के नेताओं की एकजुट अपील यह संकेत देती है कि आदिवासी कल्याण तेलंगाना की राजनीति में एक केंद्रीय मुद्दा बना हुआ है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि सत्तारूढ़ और विपक्षी दल इन संकल्पों को नीतिगत धरातल पर किस रूप में उतारते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ये शब्द नीतियों में कब तब्दील होते हैं। तेलंगाना में एसटी आरक्षण बढ़ाने का प्रस्ताव विधानसभा में पारित हुआ, किंतु उसका व्यावहारिक क्रियान्वयन और न्यायिक स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी बीआरएस दोनों आदिवासी कल्याण का श्रेय लेने की होड़ में हैं — यह राजनीतिक प्रतिस्पर्धा आदिवासी समुदायों के लिए लाभदायक तभी होगी जब वादे जमीन पर उतरें।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व आदिवासी दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
विश्व आदिवासी दिवस प्रतिवर्ष 9 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र के आह्वान पर मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दुनियाभर के स्वदेशी समुदायों के अधिकारों की रक्षा, उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देना और उनके समावेशी विकास को सुनिश्चित करना है।
तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने आदिवासी दिवस पर क्या कहा?
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि आदिवासी समुदायों की संस्कृति और परंपराएँ हमारी विरासत का अनमोल खजाना हैं। उन्होंने सभी से आदिवासियों के अधिकारों, सम्मान और जीवन शैली का सम्मान करने तथा समान अवसर और समावेशी विकास सुनिश्चित करने की अपील की।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने आदिवासी समुदायों के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने आदिवासी संस्कृति को 'विश्व सभ्यता की जड़' बताया और कहा कि ये समुदाय प्रकृति को ईश्वर और जंगल को माँ मानते हैं। उन्होंने सभी से मिलकर आदिवासियों के कल्याण, विकास और आत्म-सम्मान को सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
बीआरएस के केटी रामा राव ने आदिवासी दिवस पर क्या उपलब्धियाँ गिनाईं?
केटी रामा राव ने बताया कि पूर्व केसीआर सरकार ने विधानसभा में एसटी आरक्षण 6% से बढ़ाकर 10% करने का प्रस्ताव पारित किया, हैदराबाद के बंजारा हिल्स में कुमराम भीम आदिवासी भवन बनवाया और आसिफाबाद जिले का नाम कुमराम भीम के नाम पर रखा। उन्होंने एसटी गुरुकुलों की संख्या बढ़ाने और अंबेडकर ओवरसीज स्कॉलरशिप जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया।
तेलंगाना में आदिवासी समुदायों की स्थिति क्या है?
तेलंगाना में अनुसूचित जनजातियाँ राज्य की सांस्कृतिक विविधता का अभिन्न हिस्सा हैं। भारत में कुल आबादी का लगभग 8.6 प्रतिशत हिस्सा अनुसूचित जनजातियों का है और ये समुदाय जंगल, जल और जैव विविधता के परंपरागत संरक्षक माने जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 2 दिन पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले