9 अगस्त 2026
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विश्व आदिवासी दिवस पर आंध्र प्रदेश: राज्यपाल नजीर, CM नायडू और पवन कल्याण ने आदिवासी संस्कृति संरक्षण का संकल्प लिया

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विश्व आदिवासी दिवस पर आंध्र प्रदेश: राज्यपाल नजीर, CM नायडू और पवन कल्याण ने आदिवासी संस्कृति संरक्षण का संकल्प लिया

सारांश

विश्व आदिवासी दिवस पर आंध्र प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री तीनों ने एक स्वर में आदिवासी संस्कृति और अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया। 'अदावी थल्ली बाटा' जैसी पहलों और शिक्षा-स्वास्थ्य-रोज़गार सुधार के वादों के साथ, असली परीक्षा अब ज़मीनी क्रियान्वयन की है।

मुख्य बातें

अब्दुल नजीर ने 9 अगस्त 2026 को विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण का आह्वान किया।
चंद्रबाबू नायडू ने आदिवासियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार में सुधार की प्रतिबद्धता दोहराई।
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने इस वर्ष के विषय 'मूल निवासी दाइयों का सम्मान' को रेखांकित किया और आदिवासी महिलाओं की भूमिका को सराहा।
'अदावी थल्ली बाटा' पहल के तहत दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और आजीविका सुधार का लक्ष्य रखा गया है।
तीनों नेताओं ने आदिवासी समुदायों को जंगलों के संरक्षक और भारतीय सांस्कृतिक विरासत की जीवंत आत्मा बताया।

आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर ने 9 अगस्त 2026 को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी समुदायों की परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने का स्पष्ट आह्वान किया। उन्होंने रेखांकित किया कि आदिवासी समुदाय भारतीय समाज, संस्कृति और विरासत में अमूल्य योगदान देते हैं और उनके अधिकारों तथा समावेशी विकास को सुनिश्चित करना राज्य की प्राथमिकता होनी चाहिए।

राज्यपाल का संदेश

राज्यपाल नजीर ने कहा, 'उनकी समृद्ध परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित किया जाना चाहिए। साथ ही उनके अधिकारों, सम्मान, समान अवसरों और समावेशी विकास को भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।' यह संदेश ऐसे समय में आया है जब देशभर में आदिवासी समुदायों के भूमि अधिकार और सांस्कृतिक अस्मिता को लेकर व्यापक विमर्श जारी है।

मुख्यमंत्री नायडू की प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने विश्व आदिवासी दिवस पर सभी आदिवासी भाई-बहनों को बधाई देते हुए कहा कि आदिवासी संस्कृति, परंपराएँ और जंगलों व प्रकृति से जुड़ी उनकी अनूठी जीवनशैली समाज के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार ने आदिवासियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार में सुधार का लक्ष्य रखा है। नायडू ने कहा, 'सरकार आदिवासियों के आत्म-सम्मान, आत्मनिर्भरता और प्रगति को बढ़ाने के उद्देश्य से लगातार प्रयास कर रही है।'

उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण का व्यक्तिगत जुड़ाव

उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने इस अवसर पर कहा कि आदिवासी समुदाय जंगलों के शाश्वत संरक्षक, प्राचीन ज्ञान के रक्षक और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की जीवंत आत्मा हैं। उन्होंने इस वर्ष के विषय — 'मूल निवासी दाइयों का सम्मान: जीवन और कल्याण की सुरक्षा' — का उल्लेख करते हुए कहा कि यह हमें पीढ़ियों से चले आ रहे अमूल्य पारंपरिक ज्ञान और आदिवासी महिलाओं की भूमिका की याद दिलाता है।

पवन कल्याण ने कहा, 'जंगलों ने पीढ़ियों से हमारे आदिवासी समुदायों की रक्षा की है और बदले में उन्होंने प्रकृति, संस्कृति और प्राचीन ज्ञान के संरक्षक के रूप में जंगलों की रक्षा की है।' उन्होंने आदिवासी समुदायों के साथ अपने जुड़ाव को 'बहुत व्यक्तिगत' बताया।

अदावी थल्ली बाटा: ज़मीनी पहल

उपमुख्यमंत्री ने 'अदावी थल्ली बाटा' जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए बताया कि दूर-दराज के इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी, आजीविका के अवसर और वन्यजीव संरक्षण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि विकास हर आदिवासी परिवार तक पहुँचे। उन्होंने कहा, 'उनका विश्वास एक जिम्मेदारी है। उनकी विरासत हमारा गौरव है। उनकी प्रगति हमारी प्रतिबद्धता है।'

आगे की राह

गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश में आदिवासी आबादी राज्य की कुल जनसंख्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और एजेंसी क्षेत्रों में निवास करती है। राज्य सरकार के ये संकल्प क्रियान्वयन के स्तर पर कितने प्रभावी होते हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा — विशेषकर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच के संदर्भ में।

संपादकीय दृष्टिकोण

मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री तीनों का एक साथ संकल्प लेना राजनीतिक एकजुटता का प्रतीक है, लेकिन आंध्र प्रदेश के एजेंसी क्षेत्रों में भूमि अधिकार, वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन और स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक पहुँच को लेकर सवाल अभी भी बने हुए हैं। 'अदावी थल्ली बाटा' जैसी पहलें सराहनीय हैं, पर इनकी सफलता तब मापी जाएगी जब दूरदराज की आदिवासी बस्तियों में शिक्षा और स्वास्थ्य के आँकड़े बदलें। वार्षिक दिवस पर दिए जाने वाले ये वक्तव्य तब तक अधूरे हैं जब तक नीति और बजट आवंटन में आदिवासी प्राथमिकताएँ दिखाई न दें।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व आदिवासी दिवस 2026 का विषय क्या था?
इस वर्ष का विषय 'मूल निवासी दाइयों का सम्मान: जीवन और कल्याण की सुरक्षा' था। यह विषय आदिवासी महिलाओं और समुदायों की जीवन, स्वास्थ्य, संस्कृति व विरासत की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।
आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर ने विश्व आदिवासी दिवस पर क्या कहा?
राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर ने 9 अगस्त 2026 को आदिवासी समुदायों की समृद्ध परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने का आह्वान किया। उन्होंने आदिवासियों के अधिकारों, सम्मान, समान अवसरों और समावेशी विकास को सुनिश्चित करने पर भी बल दिया।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने आदिवासी विकास के लिए क्या वादे किए?
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि सरकार आदिवासियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आदिवासियों के आत्म-सम्मान, आत्मनिर्भरता और सर्वांगीण विकास को सरकार की प्राथमिकता बताया।
'अदावी थल्ली बाटा' पहल क्या है?
'अदावी थल्ली बाटा' आंध्र प्रदेश सरकार की एक पहल है जिसका उद्देश्य दूर-दराज के आदिवासी इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी, आजीविका के अवसर और वन्यजीव संरक्षण सुनिश्चित करना है। उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने इसे आदिवासी परिवारों तक विकास पहुँचाने और उनकी पहचान व परंपराओं को सुरक्षित रखने के माध्यम के रूप में रेखांकित किया।
पवन कल्याण ने आदिवासी समुदायों के बारे में क्या कहा?
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने आदिवासी समुदायों को जंगलों के शाश्वत संरक्षक और भारत की सांस्कृतिक विरासत की जीवंत आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों के साथ उनका जुड़ाव व्यक्तिगत है और उनके स्नेह व विश्वास ने उनके कल्याण के लिए काम करने का संकल्प मज़बूत किया है।
राष्ट्र प्रेस
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