विश्व आदिवासी दिवस पर आंध्र प्रदेश: राज्यपाल नजीर, CM नायडू और पवन कल्याण ने आदिवासी संस्कृति संरक्षण का संकल्प लिया
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर ने 9 अगस्त 2026 को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी समुदायों की परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने का स्पष्ट आह्वान किया। उन्होंने रेखांकित किया कि आदिवासी समुदाय भारतीय समाज, संस्कृति और विरासत में अमूल्य योगदान देते हैं और उनके अधिकारों तथा समावेशी विकास को सुनिश्चित करना राज्य की प्राथमिकता होनी चाहिए।
राज्यपाल का संदेश
राज्यपाल नजीर ने कहा, 'उनकी समृद्ध परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित किया जाना चाहिए। साथ ही उनके अधिकारों, सम्मान, समान अवसरों और समावेशी विकास को भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।' यह संदेश ऐसे समय में आया है जब देशभर में आदिवासी समुदायों के भूमि अधिकार और सांस्कृतिक अस्मिता को लेकर व्यापक विमर्श जारी है।
मुख्यमंत्री नायडू की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने विश्व आदिवासी दिवस पर सभी आदिवासी भाई-बहनों को बधाई देते हुए कहा कि आदिवासी संस्कृति, परंपराएँ और जंगलों व प्रकृति से जुड़ी उनकी अनूठी जीवनशैली समाज के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार ने आदिवासियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार में सुधार का लक्ष्य रखा है। नायडू ने कहा, 'सरकार आदिवासियों के आत्म-सम्मान, आत्मनिर्भरता और प्रगति को बढ़ाने के उद्देश्य से लगातार प्रयास कर रही है।'
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण का व्यक्तिगत जुड़ाव
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने इस अवसर पर कहा कि आदिवासी समुदाय जंगलों के शाश्वत संरक्षक, प्राचीन ज्ञान के रक्षक और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की जीवंत आत्मा हैं। उन्होंने इस वर्ष के विषय — 'मूल निवासी दाइयों का सम्मान: जीवन और कल्याण की सुरक्षा' — का उल्लेख करते हुए कहा कि यह हमें पीढ़ियों से चले आ रहे अमूल्य पारंपरिक ज्ञान और आदिवासी महिलाओं की भूमिका की याद दिलाता है।
पवन कल्याण ने कहा, 'जंगलों ने पीढ़ियों से हमारे आदिवासी समुदायों की रक्षा की है और बदले में उन्होंने प्रकृति, संस्कृति और प्राचीन ज्ञान के संरक्षक के रूप में जंगलों की रक्षा की है।' उन्होंने आदिवासी समुदायों के साथ अपने जुड़ाव को 'बहुत व्यक्तिगत' बताया।
अदावी थल्ली बाटा: ज़मीनी पहल
उपमुख्यमंत्री ने 'अदावी थल्ली बाटा' जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए बताया कि दूर-दराज के इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी, आजीविका के अवसर और वन्यजीव संरक्षण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि विकास हर आदिवासी परिवार तक पहुँचे। उन्होंने कहा, 'उनका विश्वास एक जिम्मेदारी है। उनकी विरासत हमारा गौरव है। उनकी प्रगति हमारी प्रतिबद्धता है।'
आगे की राह
गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश में आदिवासी आबादी राज्य की कुल जनसंख्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और एजेंसी क्षेत्रों में निवास करती है। राज्य सरकार के ये संकल्प क्रियान्वयन के स्तर पर कितने प्रभावी होते हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा — विशेषकर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच के संदर्भ में।