9 अगस्त 2026
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विश्व आदिवासी दिवस 2026: गडकरी, खड़गे, धामी समेत दर्जनों नेताओं ने आदिवासी समाज को दी शुभकामनाएं

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विश्व आदिवासी दिवस 2026: गडकरी, खड़गे, धामी समेत दर्जनों नेताओं ने आदिवासी समाज को दी शुभकामनाएं

सारांश

विश्व आदिवासी दिवस पर भारत के राजनीतिक वर्ग ने एकसुर में आदिवासी समाज को श्रद्धांजलि दी — लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये संदेश नीतिगत बदलाव में बदलेंगे। गडकरी से लेकर खड़गे और पवन कल्याण तक, सभी ने अधिकार और सम्मान की बात की; अब परीक्षा क्रियान्वयन की है।

मुख्य बातें

9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी , कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित देशभर के नेताओं ने आदिवासी समाज को शुभकामनाएं दीं।
इस वर्ष का अंतरराष्ट्रीय विषय 'मूल निवासी दाइयों का सम्मान: जीवन और भलाई की सुरक्षा' है, जो आदिवासी महिलाओं की भूमिका को केंद्र में रखता है।
आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने 'अदावी थल्ली बाटा' जैसी पहलों के माध्यम से आदिवासी विकास का संकल्प दोहराया।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनजाति कल्याण, शिक्षा और रोजगार में निरंतर कार्य का भरोसा दिलाया।
कांग्रेस ने आदिवासी समाज के जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

नई दिल्ली, 9 अगस्तविश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण सहित देशभर के नेताओं ने आदिवासी समाज को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। नेताओं ने एकसुर में आदिवासी समुदायों को पर्यावरण संतुलन और सांस्कृतिक धरोहर का मूल आधार बताते हुए उनके अधिकारों एवं सम्मान की रक्षा का संकल्प दोहराया।

केंद्रीय मंत्री गडकरी और पूर्व मंत्री हर्षवर्धन के संदेश

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर लिखा, 'विश्व आदिवासी दिवस पर हम भारत के आदिवासी समुदायों का सम्मान करते हैं, जो प्राचीन परंपराओं, विविध संस्कृतियों, पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव के संरक्षक हैं। उनकी कहानियां, समझदारी और मजबूती भारत की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा हैं। आइए हम उनकी पहचान का जश्न मनाएं, उनके अधिकारों का सम्मान करें और एक ऐसा भविष्य बनाएं जहां वे सम्मान के साथ आगे बढ़ सकें।'

पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने भी एक्स पर लिखा, 'प्रकृति के साथ उनका गहरा जुड़ाव, सदियों पुराना ज्ञान और मुश्किलों का सामना करने की क्षमता हमारी साझा विरासत का अनमोल हिस्सा है।' उन्होंने आदिवासी समुदायों के अधिकारों, सम्मान और एक टिकाऊ भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता दोहराने का आह्वान किया।

खड़गे और अखिलेश यादव की अपील

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर कहा, 'भारत की समृद्ध संस्कृति, प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और हमारी विविधता को सहेजने में आदिवासी समाज का योगदान अमूल्य है।' खड़गे ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी आदिवासी समाज के जल-जंगल-जमीन, संस्कृति, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव संकल्पबद्ध है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी एक्स पर समस्त आदिवासी समाज को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

पवन कल्याण का व्यक्तिगत संकल्प और इस वर्ष का विषय

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने एक्स पर लिखा, 'जंगलों ने पीढ़ियों से हमारे आदिवासी समुदायों की रक्षा की है और बदले में उन्होंने प्रकृति, संस्कृति और प्राचीन ज्ञान के संरक्षक के रूप में जंगलों की रक्षा की है।' उन्होंने बताया कि इस वर्ष का विषय 'मूल निवासी दाइयों का सम्मान: जीवन और भलाई की सुरक्षा' पारंपरिक ज्ञान और आदिवासी महिलाओं की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करता है।

पवन कल्याण ने 'अदावी थल्ली बाटा' जैसी पहलों, दूर-दराज के इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी, आजीविका के अवसरों और वन्यजीव संरक्षण के माध्यम से विकास को हर आदिवासी परिवार तक पहुँचाने का संकल्प दोहराया।

राज्य सरकारों और अन्य नेताओं के संदेश

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आदिवासी समाज के सशक्तिकरण को नई गति मिली है। उन्होंने उत्तराखंड में जनजाति कल्याण, शिक्षा, रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए निरंतर कार्य जारी रहने का भरोसा दिलाया।

राजस्थान सरकार ने एक्स पर कहा, 'हमारे आदिवासी समुदाय पर्यावरण संतुलन और सांस्कृतिक धरोहर के मुख्य आधार हैं।' बिहार सरकार में मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी आदिवासी सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्र की अमूल्य धरोहर बताते हुए उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

आगे की राह

गौरतलब है कि 9 अगस्त को प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व के मूल निवासियों का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष के विषय ने आदिवासी महिलाओं की भूमिका और पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान को केंद्र में रखा है। नेताओं की इन शुभकामनाओं के बीच आदिवासी अधिकार संगठनों की नज़र इस बात पर रहेगी कि ये संकल्प नीतिगत कार्रवाई में कितनी तेजी से तब्दील होते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन आदिवासी अधिकार संगठन लंबे समय से यह सवाल उठाते रहे हैं कि ये शुभकामनाएं ज़मीनी नीतियों में कितनी तब्दील होती हैं। वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन में विलंब, विस्थापन के अनसुलझे मामले और आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे की कमी — ये सब उस खाई की याद दिलाते हैं जो घोषणाओं और वास्तविकता के बीच बनी हुई है। इस वर्ष का विषय आदिवासी महिलाओं पर केंद्रित है, जो एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन बिना बजटीय प्रतिबद्धता और जवाबदेही तंत्र के, यह भी महज़ एक नारे तक सिमट सकता है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व आदिवासी दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
विश्व आदिवासी दिवस प्रतिवर्ष 9 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र द्वारा मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दुनियाभर के मूल निवासी और आदिवासी समुदायों की संस्कृति, अधिकारों और योगदान को मान्यता देना है।
2026 में विश्व आदिवासी दिवस का विषय क्या है?
इस वर्ष का विषय 'मूल निवासी दाइयों का सम्मान: जीवन और भलाई की सुरक्षा' है। यह विषय पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान और आदिवासी महिलाओं की जीवन-रक्षक भूमिका को केंद्र में रखता है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आदिवासी दिवस पर क्या कहा?
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि आदिवासी समाज का भारत की संस्कृति और विविधता को सहेजने में योगदान अमूल्य है। उन्होंने कांग्रेस की आदिवासी समाज के जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।
पवन कल्याण की 'अदावी थल्ली बाटा' पहल क्या है?
आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के अनुसार, 'अदावी थल्ली बाटा' आदिवासी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, आजीविका और वन संरक्षण को जोड़ने वाली एक राज्य-स्तरीय पहल है। इसका लक्ष्य विकास को हर आदिवासी परिवार तक पहुँचाना है, जबकि उनकी पहचान और परंपराएं भी सुरक्षित रहें।
आदिवासी समुदाय पर्यावरण के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
आदिवासी समुदाय सदियों से वनों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षक रहे हैं। राजस्थान सरकार सहित कई नेताओं ने रेखांकित किया कि ये समुदाय पर्यावरण संतुलन और सांस्कृतिक धरोहर के मुख्य आधार हैं, और उनका पारंपरिक ज्ञान आधुनिक संरक्षण प्रयासों के लिए अपरिहार्य है।
राष्ट्र प्रेस
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