CGPSC भर्ती घोटाला: ईडी ने तत्कालीन चेयरमैन तमन सिंह सोनवानी समेत अन्य के खिलाफ PMLA कोर्ट में चार्जशीट दायर
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर जोनल ऑफिस ने 23 सितंबर 2026 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत विशेष न्यायालय (PMLA), रायपुर में अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दायर की है। आरोपियों में CGPSC के तत्कालीन चेयरमैन तमन सिंह सोनवानी, छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्यमंत्री कार्यालय में तत्कालीन ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) चेतन बोरघरिया और अन्य शामिल हैं। यह मामला CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2020 और 2021 में बड़े पैमाने पर कथित भ्रष्टाचार, प्रश्नपत्र लीक और अनियमितताओं से जुड़ा है।
मामले की पृष्ठभूमि और जांच का दायरा
ईडी की जांच मूलत: EOW/ACB, रायपुर द्वारा CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2020 और 2021 में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। बाद में इस मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपने हाथ में लिया, जिसने तमन सिंह सोनवानी और अन्य के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट दायर की। इसी आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच शुरू की।
जांच के दौरान ईडी ने पहले ही एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) जारी करते हुए तमन सिंह सोनवानी, उत्कर्ष चंद्राकर और अन्य की ₹47 लाख की चल और अचल संपत्तियाँ जब्त की थीं, जिन्हें अपराध से अर्जित आय के रूप में चिह्नित किया गया था।
प्रश्नपत्र लीक और अवैध वसूली का कथित तंत्र
ईडी की जांच के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर ने अन्य लोगों के साथ मिलकर CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021 के विभिन्न उम्मीदवारों से ₹3 करोड़ से अधिक की अवैध रकम वसूली। यह राशि अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में कथित पहुंच और प्रभाव का उपयोग करके उनका चयन सुनिश्चित करने के वादे पर ली गई थी।
जांच में यह भी सामने आया कि प्रारंभिक परीक्षा से पूर्व उम्मीदवारों को रायपुर के सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में एकत्रित किया गया और वहाँ कथित तौर पर लीक हुआ प्रश्नपत्र वितरित किया गया। मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए अभ्यर्थियों को बरनवापारा सैंक्चुअरी रिजॉर्ट में ठहराया गया, जहाँ कथित रूप से लीक हुए प्रश्नपत्रों के आधार पर कोचिंग दी गई।
चेयरमैन पर भर्ती प्रक्रिया में हेरफेर के आरोप
जांच में यह भी उजागर हुआ कि CGPSC चेयरमैन के पद पर रहते हुए तमन सिंह सोनवानी पर कथित तौर पर अपने रिश्तेदारों और पसंदीदा उम्मीदवारों का चयन सुनिश्चित करने के लिए भर्ती प्रक्रिया में हेरफेर करने के आरोप हैं। गौरतलब है कि CGPSC राज्य सेवाओं में चयन एक अत्यंत प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया है, और परीक्षा में पारदर्शिता की माँग लंबे समय से उठती रही है।
गिरफ्तारियाँ और आगे की कार्रवाई
PMLA, 2002 की धारा 19 के अंतर्गत जांच के दौरान 25 जुलाई को तमन सिंह सोनवानी, 1 सितंबर को उत्कर्ष चंद्राकर और 11 सितंबर को चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया गया। तीनों अभी न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी के अनुसार इस मामले में आगे की जांच अभी जारी है और नए तथ्य सामने आने पर अतिरिक्त कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता।
यह मामला छत्तीसगढ़ में भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर बड़े सवाल उठाता है। विशेष न्यायालय (PMLA) में दायर इस अभियोजन शिकायत के बाद अब सुनवाई की प्रक्रिया आरंभ होगी और आरोपियों को आरोपों का सामना करना होगा।