कारगिल विजय दिवस: तेलंगाना राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने वीर सैनिकों को दी भावभीनी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कारगिल युद्ध के शहीदों और वीर सैनिकों को नमन करते हुए कहा कि उनके अदम्य साहस, अटूट राष्ट्रभक्ति और सर्वोच्च बलिदान ने भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को सुरक्षित रखा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राष्ट्र इन अमर वीरों का सदैव ऋणी रहेगा।
राज्यपाल का संदेश
राज्यपाल शुक्ला ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए लिखा, 'कारगिल युद्ध के अमर वीरों को भावभीनी श्रद्धांजलि, जिनके असाधारण साहस, अटूट राष्ट्रभक्ति और सर्वोच्च बलिदान ने हमारे राष्ट्र की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा की।' उन्होंने यह भी कहा कि कारगिल के सैनिकों की कर्तव्यनिष्ठा और निस्वार्थ सेवा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत बनी रहेगी। राज्यपाल ने देशवासियों से आग्रह किया कि वे राष्ट्रीय एकता, अखंडता और निस्वार्थ सेवा के उन आदर्शों को जीवित रखें जिनके लिए कारगिल के वीरों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की श्रद्धांजलि
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने भी कारगिल विजय दिवस पर शहीद सैनिकों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना के जवानों का अद्वितीय साहस और सर्वोच्च बलिदान देश के प्रत्येक नागरिक को प्रेरित करता है। मुख्यमंत्री ने शहीदों के प्रति राष्ट्र की अटूट कृतज्ञता व्यक्त की।
केंद्रीय मंत्रियों की प्रतिक्रिया
केंद्रीय कोयला एवं खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी ने भी भारतीय सशस्त्र बलों के वीर जवानों को नमन किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'हमारे वीर सैनिकों का अद्वितीय साहस, बलिदान और देशभक्ति हर भारतीय को प्रेरित करती है। आइए, एक मजबूत और एकजुट भारत के निर्माण का संकल्प लें।'
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने कारगिल के शौर्य को याद करते हुए कहा, 'आज हम उन वीरों को याद करते हैं जिन्होंने साबित किया कि एक भारतीय सैनिक के साहस से बड़ी कोई चुनौती नहीं हो सकती। कारगिल की विजय हमारे सशस्त्र बलों के साहस, अनुशासन और निस्वार्थ समर्पण की अमर मिसाल है। भारत उनके बलिदान का सदैव ऋणी रहेगा।'
कारगिल विजय दिवस का महत्त्व
कारगिल विजय दिवस प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को भारतीय सेना के अदम्य शौर्य, वीरता और बलिदान की स्मृति में मनाया जाता है। यह दिन 1999 में पाकिस्तानी घुसपैठ के विरुद्ध लड़े गए उस ऐतिहासिक युद्ध की याद दिलाता है, जिसमें भारतीय सैनिकों ने दुर्गम पहाड़ी चोटियों पर तिरंगा फहराकर देश की संप्रभुता की रक्षा की। यह अवसर देशवासियों को उन वीरों के योगदान के प्रति कृतज्ञ और राष्ट्रीय एकता के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देता है।
गौरतलब है कि हैदराबाद सहित देशभर में इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है। राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व द्वारा इस प्रकार के सामूहिक स्मरण से राष्ट्रीय भावना को बल मिलता है।