21 जुलाई 2026
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तेलंगाना स्थापना दिवस: राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि, बोले — 'यह राज्य बलिदान का प्रतीक'

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तेलंगाना स्थापना दिवस: राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि, बोले — 'यह राज्य बलिदान का प्रतीक'

सारांश

तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने स्थापना दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यह राज्य दशकों के लोकतांत्रिक संघर्ष का प्रतीक है। काकतीय युग की कृषि विरासत से लेकर आज के आईटी और स्टार्टअप हब तक — उन्होंने एक संतुलित और समृद्ध तेलंगाना की परिकल्पना रखी।

मुख्य बातें

राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने 2 जून 2026 को लोक भवन, हैदराबाद में तेलंगाना स्थापना दिवस समारोह की अध्यक्षता की।
राज्यपाल ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और पुलिस बलों से 'गार्ड ऑफ ऑनर' ग्रहण किया।
तेलंगाना आंदोलन के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
काकतीय युग की सिंचाई विरासत से आधुनिक परियोजनाओं तक कृषि समुदाय के योगदान की सराहना की गई।
तेलंगाना की आईटी, फार्मास्यूटिकल्स और स्टार्टअप क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय पहचान को रेखांकित किया गया।
समारोह में विशेष मुख्य सचिव एम.
दाना किशोर और संयुक्त सचिव शशिकिरण चारी उपस्थित रहे।

तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने 2 जून 2026 को तेलंगाना राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर कहा कि इस राज्य का गठन उन शहीदों के बलिदान और दशकों तक चले लोकतांत्रिक संघर्ष का जीवंत प्रतीक है, जिन्होंने एक अलग राज्य के सपने के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। हैदराबाद स्थित लोक भवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और पुलिस बलों से 'गार्ड ऑफ ऑनर' ग्रहण किया।

शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि

राज्यपाल शुक्ला ने तेलंगाना आंदोलन के दौरान प्राण गँवाने वाले शहीदों को विशेष रूप से याद किया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने राज्य के सभी नागरिकों तथा विश्व के विभिन्न हिस्सों में बसे तेलंगाना के बेटे-बेटियों को स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ दीं। राज्यपाल ने सभी से आह्वान किया कि वे उन व्यक्तित्वों को याद करें और सम्मान दें, जिन्होंने आधुनिक तेलंगाना की नींव रखी।

सांस्कृतिक और कृषि विरासत की सराहना

राज्यपाल ने संस्कृत सूक्ति 'जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी' — अर्थात 'माता और मातृभूमि स्वर्ग से भी श्रेष्ठ हैं' — का उल्लेख करते हुए मातृभूमि के प्रति गहरी आस्था प्रकट की। उन्होंने कहा कि तेलंगाना की सदियों पुरानी संस्कृति, परंपराएँ और ग्रामीण कृषि विरासत ही इस राज्य की सच्ची जीवनधारा हैं।

शुक्ला ने काकतीय युग के तालाबों की ऐतिहासिक शृंखला से लेकर आज की आधुनिक सिंचाई परियोजनाओं तक कृषि समुदाय के योगदान की प्रशंसा की, जिन्होंने तेलंगाना को एक हरी-भरी और उपजाऊ भूमि में रूपांतरित किया है। गौरतलब है कि तेलंगाना का यह कृषि इतिहास राज्य की पहचान का अभिन्न हिस्सा रहा है।

आईटी, फार्मा और स्टार्टअप में अंतरराष्ट्रीय पहचान

राज्यपाल ने गर्व के साथ रेखांकित किया कि कृषि के साथ-साथ तेलंगाना ने आईटी, फार्मास्यूटिकल्स और स्टार्टअप क्षेत्रों में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। यह ऐसे समय में आया है जब हैदराबाद को वैश्विक तकनीकी केंद्र के रूप में स्थापित करने की होड़ तेज़ हो रही है।

समृद्ध तेलंगाना की परिकल्पना

संवैधानिक मूल्यों और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' (सभी सुखी हों) के आदर्श से प्रेरित होकर, राज्यपाल ने एक संतुलित और समृद्ध तेलंगाना की अपनी आकांक्षा व्यक्त की — जहाँ ग्रामीण विकास, शहरी आधुनिकीकरण और समाज के सभी वर्गों का कल्याण एकसाथ आगे बढ़े। उन्होंने आशा जताई कि तेलंगाना राष्ट्र की प्रगति में और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

समारोह में राज्यपाल के विशेष मुख्य सचिव एम. दाना किशोर, संयुक्त सचिव शशिकिरण चारी तथा लोक भवन के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु यह ध्यान देने योग्य है कि तेलंगाना गठन के बारह वर्ष बाद भी राज्य के भीतर क्षेत्रीय असमानताओं और वादा किए गए विकास की गति पर बहस जारी है। काकतीय विरासत और आईटी उपलब्धियों की सराहना उचित है, परंतु ग्रामीण तेलंगाना में कृषि संकट और युवा बेरोज़गारी जैसे मुद्दे स्थापना दिवस के उत्सव की आड़ में अक्सर ओझल हो जाते हैं। राजभवन से आने वाले ऐसे संबोधनों की असली परीक्षा नीतिगत दबाव में होती है — न कि केवल मंच पर।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना राज्य स्थापना दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
तेलंगाना राज्य स्थापना दिवस प्रतिवर्ष 2 जून को मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग होकर तेलंगाना भारत के 29वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया था। यह दिन उन शहीदों की स्मृति को समर्पित है जिन्होंने दशकों के आंदोलन में अपने प्राण दिए।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने स्थापना दिवस पर क्या कहा?
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि तेलंगाना का गठन शहीदों के बलिदान और लोकतांत्रिक संघर्षों का प्रतीक है। उन्होंने 'जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी' सूक्ति का उल्लेख करते हुए मातृभूमि की श्रेष्ठता पर बल दिया और एक संतुलित, समृद्ध तेलंगाना की परिकल्पना रखी।
2026 के स्थापना दिवस समारोह में कौन-कौन से कार्यक्रम हुए?
हैदराबाद के लोक भवन में राज्यपाल शुक्ला ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और पुलिस बलों से 'गार्ड ऑफ ऑनर' ग्रहण किया। इसके बाद उन्होंने तेलंगाना आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और राज्य के नागरिकों को शुभकामनाएँ दीं।
तेलंगाना ने किन क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की है?
राज्यपाल के अनुसार, तेलंगाना ने कृषि के अलावा आईटी, फार्मास्यूटिकल्स और स्टार्टअप क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। हैदराबाद आज देश के प्रमुख तकनीकी और जीवन-विज्ञान केंद्रों में से एक माना जाता है।
काकतीय युग के तालाबों का तेलंगाना से क्या संबंध है?
काकतीय राजवंश ने मध्यकाल में तेलंगाना क्षेत्र में तालाबों की एक विस्तृत शृंखला बनाई थी, जो सिंचाई का प्रमुख स्रोत रही। राज्यपाल शुक्ला ने इस ऐतिहासिक कृषि विरासत का उल्लेख करते हुए आधुनिक सिंचाई परियोजनाओं तक की यात्रा को तेलंगाना की पहचान का हिस्सा बताया।
राष्ट्र प्रेस
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